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सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

विश्व हिंदी सचिवालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय हिंदी कहानी प्रतियोगिता

विश्व हिंदी सचिवालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय हिंदी कहानी प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिये विश्व के हर कोने से हिंदी कहानी का स्वागत है। प्रतियोगिता के विषय में विस्तृत जानकारी इस प्रकार है-

प्रथम पुरस्कार : ८०० अमेरिकी डॉलर,  एक द्वितीय पुरस्कार : ५०० अमेरिकी डॉलर, एक तृतीय पुरस्कार : ३०० अमेरिकी डॉलर, १० सांत्वना पुरस्कार : १०० अमेरिकी डालर


 नियम व शर्तें :
 
  • कहानी देवनागरी लिपि में साफ़-साफ़ हस्तलिखित अथवा टंकित हो ।
  • एक प्रतियोगी से केवल एक ही कहानी स्वीकृत की जाएगी ।
  • प्रत्येक प्रविष्टि अप्रकाशित मौलिक रचना हो एवं कॉपीराइट से स्वतंत्र हो ।
  • प्रत्येक प्रविष्टि छद्म नाम से हस्ताक्षरित हो ।
  • प्रतियोगी का नाम, पता, फ़ोन नंबर तथा छद्म नाम एक अलग बंद लिफ़ाफ़े में डालकर उसे मुख्य लिफ़ाफ़े में संलग्न करना चाहिए ।
  • मुख्य लिफ़ाफ़े पर 'अंतर्राष्ट्रीय हिंदी कहानी प्रतियोगिता' लिखा होना चाहिए ।

शब्द संख्या : अधिकतम ५,०००।
विजेताओं की कहानियाँ सचिवालय की भावी साहित्यिक पत्रिका व वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएँगी । जूरी का निर्णय अंतिम होगा ।

कहानी १० नवंबर, २०१२ तक निम्नलिखित पते पर पहुँच जानी चाहिए ।
World Hindi Secretariat,
Swift Lane,
Forest Side, Mauritius

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें :
दूरभाष :   00-230-676 1196
फ़ैक्स :   00-230-676 1224
ई-मेल : info@vishwahindi.com

गुरुवार, 17 मई 2012

मॉरीशस में हिंदी आई. सी. टी, ई-पत्रकारिता तथा ब्लॉगिंग पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी-कार्यशाला

मॉरीशस में विश्व हिंदी सचिवालय द्वारा हिंदी आई. सी. टी, ई-पत्रकारिता तथा ब्लॉगिंग पर २३ से २७ अप्रैल २०१२ तक, एक दिवसीय संगोष्ठी तथा चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन राजीव गांधी साईंस सेंटर के भव्य सभागार में किया गया। इस संगोष्ठी-कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य हिंदी लेखकों, छात्रों, अध्यापकों, शिक्षाविदों और हिंदी भाषा के अन्य प्रयोगकर्ताओं को हिंदी और आई.सी. टी. के क्षेत्र के नवीनतम उपलब्धियों और प्रौद्योगिकी के बारे में परिचित कराना था ताकि उन्हें अपने खुद के ब्लॉग, ई-पत्रिका और वेबसाइट बनाने की दिशा में सही प्रशिक्षण के साथ प्रेरित किया जा सके और अंततः इंटरनेट पर हिंदी भाषा को बढ़ावा मिल पाए। संगोष्ठी-कार्यशाला का संचालन करने के लिए तीन हिंदी विशेषज्ञ, श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच, श्री ललित कुमार तथा श्रीमती पूर्णिमा वर्मन को आमंत्रित किया गया था।

उद्घाटन

सोमवार २३ अप्रैल को आयोजित उद्घाटन समारोह से संगोष्ठी-कार्यशाला का श्रीगणेश हुआ। इस अवसर पर, माननीय डॉ. वसंत कुमार बनवारी, शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सचिवालय की महासचिव, श्रीमती पूनम जुनेजा ने स्वागत भाषण दिया, मॉरीशस में महामहिम भारतीय उच्चायुक्त का प्रतिनिधित्व करते हुए भारतीय उच्चायोग के द्वितीय सचिव (शिक्षा व भाषा), श्री मीमांसक ने मॉरीशस सरकार और भारत सरकार के सौजन्य में कार्यरत विश्व हिंदी सचिवालय के कार्यों की सराहना की और माननीय डॉ. वसंत कुमार बनवारी, शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्री समारोह के मुख्य अतिथि का दायित्व निभाया। शिक्षा मंत्री ने विश्व हिंदी सचिवालय के प्रयास की सराहना की।

संगोष्ठी

उद्घाटन समारोह के पश्चात हिंदी संगठन के प्रधान श्री राजनारायण गति जी की अध्यक्षता में संगोष्ठी का प्रथम सत्र लगा। हिंदी के सभी क्षेत्रों में आधुनिक प्रौद्योगिकी की आवश्यकता विषय पर महात्मा गाँधी संस्थान में हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक श्री कुमारदत्त गुदारी ने अपने विचार व्यक्त किए। इसी पर बात करते हुए विश्व प्रसिद्ध हिंदी-आई.सी.टी विशेषज्ञ श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच ने हिंदी और आई.सी.टी विषय पर अपने अनमोल विचार प्रस्तुत किये। इसके पश्चात डी.ए.वी डिग्री कॉलेज के निदेशक डॉ. उदय नारायण गंगू की अध्यक्षता में दूसरा सत्र चला। इस सत्र की प्रथम वक्ता, अनुभूति-अभिव्यक्ति जाल स्थल की संपादक, शारजाह से आई श्रीमती पूर्णिमा वर्मन ने हिंदी मीडिया, पत्रकारिता और आई.सी.टी विषय पर बोलते हुए कहा- सूचना तकनीक एवं वैश्वीकरण का आपसे में घनिष्ट संबंध है। दोनो का विकास एक दूसरे पर आधारित है। लेकिन तकनीक का विकास मानवीय पक्ष को ध्यान में रखकर हो यह भी बहुत आवश्यक है। हिंदी साहित्य और आई.सी.टी विषय को चर्चित ब्लॉगर और कविता कोश के संस्थापक श्री ललित कुमार ने सभी से परिचय करवाया। हिंदी साहित्य अब इंटरनेट में जिस व्यापकता से मौजूद है और जिस प्रकार से इंटरनेट पर नवीन रचनाएँ प्रकाशित हो रही हैं, उसपर श्री ललित कुमार ने प्रस्तावना दी।

कार्यशाला

संगोष्ठी के समापन के पश्चात दूसरे ही दिन मंगलवार २४ अप्रैल की सुबह श्री ललित कुमार की प्रस्तुति में आई.सी.टी. एक परिचय विषय द्वारा कार्यशाला का आरंभ हुआ। इस सत्र में उपस्थित प्रतिभागियों को आई.सी.टी के अर्थ, उसके विभिन्न रूप, उसकी उपयोगिता और खासकर उसके प्रभाव से परिचित कराया गया। उसके पश्चात हिंदी और आई.सी.टी : संभावनाएँ विषय पर श्रीमती पूर्णिमा वर्मन ने अपने विचार व्यक्त किए। प्रतिभागियों को हिंदी के माध्यम से आई.सी.टी क्षेत्र से जुड़ने की विभिन्न संभावनाओं और तरीकों का पता चल पाया। इसके पश्चात यूनिकोड : इतिहास और प्रयोग विषय पर श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच ने प्रस्तुतीकरण किया। प्रतिभागियों को यह ज्ञात हुआ कि हिंदी अक्षर कैसे कंप्यूटर स्क्रीन पर दिख सकते हैं और इनके निर्माण के पीछे किस तरह के कार्य होते हैं। इस दिन के अंतिम सत्र (अभ्यास सत्र) तक आते-आते प्रतिभागियों ने हिंदी में टंकन विधियाँ, सोफ्ट्वेयर और उनके अधिष्ठापन विधियों को समझने के पश्चात उनको अमल में लाना सीखा।

बुधवार २५ अप्रैल को श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच ने आपके पी.सी. पर हिंदी (प्रोग्राम, सॉफ्टवेयर, फ्रीवेयर, फॉन्ट) विषय को प्रस्तुत करते हुए हिंदी-आई.सी.टी को प्रतिभागियों के और करीब ला दिया। फिर प्रतिभागियों को जिस विषय की प्रतीक्षा थी, वह विषय (हिंदी ई-पत्रिका का निर्माण और प्रबंधन) श्रीमती पूर्णिमा वर्मन ने प्रस्तुत किया। इसमें प्रतिभागियों ने उन सभी पहलुओं और कदमों को सीखा जिनको ध्यान में रखते हुए हम अच्छी ई-पत्रिका या ब्लॉग बना सकते हैं। जलपान के पश्चात सभी प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी टोली के साथ मिलकर अपना ब्लॉग बनाना शुरू किया। इस कार्य में विशेषज्ञों ने भी उनका हौसला बढ़ाया और पग-पग पर उनका साथ दिया। देखते-देखते हिंदी के ब्लॉग बनकर तैयार होने लगे।

२६ अप्रैल को श्री ललित कुमार ने वेब और सोशल नेटवर्किंग साइट पर हिंदी (उपलब्ध साइट, हिंदी में सहभागिता) विषय पर बात की। फ़ेसबुक, ब्लॉगर, ट्वीटर आदि सोशल नेटवर्किंग साईटों पर हिंदी की मौजूदगी को दर्शाते हुए ललित जी ने बताया कि किस प्रकार हिंदी में इनका प्रयोग हो सकता हैं। इसके आर्थिक पक्ष को भी परखा गया। श्री बालेन्दु ने हिंदी वेबसाइट का निर्माण और प्रबंध पर बात की जिससे प्रतिभागियों को प्रेरणा मिली और साथ ही साथ हिंदी वेब साइट बनाने के तरीकों का पता चल पाया। उन्होंने प्रतिभागियों के इस भ्रम को मिटाया कि वेब डिज़ाइनिंग एक कठिन कार्य है।

२७ अप्रैल को श्री ललित कुमार ने और विस्तार के साथ हिंदी वेबसाइट के निर्माण पर प्रकाश डाला। कई प्रतिभागियों को अपने प्रशनों के उत्तर भी मिले। फिर श्रीमती पूर्णिमा वर्मन ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर हिंदी पृष्ठ का निर्माण और प्रबंधन (दिशानिर्देश, नीतियाँ, नियम, संभावनाएँ) विषय ƒपर अपने विचार व्यक्त किए। वे सभी मुख्य बातें बताई गईं जो योजना से पहले और योजना पूरी हो जाने के पश्चात ध्यान देने योग्य होती हैं। कार्यशाला की सफल समाप्ति पर विश्व हिंदी सचिवालय ने अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगिंग तथा ई-पत्रकारिता प्रतियोगिता की घोषणा की। जिसे आने वाले दिनों में आयोजित किया जाएगा इसमें अच्छे ब्लॉग का निर्माण व प्रबंधन तथा ई-पत्रिका का निर्माण करने वाले को पुरस्कृत भी किया जाएगा।


सांस्कृतिक संध्या

२५ अप्रैल की शाम को सायंकाल अल्पाहार के अवसर पर अतिथियों का मनोरंजन करने के लिए मारिशस. ब्राडकास्टिंग कारपोरेशन की ओर से बेस्ट एफ़. एम की टीम उपस्थित थी। अल्पाहार के पश्चात कवि सम्मेलन भी चला जिसमें तीनों विशेषज्ञों ने अपनी कविताओं से सभागार को रंगों से भर दिया। प्रतिभागी के रूप में आए श्री राजेश कुमार श्रीवास्तव तथा डॉ. हेमराज सुन्दर के अतिरिक्त विनय गुदारी और गुलशन सुखलाल ने भी अपनी कविताएँ सुनाईं। इन्दिरा गांधी भारतीय सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित इस अनौपचारिक शाम में महामहिम श्री टी. पी. सीताराम, भारतीय उच्चायुक्त, सुश्री अनुपमा चमन, कला एवं संस्कृति मंत्रालय की वरिष्ठ संस्कृति अधिकारी, एम. बी. सी की ओर से श्री भूमित्रा शर्मा तथा श्री केसन बधु, तीनों विशेषज्ञ श्रीमती पूर्णिमा वर्मन, श्री बालेन्दु दाधीच, श्री ललित कुमार तथा संगोष्ठी-कार्यशाला के प्रतिभागी भी उपस्थित थे।

समापन समारोह

२७ अप्रैल को ही अपराह्न ३ बजे समापन समारोह का आयोजन किया गया। अपने स्वागत भाषण में श्रीमती पूनम जुनेजा ने सभी का स्वागत करते हुए विशेषज्ञों की विद्वता तथा प्रतिभागियों के श्रम की प्रशंसा की और श्री मीमांसक ने कार्यशाला की सफलता का हर्ष अभिव्यक्त किया। तत्पश्चात कार्यशाला में प्राप्त अनुभवों के अनुरूप प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाओं पर एक वीडियो प्रस्तुति की गई। इस क्लिप में प्रतिभागियों ने अपना अनुभव बाँटते हुए इस कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान को अपनी भावी योजनाओं में प्रयोग करने का हर्ष भी अभिव्यक्त किया। वीडियो प्रस्तुति के बाद तीनों विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी टोली के कार्यों की सराहना करते हुए उसपर एक पावर पोंइट प्रतुति की। तीनो विशेषज्ञों के निर्देशन में प्रतिभागियों की अलग-अलग १२ टोलियाँ बनी थीं और हरेक टोली ने एक हिंदी ब्लॉग का निर्माण किया। श्री बालेन्दु दाधीच, श्रीमती पूर्णिमा वर्मन तथा श्री ललित कुमार उनकी इसी महनत पर आधारित पावर पोंइट प्रतुति की। उच्च शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, माननीय श्री राजेश्वर जीता ने कहा ``विश्व हिंदी सचिवालय ने इस सप्ताह जो काम किया, उससे हमारे हिंदी स्नातकों को वो अतिरिक्त तकनीक मिलते हैं जिनके ज़रिए वो सिर्फ अच्छे हिंदी भाषी ही नहीं बल्कि भविष्य में अच्छे प्रफ़ेशनल बन पाएँगे।'' प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए माननीय मंत्री ने कहा ``आपके कामों को देखकर मैं यह कह सकता हूँ कि आज आपने जो कर दिखाया है वो इतिहास रचने के बराबर है।'' माननीय मंत्री जी के उद्गार के बाद सभी प्रतिभागियों को उनके साथ फोटो लेने का अवसर भी प्राप्त हुआ। धन्यवाद ज्ञापन के साथ ही संगोष्ठी-कार्यशाला का औपचारिक समापन हुआ।


संगोष्ठी-कार्यशाला में हिंदी विद्वानों, हिंदी साहित्यकारों, प्राथमिक व माध्यमिक हिंदी शिक्षकों, हिंदी प्राध्यापकों, हिंदी विद्यार्थियों, हिंदी से जुड़ी संस्थाओं, धार्मिक संस्थाओं आदि साठ लोगों की प्रतिभागिता रही। इनमें मॉरीशस के प्रतिभागियों के अतिरिक्त भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय से आए दो अधिकारी तथा मुम्बई भारत के एकोल मोंज्याल की हिंदी अध्यापिका भी शामिल थीं। संगोष्ठी-कार्यशाला की सफ़लता में शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्रालय, भारतीय उच्चायोग, कला एवं संस्कृति मंत्रालय, उच्च शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, राजीव गांधी साईंस सेंटर तथा इंदिरा गांधी भारतीय सांस्कृतिक केंद्र का भी सहयोग रहा। संगोष्ठी-कार्यशाला का पूरा संचालन सचिवालय के उपमहासचिव तथा कार्यशाला संयोजक, श्री गंगाधरसिंह सुखलाल ने किया।

विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस की रिपोर्ट

सोमवार, 30 मई 2011

महादेवी वर्मा जयंती, अनुदान वितरण एवं लघकथा कार्यशाला

पारामारिबो स्थित भारत के राजदूतावास और सूरीनाम हिन्दी परिषद ने प्रख्यात हिन्दी कवियित्री, एक स्वतंत्रता सेनानी, महिला कार्यकर्ता और शिक्षाविद महादेवी वर्मा जयंती पर एक विशेष शाम का आयोजन किया. कार्यक्रम का आरंभ वानिका क्षेत्र की परमानन्द हिन्दी पाठशाला के छात्रों द्वारा गाए गए भजनों से हुआ। स्थानीय हिन्दी शिक्षक श्रीमती कृष्णा भिखारी ने उत्साहपूर्वक महादेवी के जीवन पर और श्री धीरज कंधई ने उनकी साहित्यिक कृतियों पर वक्तव्य दिया श्रीमती सुषमा खेदू, श्रीमती कारमेन सोमाइ और श्रीमती भजन धनवंती ने महादेवी की कविताओं का पाठ किया जिसे प्रबुद्ध श्रोताओं ने खूब सराहा।

माननीय राजदूत श्री कंवलजीत सिंह सोढ़ी जी ने दर्शकों को संबोधित करते हुए महादेवी वर्मा के साहित्यिक गुणों की सराहना की। इस अवसर पर सूरीनाम हिन्दी परिषद के पुस्तकालय के लिए 30 पुस्तकें भी प्रदान की गयी और 15 हिन्दी शिक्षकों को 1500 अमरीकी डालर और 15 हिन्दी स्कूलों और संगठनों को 500 अमरीकी डालर और एक प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित किया, उन्होने कहा कि यह अनुदान सूरीनाम के हिन्दी शिक्षकों की नि:स्वार्थ सेवाओं को सम्मानित करने का प्रयास है. सूरीनाम हिन्दी परिषद के अध्यक्ष श्री भोलानाथ नारायण ने महादेवी जी के कथन कि "हर भाषा का सम्मान करना चाहिए लेकिन किसी अन्य भाषा को मातृभाषा के समान दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए। सूरीनाम हिन्दी परिषद के पूर्व-अध्यक्ष श्री जानकी प्रसाद सिंह ने तीसरे विश्व हिंदी सम्मेलन में महादेवी वर्मा जी के साथ हुई भेंट की अपनी यादें साझा की।

श्रीमती भावना सक्सेना, अताशे (हिंदी एवं संस्कृति) ने सभा का संचालन करते हुए उल्लेख किया कि इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य हिन्दी के प्रतिष्ठित कवियों और लेखकों को जानने और उनके साहित्य को पहचानने के अतिरिक्त लोगों को उनकी अपनी रचनात्मकता का एहसास दिलाना भी है।
भारत के राजदूतावास और सूरीनाम हिन्दी परिषद ने 14 मार्च 2011 को कथा-कहानी शृंखला में दूसरी कार्यशाला का आयोजन किया जिसमें लगभग पचास प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस कार्यशाला में स्थानीय हिन्दी अध्यापकों और छात्रों ने काफी उत्साह के साथ भाग लिया। हिन्दी और सांस्कृतिक अधिकारी श्रीमती सक्सेना कहानी लेखन की बुनियादी विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एक श्रेष्ठ लघुकथा में कुछ आवश्यक तत्वों की आवश्यकता होती है जैसे वह आकार में बड़ी न हो, कम पात्र हों, समय के एक ही कालखंड को समाहित किए हो, अनावश्यक डिटेल्स न हों, शीर्षक रचना को पुष्ट और पुख्ता करता हो, उसकी गति अपने प्रारंभ-बिन्दु से अन्तिम बिन्दु(चरम बिन्दु) की ओर हो, विषय को लेकर किसी प्रकार का उलझाव न हों, और अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच कर अपनी मारक और असरदार शक्ति का प्रदर्शन करे।उपस्थित प्रतिभागियों को चार चित्रों को दिए गए थे और तीस मिनट के जो कुछ बहुत ही उपयोगी परिणाम सामने आए थे।

दिनकर की याद में एक विशेष शाम


पारामारिबो स्थित भारत के राजदूतावास ने 27 अप्रैल 2011 को एक विशेष शाम "दिनकर की याद में " का आयोजन किया जिसमें स्वतंत्रता पूर्व के विद्रोही कवि और स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रकवि के नाम से पहचाने जाने वाले श्री रामधारी सिंह दिनकर के जीवन व साहित्य में उनके स्थान का उल्लेख किया गया। रामधारी सिंह दिनकर की ही कविताओं और काव्यांशों में पिरोते हुए संचालिका श्रीमती भावना सक्सेना ने श्रोताओं को दिनकर के काव्य के विभिन्न पक्षों से परिचित कराया. भारत के राजदूत श्री कंवलजीत सिंह सोढ़ी ने कहा कि दिनकर की कविताओं का प्रमुख उद्देश्य सामान्य जन में नवीन चेतना उत्पन्न करना रहा है, उनकी कविताएँ ऐसी हैं जो सोते हुए व्यक्ति में भी ऊर्जा संचारित कर देती हैं।

स्थानीय छात्रों ने अत्यंत उत्साह के साथ दिनकर के जीवन पर चर्चा की और उनकी कुछ कविताओं का वाचन किया। कुछ छात्रों ने स्थानीय प्रतिष्ठित कवियों श्री अमर सिंह रमण व बाबू चन्द्रमोहन रणजीत सिंह की कविताओं का भी वाचन किया।

इसके अतिरिक्त इस शाम चार छात्रों श्री गणेश अमित आजोध्या, श्री त्रिबेनी प्रसाद रामयाद, श्री धीरज कंधई, डॉ॰कार्मेन जगलाल को उनके राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा, भारत की राष्ट्रभाषा रत्न परीक्षा के प्रमाणपत्र दिये गए। ये प्रमाणपत्र वर्ष २००७ में उत्तीर्ण परीक्षा के लिए थे,वर्ष २००७ में सूरीनाम के पांच छात्रों ने राष्ट्रभाषा रत्न परीक्षा दी थी, उल्लेखनीय है कि यह पाँचों लोग अलग अलग कार्यक्षेत्र से हैं, सुश्री जगलाल एक चिकित्सक हैं तो श्री अजोध्या रसायनशास्त्र का अध्ययन कर रहे हैं और श्री रामयाद भूगोल के अध्यापक हैं, श्री धीरज कंधई भी अध्यापक हैं और हिंदी शिक्षण भी करते हैं। पांचवे छात्र श्री अंगद भवन कुछ समय से हौलैंड में कार्य कर रहे हैं। सभी सीमाओं का सामना करते हुए यह उपलब्धि प्राप्त करना निस्संदेह रूप से सराहनीय है।

इस अवसर पर स्थानीय गण्यमान्य व्यक्तियों के साथ साथ, शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि श्री योहन रूजर और सूरीनाम हिंदी परिषद के अध्यक्ष श्री भोलानाथ नाराइन भी उपस्थित थे। श्री भोलानाथ नाराइन ने राजदूतावास द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रमों की सराहना की और दूतावास से प्राप्त सहयोग के लिए भूरी भूरी धन्यवाद प्रकट किया ।

रविवार, 26 सितंबर 2010

मारीशस में हिंदी समारोह संपन्न


मारीशस के राष्ट्रपति श्री अनिरूद्ध जगन्नाथ ने छत्तीसगढ़, भारत की साहित्यिक संस्था सृजन सम्मान द्वारा विश्वभर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार, साहित्यकारों का सम्मान एवं हिन्दी की सेवा की प्रशंसा करते हुए कहा कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषाओं में सम्मिलित करने का प्रयास करना अच्छी बात है। यह विचार उन्होंने भारत के छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक संस्था सृजन सम्मान द्वारा आयोजित साहित्यिक भ्रमण के अंतर्गत संस्था के राष्ट्रीय महासचिव एवं यात्रा संयोजक द्वय जयप्रकाश मानस एवं एच.एस.ठाकुर के नेतृत्व में मारीशस पहुँचे यात्रा समूह के सदस्यों के साथ आयोजित एक बैठक में व्यक्त किए। उन्होंने संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मारीशस की अर्थव्यवस्था एवं उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी सदस्यों से बातचीत की। इस अवसर पर मारीशस की प्रथम महिला श्रीमती सरोजनी जगन्नाथ विशेष रूप से उपस्थित थी।

तृतीय अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन बाली (इंडोनेशिया) में
बैठक के आरंभ में जयप्रकाश मानस ने पुस्तकें भेंटकर राष्ट्रपति का स्वागत किया। अपने स्वागत उद्बोधन में मानस ने व्यस्तता के बावजूद भारतीय साहित्यकारों के दल को समय देने के लिए राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्था के माध्यम से मारीशस में द्वितीय हिन्दी सम्मेलन का आयोजन किया गया। गतवर्ष पहला अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन थाईलैंड में किया गया था । हिन्दी दिवस के अवसर पर मारीशस के सात वरिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान भी किया गया। उन्होंने राष्ट्रपति को अवगत कराया कि भविष्य में हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषाओं में सम्मिलित किए जाने का प्रयास जारी है और इस सिलसिले में अगले साल इंडोनेशिया (बाली) में तृतीय अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन करने का निर्णय लिया गया है।

राष्ट्रपति भवन में साहित्यकारों का दल
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का एक पत्र एवं बस्तर के कलाकारों द्वारा निर्मित धातु शिल्प भी राष्ट्रपति को सौंपा गया। इसके अलावा अनेक साहित्यकारों ने अपनी पुस्तकें तथा फ़िलाटेलिक सोसायटी ऑफ इंडिया की छत्तीसगढ़ इकाई की ओर से भारत के साहित्यकारों एवं अगले माह आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों पर केन्द्रित भारतीय डाक टिकटों के दो एलबम भेंट किए गए। तत्पश्चात राष्ट्रपति के साथ सदस्यों का एक फ़ोटो सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें प्रथम महिला एवं बड़ी संख्या में मारीशस के शिक्षाविद एवं साहित्यकार भी सम्मिलित थे। राष्ट्रपति भवन की ओर से सदस्यों के लिए स्वल्पाहार का आयोजन भी किया गया था। उल्लेखनीय है कि साहित्यिक संस्था सृजन सम्मान द्वारा संस्था के महासचिव जयप्रकाश मानस के नेतृत्व में विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर से १८ सितम्बर तक मारीशस का साहित्यिक, सांस्कृतिक पर्यटन अध्ययन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर के ६१ सदस्यों ने भाग लिया।

हिन्दी का संसार एवं संसार की हिन्दी विषय पर संगोष्ठी
भ्रमण के दौरान मारीशस सरकार द्वारा गठित सांस्कृतिक प्रतिष्ठान हिन्दी स्पीकिंग यूनियन द्वारा हिन्दी दिवस पर हिन्दी का संसार एवं संसार की हिन्दी विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि थे हिन्दी के वरिष्ठ उपन्यासकार अभिमन्यु अनत और अध्यक्षता की जयप्रकाश मानस ने । द्वितीय सत्र में कृतियों का विमोचन एवं मॉरीशस के साहित्यकारों का अंलकरण कार्यक्रम आयोजित था । इस सत्र के मुख्य अतिथि थे - मारीशस के संस्कृति एवं कला मंत्री श्री मुखेश्वर शोन्नी ।

मॉरीशस के ७ साहित्यकारों को सृजनश्री अंलकरण
इस अवसर पर सृजन-सम्मान द्वारा वहाँ के वरिष्ठ ७ साहित्यकारों को सृजन-श्री अंलकरण से अलंकृत किया गया । सम्मानित साहित्यकारों को शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मान किया गया। जिसमें उपन्यास के लिए मारीशस के श्री अभिमन्यु अनत, कहानी के लिए प्रकारेश धुरंधर, नाटक के लिए महेश राम जीयावन, कविता के लिए पूजा नंद नेमा, महिला विमर्श के लिए भानुमति नागदान, हिन्दी सेवा के लिए स्व.मुनेश्वर लाल चिन्तामणी के अलावा महात्मा गांधी संस्थान के वरिष्ठ व्याख्याता एवं कार्यक्रम के संयोजक विनय गोदारी को सृजन श्री सम्मान से विभूषित किया गया। संगोष्ठी में भारत से मारीशस पहुँचे अनेक साहित्यकारों की पुस्तकों, पत्रिकाओं एवं गीतों के कैसेटों का विमोचन भी किया गया। इसके अलावा सदस्यों ने महात्मा गांधी संस्थान का भ्रमण किया। संस्थान के विभागाध्यक्ष एवं अन्य प्राध्यापकों ने प्रतिष्ठान की गतिविधियों की जानकारी दी। साथ ही प्रतिष्ठान द्वारा संचालित हिन्दी प्रचार अभियान के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक का अवलोकन किया।

इस सांस्कृतिक अध्ययन दल में यात्रा संयोजक जयप्रकाश मानस एवं एच.एस.ठाकुर सहित छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के संचालक राजीव श्रीवास्तव, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, डॉ.महेन्द्र ठाकुर, दीपक पाचपोर, सुरेश तिवारी, चेतन भारती, संजीव ठाकुर, डॉ.निरुपमा शर्मा, डॉ.सीमा श्रीवास्तव, लतिका भावे, शकुन्तला तरार, अरूणा चौहान,अरविन्द मिश्रा, कुमेश कुमार जैन, नागेन्द्र दुबे, टामन सिंह सोनवानी, श्रीमती पदमनी सिंह, अभिषेक सोनवानी, ललित गणवीर, श्रीमती गणवीर, जी.एस.बाम्बरा, श्रीमती आर.बाम्बरा, प्रतापचंद पारख, सत्यपाल, श्रीकांत अग्रवाल, रमाकांत अग्रवाल, बिलासपुर के राजेश सोन्थलिया, रायगढ़ के सत्यदेव शर्मा, संजय तिवारी, उसत राम, भीखलाल पटेल, सुरेश पंडा, सुरेश छत्री, श्रीमती क्षत्री, अर्जुन दास, देवानी, एम.आर.ठाकुर, समुन्द सिंह, मिश्री लाल पाण्डे, राजेश तिवारी, सरायपाली के मीनकेतन दास, नागपुर महाराष्ट्र के भाषाविद डॉ.रामप्रकाश सक्सेना, हनुमन्त ठाकरे, नागेन्द्र अन्नाराव, रामदेव खुशहाल राव, बंडोपाद्ये यशवंत, नरेन्द्र दंडारे, उत्तराखण्ड नैनीताल के दिवाकर भट्ट, मध्यप्रदेश भोपाल के डी.पी.सक्सेना, मधु सक्सेना, प्रकाशचंद तापड़े, अरूणा तापड़े एवं सृजन-सम्मान के यात्रा-पार्टनर क्रियेटिव ट्रेव्हलर्स के प्रमुख विकास मल्होत्रा आदि सम्मिलित थे।

(मारीशस से लौटकर हीरामन सिंह ठाकुर)