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रविवार, 30 अक्टूबर 2011

‘बीसवाँ अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन’ अमृतसर में सम्पन्न

पंजाबी त्रैमासिक पत्रिका ‘मिन्नी’, ‘पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना’ व ‘पिंगलवाड़ा चैरिटेबल सोसायटी, अमृतसर’ के संयुक्त तत्त्वाधान में ‘बीसवाँ अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन’ ८ अक्तूबर, २०११ को पिंगलवाडा काम्प्लैक्स, अमृतसर(पंजाब) में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ.इंदरजीत कौर (अध्यक्षा, पिंगलवाड़ा सोसायटी), डॉ. सुखदेव सिंह खाहरा, डॉ. इकबाल कौर, डॉ. अनूपसिंह (उपाध्यक्ष, पंजाबी साहित्य अकादमी) व बलराम अग्रवाल (दिल्ली) ने की।

पत्रिका ‘मिन्नी’ के संपादक-मंडल के सदस्य श्याम सुन्दर अग्रवाल ने पंजाब, हरियाणा,हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश व दिल्ली से सम्मेलन में पधारे अतिथियों का स्वागत करते हुए इस सम्मेलन के उद्देश्य संबंधी जानकारी दी। कार्यक्रम के प्रारंभ में पंजाबी-आलोचक डॉ. दरिया ने अपना आलेख ‘इक्कीवीं सदी दे पहिले दहाके दी मिन्नी कहाणी, समाजिक ते सभ्याचारक संदर्भ’ शीर्षक से पढ़ा। उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक परिवर्तन पर प्रतिकर्म सबसे पहले लघुकथा में ही व्यक्त होता है। श्री भगीरथ परिहार ने अपने आलेख ‘मुठ्ठीभर आसमान के लिए: लघुकथा में स्त्री -विमर्श’ में लघुकथा-साहित्य में प्रस्तुत स्त्री की विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों का वर्णन किया। दोनों आलेखों पर डॉ. अनूप सिंह, सुभाष नीरव व डॉ. बलदेव सिंह खाहरा ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के अगले चरण की शुरुआत पत्रिका ‘मिन्नी’ के अंक-९३ के विमोचन से हुई। इसके साथ ही डा. श्याम सुन्दर दीप्ति व श्याम सुन्दर अग्रवाल द्वारा संपादित दो लघुकथा-संकलनों ‘विगत दशक की पंजाबी लघुकथाएँ’ (हिन्दी) व ‘दहाके दा सफ़र’ (पंजाबी) का विमोचन अध्यक्ष-मंडल की ओर से किया गया। इसी चरण में सुकेश साहनी व रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ द्वारा संपादित संकलन ‘मानव मूल्यों की लघुकथाएँ’ तथा बलराम अग्रवाल की ओर से संपादित पुस्तक ‘समकालीन लघुकथा और प्रेमचंद’ का विमोचन भी किया गया।

प्रथम-सत्र का आख़िरी चरण सम्मान समारोह का रहा। समारोह दौरान हिंदी के वरिष्ठ लेखक श्री सूर्यकांत नागर(इन्दौर) को ‘माता शरबती देवी समृति सम्मान’, हिंदी के सुपरिचित लेखक श्री सुकेश साहनी (बरेली) को ‘श्री बलदेव कौशिक स्मृति सम्मान’, पंजाबी के जाने-माने लघुकथाकार श्री हरभजन सिंह खेमकरनी (अमृतसर) को ‘लघुकथा डॉट कॉम सम्मान’, पंजाबी लघुकथा में आलोचना और मौलिक लेखन के लिए जाने वाले श्री निरंजन बोहा (बोहा, पंजाब) को ‘प्रिं. भगत सिंह सेखों समृति सम्मान’ तथा पंजाबी पत्रिका ‘अणु’ के संपादक श्री सुरिंदर कैले (लुधियाना) को ‘गुरमीत हेयर समृति सम्मान’ से नवाजा गया। पुस्तक विमोचन व सम्मान समारोह में श्रीमती अनवंत कौर, तलविंदर सिंह, अरतिंदर संधू, डॉ. शेर सिंह मरड़ी व हरिकृष्ण मायर ने अध्यक्ष-मंडल के साथ सहयोग किया। अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. इंदरजीत कौर ने समाज में लेखकों की सकारात्मक भूमिका तथा अच्छे साहित्य की आवश्यकता पर जोर दिया।

सम्मेलन का दूसरा सत्र ‘जुगनूआँ दे अंग-संग’ अमृतसर से लगभग दस किलोमीटर दूर पिंगलवाड़ा सोसायटी के मानांवाला कम्प्लैक्स में हुआ। देर शाम शुरू हुआ यह सत्र रात के बारह बजे तक चला। इस सत्र में श्री सुरेश शर्मा व सूर्यकांत नागर (इन्दौर), सुभाष नीरव व बलराम अग्रवाल (दिल्ली), ऊषा मेहता दीपा (चंबा), अशोक दर्द (डलहौजी), डॉ. शील कौशिक व डॉ. शक्तिराज कौशिक (सिरसा) व श्याम सुन्दर अग्रवाल (कोटकपूरा) ने हिन्दी में अपनी लघुकथाएँ पढ़ीं। हरप्रीत सिंह राणा व रघबीर सिंह महिमी (पटियाला), जगदीश राय कुलरीआँ व दर्शन सिंह बरेटा (बरेटा), बिक्रमजीत ‘नूर’ (गिद्दड़बाहा), निरंजन बोहा (बोहा), विवेक (कोट ईसे खाँ) रणजीत आज़ाद काँझला (धूरी), अमृत लाल मन्नन, हरभजन खेमकरणी व डॉ. श्याम सुन्दर ‘दीप्ति’(अमृतसर) ने पंजाबी में अपनी रचनाएँ पढ़ीं। पढ़ी गई रचनाओं पर अन्य के साथ भगीरथ परिहार (कोटा), सुकेश साहनी (बरेली), सुभाष नीरव(दिल्ली) व डॉ.सुखदेव सिंह सेखों (अमृतसर) ने विशेष रूप से अपने विचार व्यक्त किए।

-श्याम सुन्दर अग्रवाल

सोमवार, 26 सितंबर 2011

इंजीनियर जगदीप सिंह दाँगी विशिष्ट अकादमी सम्मान 2011 से सम्मानित

लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड में दर्ज युवा कम्प्यूटर इंजीनियर जगदीप सिंह दाँगी को इस वर्ष पंजाब कला साहित्य अकादमी (पंकस) जालंधर द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर प्रदान किए जाने वाले ‘विशिष्ट अकादमी सम्मान 2011’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिन्दी के विकास हेतु अद्वितीय योगदान के लिय प्रदान किया गया है। उक्त सम्मान श्री दाँगी को दिनाँक 11 सितम्बर 2011 को जालंधर (पंजाब) में आयोजित पंजाब कला साहित्य अकादमी (पंकस) के राष्ट्रीय समारोह में लायंस भवन में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व निकाय मंत्री मनोरंजन कालिया तथा विशिष्ट अतिथि हिमाचल प्रदेश के पूर्व बागवानी मंत्री ठाकुर सत्य प्रकाश जी ने प्रदान किया। इस अवसर पर देश के विभिन्न प्रांतों से आये हुए कई हिन्दी कवि व साहित्यकार उपस्थित थे।

मध्य-प्रदेश के गंजबासौदा में जन्मे जगदीप सिंह दाँगी ने कम्प्यूटर के क्षेत्र में हिन्दी के विकास में उल्लेखनीय कार्य किया है। यह सम्मान उन्हें उनके प्रथम हिन्दी सॉफ़्ट्वेयर आई-ब्राउजर++(हिन्दी एक्सप्लोरर), प्रखर फ़ॉन्ट परिवर्तक, यूनिदेव, शब्द-अनुवादक, शब्द-ज्ञान आदि सॉफ़्ट्वेयर के विकास के फलस्वरूप प्रदान किया है। इन्हें पूर्व में भी अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित व पुरस्कृत किया गया है। वर्ष 2010 के जेसीआई राष्ट्रीय पुरस्कार "आउटस्टैन्डिंग यंग पर्सन ऑफ़ इंडिया -2010" के अतिरिक्त कंप्यूटर के क्षेत्र में केबिन केयर एविलिटी फ़ाउंडेशन ने जगदीप सिंह दाँगी को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार और एक लाख रूपये की राशि के साथ-साथ वर्ष 2008 का मास्टरी अवार्ड प्रदान किया। वे वर्तमान में अटल बिहारी वाजपेयी - भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवम् प्रबंधन संस्थान ग्वालियर में वैज्ञानिक/इंजीनियर के पद पर रह कर हिन्दी सॉफ़्ट्वेयर के क्षेत्र में लगे हुए हैं।

सोमवार, 27 दिसंबर 2010

सुशील 'हसरत` नरेलवी के काव्य संग्रह ''कुवार की धूप`` का लोकार्पण व कवि सम्मेलन


चण्डीगढ़ दिनांक : २१/११/२०१०, भारतीय साहित्य परिषद, मोहाली के सौजन्य से एवं 'सर्वेंटस ऑफ पीपल्स सोसाइटी`, चण्डीगढ़ के तत्वाधान में एक बहुभाषीय कवि सम्मेलन का आयोजन व कवि सुशील 'हसरत` नरेलवी के काव्य संग्रह ''कुवार की धूप`` का विमोचन समारोह लाजपत राय भवन, सैक्टर १५, में सम्पन्न हुआ। अमर शहीद लाला लाजपत राय जी की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार वीरेन्द्र मेंहदीरत्ता, अध्यक्ष प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ० रमेश कुंतल मेघ तथा मंच संचालक सुप्रसिद्ध शायर जय गोपाल 'अश्क` अमृतसरी रहे।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में अमर शहीद लाला लाजपत राय जी को पुष्पांजलि अर्पित की गई, श्री औंकार चन्द जी ने देश की आज़ादी में उनके योगदान का स्मरण कराया, सुशील 'हसरत` नरेलवी के काव्य संग्रह ''कुवार की धूप`` का लोकार्पण किया गया और फिर सुशील 'हसरत` नरेलवी ने अपने काव्य संग्रह से कविताएँ पढ़कर सुनाईं, जिन्हें भरपूर सराहना मिली।

काव्य संग्रह पर डॉ० प्रदीप शर्मा 'स्नेही`, अम्बाला, तथा डॉ सुभाष रस्तोगी, चण्डीगढ़ ने ने अपने पर्चे पढ़े। अध्यक्षीय टिप्पणी करते हुए सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ० रमेश कुंतल मेघ ने कहा कि ''सुशील 'हसरत` नरेलवी के काव्य संग्रह 'कुवार की धूप` में ग्रामीण आंचलिकता शामिल है जो कि उनकी कविता को आम चलन से हटाकर एक ऐसा आयाम देती है जो डॉ० भारतेन्दु सरीखे कवियों की रचनाओं में रचता-बसता था। इस संग्रह की कविताओं ने गाँव, माँ, रिश्तों, सामाजिक विद्रूपता एवं अन्य विषयों को गहराई से छुआ है।

समारोह के दूसरे भाग में अमर शहीद लाला लाजपत राय जी की याद में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें सुप्रसिद्ध शायर पूर्ण 'एहसान` पठानकोट से, ग़़जलकार जय गोपाल 'अश्क` अमृतसरी, कवयित्री सुशील बंसल 'शील`, कवयित्री, उर्मिला कौशिक 'सखी`, पवन 'मुंतज़िर`, कवयित्री शशि कौशल, ग़़जलकार चमन लाल 'चमन`, ग़़जलकार अमरजीत 'अमर`, ग़़जलकार एस०एल० धवन 'कमल`, कवि दीपक खेतरपाल, कवि मदन शर्मा 'राकेश`, राजेश 'पंकज`, कवि जोगिन्द्र सिंह, ग़जलकार एस० एल० कौशल, आर० के० भगत, कवि पवन बतरा, सन्नी चन्देल, राजन 'गऱीब`, महेंद्र, विजय कपूर, सुनील बरनालवी व अन्य कवियों ने भाग लिया।

राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय संयोजक जगदीश मितल, डॉ० राधेश्याम शर्मा, पूर्व निदेशक, हरियाणा साहित्य अकादमी, वरिष्ठ कथाकार डा० इन्दु बाली, कथाकार डॉ० कन्नौजिया, एन० एस० रत्न, समाज सेवी सुरेन्द्र शर्मा, पन्नु परवाज़, डा० अशोक कुमार, सी० आर० मुदगिल, डॉ० गार्गी, डॉ० डी० एस० गुप्त, उपन्यासकार ओ० पी० सौंधी, कथाकार जगमोहन कौर, कथाकार मदन शर्मा 'राकेश`, कथाकार मोती राम, संन्तोष गुप्ता, देव भारद्वाज, नरेन्द्र 'नाज़` डॉ० राजकुमार, प्रेम विज, डॉ० शशि प्रभा, अनन्त शर्मा 'अनन्त`, नरेन्द्र आर्य आदि साहित्यकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अन्त में, आयोजक संस्था ने मंचासीन महानुभावों, पधारे हुए साहित्यकारों, साहित्य प्रेमियों व श्रोतागणों का आभार प्रकट किया।

रविवार, 28 नवंबर 2010

गुरमीत बेदी के व्यंग्य संग्रह का विमोचन


व्यंग्य लेखन एक चुनौतीपूर्ण कार्य है और युवा व्यंग्यकार गुरमीत बेदी ने सरकारी नौकरी की लक्ष्मण-रेखाओं, विवशताओं व सीमाओं के बावजूद अपने धारदार व्यंग्य लेखन से जिस तरह सामाजिक विद्रुपताओं व भ्रष्टाचार पर तीखे प्रहार करने का हौसला दिखाया है, वह अनुकरणीय है। यह उद्गार योग गुरू बाबा रामदेव ने आज यहाँ गुरमीत बेदी के व्यंग्य संग्रह ‘नाक का सवाल’ के कुछ अंश उदृत करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का आईना व धड़कन होता है और व्यंग्य लेखन साहित्य की एक ऐसी कठिन व महत्वपूर्ण विधा है जो विसंगतियों स टकरा कर समाज का पथ प्रदर्शन करती है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि गुरमीत बेदी के व्यंग्य लेख राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुए हैं और इन व्यंग्य लेखों में व्यंग्यकार ने भ्रष्ट तंत्र, सामाजिक बुराइयों और मूल्यों के हनन पर चुटीले और अर्थ पूर्ण अंदाज़ में तंज कसकर व्यवस्था को झकझोरने की हिम्मत दिखाई है। योग गुरू बाबा रामदेव ने आशा व्यक्त की कि गुरमीत बेदी भविष्य में भी किसी दबाव में आए बिना अपने सकारात्मक लेखन से व्यवस्थागत खामियों व भ्रष्टाचार पर चोट करके अपने लेखकीय धर्म का पालन करते रहेंगे। इस अवसर पर गुरमीत बेदी ने बाबा रामदेव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके इन आशीर्वचनों से उन्हें नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने योग गुरू को बताया कि उनका तीसरा व्यंग्य संग्रह ‘खबरदार जो व्यंग्य लिखा’ शीर्षक से दिल्ली के एक प्रतिष्ठित प्रकाशन से शीघ्र ही प्रकाशित होकर आ रहा है और इस व्यंग्य संग्रह में उन्होंने देश के राष्ट्रीय समाचार पत्रों के संपादकीय पृष्टों पर छपे अपने व्यंग्य लेखकों को संकलित किया है।

उल्लेखनीय है कि ऊना में जिला लोक संपर्क अधिकारी के पद पर कार्यरत गुरमीत बेदी ने दो व्यंग्य संग्रहों सहित साहित्य की विभिन्न विधाओं में आधा दर्जन पुस्तकें व तीन उपन्यास लिखे हैं और उन्हें हिमाचल साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित देश-विदेश के कई साहित्यिक पुरस्कार मिले हैं। गुरमीत बेदी के व्यंग्य संग्रह ‘नाक का सवाल’ को गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों की लाईब्ररियों के लिए भी स्वीकृत किया गया है और इसी व्यंग्य संग्रह पर कनाडा की ‘विरसा’ संस्था भी उन्हें पुरस्कृत करने का ऐलान कर चुकी है। गुरमीत बेदी ने बाबा रामदेव को उनके ऊना प्रवास के दौरान ‘नाक का सवाल’ की प्रति भेंट की थी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी व गणमान्य लोग उपस्थित थे।