रविवार, 25 जनवरी 2009

राष्ट्र-किंकर का वार्षिकोत्सव संपन्न


नई दिल्ली, मकर संक्रांति के अवसर पर साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था राष्ट्र-किंकर(पंजी) का पाँचवा वार्षिकोत्सव कमल मॉडल स्कूल, मोहन गार्डन में आयोजित किया गया। देश के विभिन्न भागों से आए तथा दिल्ली भर से पधारें संस्कृति-प्रेमियों ने दीप यज्ञ, हास्य कवि प्रतियोगिता के पश्चात आयोजित 'संस्कृति-सम्मान-२००८' में अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाई। पिछले अनेक वर्षों से लगातार मकर-संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाले गरिमामय समारोह में राष्ट्र-किंकर संस्कृति, साहित्य, सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाली विभूतियों को संस्कृति-सम्मान प्रदान किए जाते हैं।

मुख्य अतिथि पदमविभूषण डॉ. सोनल मानसिंह एवं राष्ट्र-किंकर संपादक विनोद बब्बर ने देववाणी संस्कृत के प्रचार-प्रसार में लगे डॉ. कीर्तिकांत शर्मा, बेटी बचाओं आंदोलन के लिए धर्मेंद्र कुमार, ग़ज़ल सम्राट भगवान दास ऐजाज़, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ के डॉ. देवेन्द्रनाथ साह, अध्यात्म प्रेमी लेखिका निर्मल वालिया, सेवा भारती के कृष्णलाल वानप्रस्थी, मंझोले समाचार पत्रों के हितो के लिए संघर्षरत एवं भारतीय प्रैस परिषद के सदस्य रहें केशव चंद चंदोला, पत्रकार-साहित्यकार-समाजसेवी महेंद्र पाल काम्बोज तथा श्रीमती वंदना टंडन को नटराज की मूर्ति, शाल तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर संस्कृति संवर्द्धन में उनकी सेवाओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट की।

इस अवसर पर शालीन हास्य को बढ़ावा देने के लिए लगातार दूसरे वर्ष आयोजित द्वितीय अखिल भारतीय हास्य कवि प्रतियोगिता का फाइनल दौर भी हुआ। प्रथम पुरस्कार अहमदाबाद के सम्पत लोहार, द्वितीय मंडला(म.प्र.) की डॉ. नीलम खरे, तृतीय डॉ. शमीम देवबंदी को प्रदान किया गया। इनके अतिरिक्त डॉ. शरदनारायण खरे, राम किशोर गौतम, बेदिल इंदौरी, आलोकेश्वर चबराल, कैलाश जोशी, सादिक देवबंदी, चाँद अंसारी, डॉ. कृष्णनारायण पाण्डे, बदरी जोशी को हास्यश्री की उपाधि से नवाज़ा गया। विजेताओं को डॉ. सोनल मानसिंह एवं राष्ट्र-किंकर के अध्यक्ष हरिकिशन चावला ने नकद राशि, नटराज की शानदार ट्राफी, प्रमाण-पत्र एवं सद्साहित्य भेंट किया गया।

इससे पूर्व डॉ. सोनल मानसिंह ने विनोद बब्बर के नवीनतम व्यंग्य-संग्रह 'ज्येष्ठ में बसंत' (नवशिला प्रकाशन) का विमोचन एवं राष्ट्र-किंकर की वेबसाइट www.rashtrakinkar.org का लोकार्पण भी किया। सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव ने ज्येष्ठ में बसंत पर चर्चा करते हुए कुछ पंक्तियों को उद्धृत किया।

कादम्बरी का अखिल भारतीय साहित्यकार-पत्रकार सम्मान समारोह संपन्न

जबलपुर। विगत दिनों यहॉं नगर की प्रसिद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था 'कादम्बरी' द्वारा पूर्व कुलपति श्री जे. पी. शुक्ल की अध्यक्षता में स्व. श्री रामेन्द्र तिवारी की स्मृति में आयोजित एक समारोह में देश भर से चुने गए विभिन्न विधाओं के साहित्यकारों को विभिन्न विद्वानों की स्मृति में स्थापित सम्मान प्रदान किए गए। इस अवसर पर कादम्बरी स्मारिका, के अलावा विष्णु पांडेय की जाबालिपुरम, केशव पाठक की काव्यकला, डॉ. गार्गीशरण मिश्र की टुडे एजूकेशन एवं रवीन्द्र बहादुर सिन्हा की रेलनामा सहित लगभग आठ कृतियों का विमोचन किया गया। सम्मान समारोह के दौरान दिल्ली की साहित्यकार डॉ. सुधा शर्मा को वनराज का न्याय (एकांकी नाटक) एवं व्यंग्यकार व कार्टूनिस्ट श्री किशोर श्रीवास्तव को उनकी व्यंग्य पुस्तक आप बीती जग बीती सहित लगभग तीस साहित्यकारों को विभिन्न सम्मान प्रदान किए गए।

सम्मान हेतु चयनित अन्य साहित्यकारों के नाम नीचे दिए अनुसार हैं, सर्वश्री डॉ. परशुराम विरही (शिवपुरी), श्री राम किशोर मेहता (कटनी), दिवाकर वर्मा (भोपाल), गोविन्द अक्षय (हैदराबाद), अल्ताफ अहमद (चैन्नई), अजय तुलसी (नरसिंहपुर), डॉ. कौशल किशोर (छिंदवाड़ा), रसूल अहमद (जालौन), ज्ञानचंद मर्मज्ञ (बेंगलूर), रामनारायण वर्मा (करेली), चंद्रभान राही (भोपाल), सूर्यदीन यादव (खेड़ा), रमेश चंद्र खरे (दमोह), ओंकार लाल शर्मा (गुना), जय चक्रवर्ती (रायबरेली), रामेन्द्र (रायबरेली), डॉ. राज गोस्वामी (दतिया), अशोक गीते (खंडवा), डॉ. गायत्री तिवारी (जबलपुर), कैलाशनाथ तिवारी (अहमदाबाद), रमेश चंद्र पंत (अल्मोड़ा), अश्विनी कुमार (सिहोरा), मो. मुईनुद्दीन (जबलपुर), डॉ. शकुंतला तंवर (अजमेर), रमेश सोबती (फगवाड़ा), डॉ. श्री राम परिहार (खरगौन), डॉ. जगदीश चंद्र शर्मा (गिलंडू, राजस्थान) एवं राम किशोर गौतम (अहमदाबाद)।

उपर्युक्त सभी साहित्यकारों को सम्मान स्वरूप नकद राशि के अलावा शाल और आकर्षक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती वंदना से किया गया एवं सम्मान समारोह के समापन पर कवि सम्मेलन के अलावा नवरंग कला केंद्र के बच्चों द्वारा आकर्षक नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई। समारोह के संचालन में संस्था के पदाधिकारियों सर्वश्री डॉ. गार्गीशरण मिश्र, आचार्य भगवत दुबे, साधना उपाध्याय, सुनीता मिश्रा, दीपक तिवारी एवं शिल्पा ताम्हणे का सराहनीय योगदान रहा।

जबलपुर में 'खरी-खरी` प्रदर्शनी का आयोजन

जबलपुर. यहाँ ०६ दिसंबर, ०८ को नई दुनिया की उप संपादक शैली खत्री के संयोजन में दिल्ली के साहित्यकार एवं कार्टूनिस्ट श्री किशोर श्रीवास्तव की २४ वें वर्ष में चल रही सामाजिक/सांप्रदायिक विसंगतियों के खिलाफ़ आवाज़ उठाती एवं सामाजिक/सांप्रदायिक सद्भाव के प्रचार-प्रसार हेतु तैयार की गई पोस्टर प्रदर्शनी 'खरी-खरी' का एक दिवसीय आयोजन स्थानीय मानस भवन में किया गया। श्री किशोर पिछले दो दशकों से भी अधिक समय से अपने व्यंग्य चित्रों एवं छोटी-छोटी रचनाओं के माध्यम से इस प्रदर्शनी के द्वारा विभिन्न सामाजिक, सांप्रदायिक व अन्य कुरीतियों के खिलाफ़ लोगों को सचेत करने के साथ ही सामाजिक एवं सांप्रदायिक सद्भाव के प्रचार-प्रसार हेतु प्रयत्नशील रहे है। इस प्रदर्शनी का आयोजन देश के विभिन्न हिस्सों में वर्ष १९८५ से लगातार हो रहा है।

४ महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण और सम्मान समारोह


हिन्दुस्तानी एकेडेमी की और से हिन्दी, संस्कृत एवं उर्दू के कुछ लब्धप्रतिष्ठित विद्वानों का सम्मान समारोह २७ जनवरी, २००९ मंगलवार को एकेडेमी सभागार में अपरान्ह ४ बजे आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय मंत्री, उच्च शिक्षा, उत्तरप्रदेश डॉ. राकेश धर त्रिपाठी जी होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय न्यायमूर्ति श्री प्रेम शंकर गुप्त जी करेंगे। इस अवसर पर आपकी सादर उपस्थिति प्रार्थनीय है।

निवेदक
डॉ. एस. के. पाण्डेय
सचिव, हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद

हिंद-युग्म का वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न


रविवार २८ दिसंबर २००८ को दोपहर २ बजे से संध्या. ६.३० बजे तक धर्मवीर संगोष्ठी कक्ष, हिंदी भवन में हिंद-युग्म का वार्षिकोत्सव संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत निखिल आनंद गिरि के औपचारिक उद्बोधन से हुई और संचालन हिंद-युग्म के वरिष्ठ सदस्य और हरियाणा के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. श्याम सखा 'श्याम' ने किया।

अतिथियों का स्वागत हिंद-युग्म के सदस्यों ने पुष्पगुच्छ भेंट करके किया। हिंद-युग्म के संस्थापक शैलेश भारतवासी ने पॉवर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण की मदद से हिंद-युग्म की अब तक की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और देश-विदेश से हिंद-युग्म को मिले शुभकामना और बधाई संदेश दिखाए। इसके बाद काव्य-पाठ का सिलसिला आरंभ हुआ। हिंदी-युग्म के शुभचिंतक और दिल्ली पोएट्री संस्था के संस्थापक अमित दहिया बादशाह ने काव्य-पाठ का शुभारंभ किया। इसके बाद पावस नीर ने अपनी वह कविता सुनाई जिसने उन्हें यूनिकवि का सम्मान दिया गया था। शोभा महेंद्रू ने अपनी रचना में २६ नवंबर २००८ को मुंबई में हुई आतंक घटना की निंदा एक गीत के माध्यम से की और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। इसके बाद मंच पर आसीन पहले अतिथि प्रदीप शर्मा तथा डॉ. सुरेश कुमार सिंह का संभाषण हुआ। हिंद-युग्म के नियंत्रक शैलेश भारतवासी ने 'हिंदी टाइपिंग और ब्लॉग मेकिंग' पर पॉवर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण दिया और यह बताया कि कोई भी अधिकतम १० मिनट में हिंदी टाइपिंग सीख सकता है और ब्लॉग बना सकता है। इन्होंने अपना डेढ़ वर्षीय यूनिप्रशिक्षण का अनुभव भी दर्शकों के साथ बाँटा। १५० से भी अधिक संख्या में उपस्थित दर्शकों की भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि लोग ब्लॉगिंग सीखना चाहते हैं और अपनी भाषा में लिखना-पढ़ना चाहते हैं।

इक कार्यक्रम में हिंद-युग्म पाठक सम्मान २००८ से ४ पाठकों, आलोक सिंह 'साहिल', सुमित भारद्वाज, दीपाली मिश्रा और पूजा अनिल को प्रयास ट्रस्ट, रोहतक द्वारा स्मृति चिह्न पुस्तकों का बंडल और पुस्तकों का बंडल भेंट किए गए। हिंद-युग्म के बहुचर्चित युवा कवि गौरव सोलंकी का काव्यपाठ भी हुआ। इसके अतिरिक्त रूपम चोपड़ा, मनुज मेहता, निखिल आनंद गिरि, नाज़िम नक़वी के काव्य पाठ लोकप्रिय रहे।

कार्यक्रम में आगे अपने संभाषण में हिंद-युग्म के अगले अतिथि अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गणितज्ञ प्रो. भूदेव शर्मा ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही इंटरनेट को बहुत महत्व दिया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और देश के वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र यादव ने स्वीकार किया कि हिंद-युग्म ने आज हिंदी की इंटरनेटीय उपस्थिति बताकर मेरे सामने एक नई दुनिया खोल दी है। इस कार्यक्रम से पहले उन्होंने ब्लॉगिंग के बारे में सुना तो था लेकिन यह दुनिया इतनी विशाल है, उन्हें इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था। इसके बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय सहायक महाप्रबंधक श्रीधर मिश्र ने अपने विचार रखे। अंत में हिंद-युग्म की सदस्या नीलम मिश्रा ने देश-विदेश से किसी भी माध्यम से हिंद-युग्म से जुड़े हिंदी-प्रेमियों का धन्यवाद किया।

इस कार्यक्रम में हरिभूमि अखबार के दिल्ली प्रमुख अरविंद सिंह, एम.सी.डी. के अधिकारी सुरेश यादव, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के हिंदी अधिकारी ईश्वर चंद्र भारद्वाज, आकाशवाणी के मोबिन अहमद खाँ, भड़ास४मिडिया के रिपोर्टर अशोक कुमार, प्रसिद्ध ब्लॉगर मसिजीवी, चोखेरबाली ब्लॉग की मुख्य-मॉडरेटर सुजाता तेवतिया, ब्लॉगवाणी के मैथिली शरण गुप्त व सिरिल गुप्त, सफर-प्रमुख राकेश कुमार सिंह, छंदशास्त्री दरवेश भारती, ब्लॉगर राजीव तनेजा, नवभारत टाइम्स के यूसुफ किरयानी, पंडित प्रेम बरेलवी, लेडी श्रीराम कॉलेज में हिंदी की प्रोफ़ेसर डॉ. प्रीति प्रकाश प्रजापति महकते-पल फोरम प्रमुख सखी सिंह, आनंदम-प्रमुख जगदीश रावतानी, युवा कवि भूपेंद्र कुमार, साक्षात भसीन, नमिता राकेश, अमर-उजाला में सह-संपादक रामकृष्ण डोगरे, पंजाब केसरी में सह-संपादक सुनील डोगरा ज़ालिम, पत्रकार उमाशंकर शुक्ल, कार्टूनिस्ट मनु-बेतख्खल्लुस, वर्तमान यूनिकवि दीपक मिश्रा ने भी हिंद-युग्म परिवार को अपना आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम में आगंतुकों के स्वागत के लिए हिंद-युग्म की ओर से अभिषेक पाटनी, भूपेंद्र राघव, रविंदर टमकोरिया, नसीम अहमद, दीप जगदीप, प्रेमचंद सहजवाला इत्यादि उपस्थित थे।

२६ जनवरी २००९

राष्ट्रकवि दिनकर की जन्म शताब्दी पर कानपुर में संगोष्ठी का आयोजन


राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' के जन्म शताब्दी वर्ष पर मेधाश्रम संस्था के तत्वाधान में ''राष्ट्रकवि दिनकर की रचनाधर्मिता के विविध आयाम'' पर २६ दिसम्बर २००८ को कानपुर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित करते हुए उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बद्री नारायण तिवारी ने कहा कि दिनकर जी की कविताएँ सुनने और पढ़ने- दोनों स्तरों पर प्रभावित करती हैं। वे स्वतंत्रता पूर्व विद्रोही कवि तो स्वतंत्रता पश्चात राष्ट्रकवि रूप में प्रतिष्ठित हुए। दिनकर जी की कविताओं में राष्ट्रवादी, क्रान्तिकारी, माक्र्सवादी, प्रगतिवादी और रोमांटिक सभी भावनाओं की अनुपम अभिव्यक्ति है। जहाँ ‘रेणुका‘ में साम्यवादी स्वर है, वहीं 'कुरुक्षेत्र' में उन्होंने चरित्र को ऊपर रखा। 'रश्मिरथी' में मार्क्सवादी प्रभाव से निकलकर दिनकर गांधीवादी मूल्यों के हिमायती बने तो 'नीलकुसुम' में रोमांटिक कल्पना के दर्शन हुए।

बतौर मुख्य अतिथि संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए भारतीय डाक सेवा के अधिकारी एवं साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि दिनकर जी हिन्दी के उत्तर छायावादी कवियों में पहले ऐसे कवि हैं जिनकी काव्यभाषा में सहजता व संप्रेषणीयता होने के कारण वे लोगों की जुबान पर खूब चढ़ीं। दिनकर जी की कविताओं में अगर राष्ट्र का स्वाभिमान था तो गरीब जनता का हाहाकार भी शामिल था। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में दिनकर जी की कविताओं के सम्बन्ध में श्री यादव ने कहा कि दिनकर जी की कविताएँ आज भी नव-औपनिवेशिक शक्तियों के विरोध में वैचारिक प्रतिरोध की व्यापक भावभूमि तैयार करती हैं। युवा कवयित्री एवं लेखिका श्रीमती आकांक्षा यादव ने संगोष्ठी को आगे बढ़ाते हुए कहा कि दिनकर जी का गद्य और पद्य पर समान रूप से अधिकार था। यही कारण है कि उनकी गद्य रचना 'संस्कृति के चार अध्याय' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ तो उनकी चर्चित पद्य कृति 'उर्वशी' हेतु भारतीय साहित्य का सर्वोच्च ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ। डॉ. जे. एस. चैहार ने राष्ट्रकवि दिनकर जी की रचनाओं में सहजता को व्याख्यायित करते हुए उन्हें क्रान्ति का उद्घोषक कवि कहा, जो बाद में गांधीवाद के दर्शन से प्रभावित हुए। मेधाश्रम संस्था के सचिव श्री अनुराग ने संगोष्ठी का समापन करते हुए कहा कि दिनकर जी को हिन्दी के तथाकथित आधुनिक आलोचकों की मार भी झेलनी पड़ी, पर पाठकों और हिन्दी के शुभेच्छुओं के बीच उन्हें बेहद सम्मान और गौरव प्राप्त है। इसी कारण उन्हें इतिहास बदलने वाला कवि भी कहा जाता है। इस अवसर पर अपनी क्रान्तिकारी कविताओं से लोकप्रियता हासिल करने वाले राष्ट्रकवि दिनकर के तैल चित्र का संसद के केन्द्रीय कक्ष में अनावरण होने पर प्रसन्नता जाहिर की गई।

कार्यक्रम का आरंभ मुख्य अतिथि श्री कृष्ण कुमार यादव व मुख्य वक्ता डॉ. बद्री नारायण तिवारी द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। संगोष्ठी का संचालन मेधाश्रम के सचिव श्री अनुराग ने और धन्यवाद ज्ञापन श्री विजय नारायण तिवारी 'मुकुल' ने किया। इस अवसर पर सत्यकाम पहारिया, डॉ. विवेक सिंह, अंजू जैन, एम. एस. यादव, डॉ. विद्याभास्कर बाजपेयी सहित तमाम साहित्यकार, पत्रकार व बुद्धिजीवी उपस्थित थे।

(विवरण- अनुराग)
सचिव- ‘‘मेधाश्रम‘‘ संस्था
१३/१५२ डी (५) परमट, कानपुर (उ.प्र.)

जय वर्मा सम्मानित


यू के की कवयित्री जय वर्मा के कविता संग्रह 'सहयात्री हैं हम' का २३ दिसंबर २००८ को मेरठ विश्वविद्यालय में विमोचन किया गया। इस संग्रह के लिए श्रीमती जय वर्मा को अक्षरम द्वारा आयोजित सातवे आंतर्राष्ट्रीय हिंदी उत्सव में डॉ. कर्णी सिंह द्वारा 'प्रवासी हिंदी सेवा सम्मान' से भी सम्मानित किया गया है। (विवरण- महिपाल)

इक्कीसवाँ अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन आयोजित


दिनांक-२३/११/ २००८, (रविवार) को 'बिहार राज्य माघ्यमिक शिक्षक संघ` के सभागार में अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच के तत्वावधान में आयोजित इक्कीसवाँ अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन का सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। इसका उद्घाटन सुप्रतिष्ठ साहित्यकार डॉ० सियाराम तिवारी, पूर्व विभागाघ्यक्ष, शान्तिनिकेतन, ने किया तथा अध्यक्षता संपादक एवं कथाकार कृष्णानन्द कृष्ण ने की।

सत्र के प्रारंभ डॉ० सियाराम तिवारी द्वारा वीणा-वादिनी के चित्र पर माल्यार्पण, सुश्री सरिता सिंह नेपाली के भजन गायन तथा श्री राजकुमार प्रेमी की भारत-वन्दना से हुआ। मंच के संयोजक प्रख्यात कथाकार डॉ० सतीशराज पुष्करणा ने देश के विभिन्न भागों से आये सुजनकर्मियों का स्वागत किया। लघुकथा के सर्वांगीण विकास में योगदान करने हेतु श्री नरेन्द्र प्रसाद नवीन (पटना) तथा डॉ० योगेन्द्रनाथ शुक्ल (इन्दौर) को उनके सद्य: प्रकाशित लघुकथा-संग्रह ''लघुकथाओं का पिटारा'' के लिए 'डॉ० परमेश्वर गोयल लघुकथा शिखर सम्मान तथा लघुकथा-समीक्षा के क्षेत्र में कार्य करने हेतु मंच के संयोजक प्रख्यात कथाकार डॉ० सतीशराज पुष्करणा को ''नागेन्द्र प्रसाद सिंह लघुकथा शोध-समीक्षा शिखर सम्मान'' एवं डॉ० पुष्पलता कष्यप (जोधपुर) को ''मंच-सम्मान'' से सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही साहित्य की सेवा करने हेतु अखिल भारतीय हिन्दी प्रसार प्रतिष्ठान की ओर से जनवादी गीतकार नचिकेता (पटना) को उनकी सतत गीत-साधना के लिए ''गीत-रत्न'' तथा डॉ० परमेश्वर गोयल को उनके पचहत्तरवें जन्म दिन के अवसर पर सम्मानित किया गया। अन्य साहित्यिक सस्थाओं ''पीयूष साहित्य परिषद्'' एवं ''संभावना'' की ओर से डॉ० देवेन्द्र नाथ साह भागलपुर, डॉ० अमरनाथ चौध्री 'अब्ज`, बगोदर, श्री रा० प्र० अटल, जबलपुर, सुश्री सरिता सिंह नेपाली,पटना, श्रीमती स्वाति गोदर, बेगूसराय, श्री अरुणेन्द्र भारती, मुंगेर, डॉ० सिद्धेश्वर कश्यप, मधेपुरा, डॉ० मधुबाला वर्मा,पटना तथा नरेश पाण्डेय 'चकोर`,पटना को सम्मानित किया गया। इसके पश्चात् कई महत्वपूर्ण पुस्तकों एवं पत्रिकाओं के विशेषांकों का लोकार्पण कार्य सम्पन्न किया गया जिनमें प्रमुख थे ''जलेंगे दीप नये`` हायकू संग्रह, सं०-डॉ० सतीशराज पुष्करणा, पटना,,''टूटे हुए चेहरेै`` डॉ० देवेन्द्र नाथ शाह, लघुकथा-संग्रह, भागलपुर, ''विकलांग`` ;डॉ० अमरनाथ चौध्री 'अब्ज` ,लघुकथा-संग्रह ,झारखंड, ''आज का समाजवाद`` कृत नारायण प्यारा, पूर्णिया ''सागर के तिनके``अंकुश्री,राँची,झारखंड, ''असफल दाम्पत्य की लघुकथाएँ` `डॉ० केदार नाथ, मुजफफरपुर, ''मानवता के (डॉ० योगेन्द्र नाथशुक्ल को सम्मानित करते हुए डॉ सियाराम तिवारी) हत्यारे`` गणेश प्रसाद महतो, भागलपुर''युग-बोध``;सं०-डॉ० स्वर्ण किरण एवं डॉ. साधना कुमारी, नालंदा,''श्रेष्ठ अंगिका लघुकथाएँ'', डॉ. अरुणेन्द्र भारती, मुंगेर तथा ''सुभद्रा हरण'', केशव प्रसाद वर्मा, गीति नाटिका के अलावा 'समय सुरभि अनंत', सं.- नरेन्द्र कुमार सिंह, 'भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका', सं.- प्रो. ब्रजकिशोर, तथा 'अंग माधुरी', सं.-नरेश पाण्डेय चकोर, 'अलका-मागधी', संपादक-अभिमन्यु प्रसाद मौर्य के लघुकथा विशेषांकों का लोकार्पण किया गया। महासचिव नरेन्द्र प्रसाद 'नवीन' ने अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसके साथ ही प्रथम सत्र समाप्त हुआ।
दूसरे सत्र में ''लघुकथा का सामाजिक सरोकार और समस्याएँ'' पर केन्द्रित डॉ. उपेन्द्र प्रसाद राय तथा ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी ने ''लघुकथा का शैक्षिक महत्व'' आलेखों का पाठ किया। विचार विमर्श में डॉ.अनिता राकेश, छपरा, डॉ.अर्चना वर्मा, श्रीमती कुजूर, डॉ स्वर्ण किरण, तथा नचिकेता ने भाग लिया। सत्र का सफल संचालन डॉ. सतीशराज पुष्करणा ने तथा अध्यक्षता डॉ. जितेन्द्र सहाय, नचिकेता, एवं डॉ. रामशोभित प्रसाद सिंह ने किया।

तीसरे सत्र की शुरुआत लघुकथाओं के पाठ से प्रारंभ हुआ जिसका संचालन कृष्णानन्द कृष्ण ने किया। सत्र की अघ्यक्षता डॉ. स्वर्ण किरण डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद, श्रीमती पुष्पलता कश्यप, श्री नागेन्द्र प्रसाद सिंह, डॉ. सिद्धेश्वर कश्यप एवं श्री नरेन्द्र प्रसाद 'नवीन' ने की। इस सत्र में लगभग पचास लघुकथाकारों ने अपनी लघुकथाओं का पाठ किया जिनमें प्रमुख थे- सर्वश्री डॉ. सतीशराज पुष्करणा, पुष्पा जमुआर, वीरेन्द्र कुमार भारद्वाज, डॉ. मधु वर्मा, रामप्रसाद 'अटल' (जबलपुर), श्रीमती निर्मला सिंह, (बरेली) डॉ. उर्मिला कौल (भोजपुर), श्रीमती (गीतकार नचिकेता को सम्मानित करते कविवर सत्यनारायण) पुष्पलता कश्यप, (जोधपुर) गुरनाम सिंह रीहल, (जबलपुर) नरेन्द्र कुमार सिंह, स्वाति गोदर, नरेश पाण्डेय चकोर, ई. केदारनाथ, डॉ. स्वर्ण किरण, नरेन्द्र प्रसाद नवीन, देवेन्द्रनाथ साह (भागलपुर) गणेश प्रसाद महतो, (भागलपुर) डॉ. लखन लाल 'आरोही', अंकुश्री(झारखंड) डॉ. अमरनाथ चौधरी 'अब्ज', (झारखंड) रामयतन यादव, अरुणेन्द्र भारती, भगवान सिंह 'भास्कर', डॉ. महामाया प्रसाद 'विनोद', अलका वर्मा, जनार्दन यादव आदि। पठित लघुकथाओं पर नागेन्द्र प्रसाद सिंह, डॉ. स्वर्ण किरण ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कुछ लघुकथाओं की सराहना की तथा लघुकथाकारों को कथानक के चुनाव पर सावधानी बरतने की सलाह दी।

सम्मेलन के अंतिम सत्र में काव्य पाठ का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता डॉ. परमेश्वर गोयल ने की। अध्यक्ष मंडल के अन्य सदस्य थे डॉ. सतीशराज पुष्करणा, एवं नवगीतकार श्री सत्यनारायण। संचालन किया राजकुमार प्रेमी ने। सर्व श्री सत्यनारायण, डॉ. सतीशराज पुष्करणा, पुष्पा जमुआर, वीरेन्द्र कुमार भारद्वाज, डॉ. उर्मिला कौल (भोजपुर), नरेन्द्र कुमार सिंह, स्वाति गोदर, ई. केदारनाथ, डॉ. स्वर्ण किरण, भगवान सिंह 'भास्कर', डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप, प्रमुख थे।

इस अवसर पर सर्वश्री पुष्करणा ट्रेडर्स की स्वमिनी श्रीमती नीलम पुष्करणा द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी लगाई जिसकी सराहना मुक्त कंठ से की गयी। पुस्तकों की अच्छी बिक्री हुई। यह सम्मेलन प्रख्यात कथालेखिका डॉ. प्रभा खेतान, डॉ. बच्चन सिंह, गोपालजी झा गोपेश, कवयित्री कीर्ति चौधरी, डॉ. प्रभुदयाल अग्निहोत्री, डॉ. गिरिजाशंकर त्रिवेदी, गायक महेन्द्र कपूर की पुण्यस्मृति को सादर समर्पित था। साहित्य सचिव वीरेन्द्र कुमार भारद्वाज के धन्यवाद ज्ञापन के साथ सम्मेलन संपन्न हुआ।
(विवरण- वीरेन्द्र कुमार भारद्वाज)

बिहार के नाटककार राजेश कुमार मोहन राकेश पुरस्कार से सम्मानित


नुक्कड नाटकों को एक नया आयाम देने वाले भागलपुर निवासी चर्चित नाटककार अभिनेता राजेश कुमार को साहित्य कला परिषद नई दिल्ली द्वारा मोहन राकेश सम्मान से सम्मानित किया गया। राजेश कुमार को यह सम्मान उनके नाटक ''कहे रैदास'' के लिए पद्मश्री और प्रसिद्ध कुचीपुडी नृत्य गुरु जय रामा राव ने प्रदान किया।

दर्जनों नाटकों के रचयिता राजेश कुमार का नाटक ''कहे रैदास'' का चयन ५० नाटकों में से किया गया। चयन समिति में चर्चित रंगकर्मी सतीश आनंद, रामेश्वर प्रेम और नाट्य आलोचक जयदेव तनेजा शामिल थे। आरा की नाट्य संस्था ''युवानीति'' और भागलपुर की नाट्य संस्था 'दिशा' के संस्थापक सदस्य रहे राजेश कुमार नुक्कड़ नाट्य आंदोलन के शुरुआती दौर से सक्रिय है। अब तक दर्जनों नाटक एवं नुक्कड़ नाट्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।

(विवरण संजय कुमार,पटना से)

भारतीय भाषा परिषद की ओर से रचना गोष्ठी का आयोजन

कोलकाता के भारतीय भाषा परिषद की ओर से २८ दिसम्बर को आयोजित रचना गोष्ठी में दो सशक्त युवा कथाकारों अभिज्ञात और शर्मिला बोहरा जालान ने अपने कहानी पाठ से खचाखच भरे सभाकक्ष में उपस्थित प्रबुद्ध श्रोताओं को खासा उद्वेलित किया और पढ़ी गई कहानियों पर जम कर तर्क वितर्क हुआ। यह कार्यक्रम शनिवार की देर शाम सम्पन्न हुआ। अभिज्ञात ने अपनी नयी कहानी 'क्रेजी फैंटेंसी की दुनिया' का पाठ किया, जो कछुए पर अनुसंधान करने वैज्ञानिक के जीवन पर आधारित है, जो बेटी को कहानियाँ सुनाते-सुनाते एक विख्यात लेखक जाता है। कोहराम तब मचता है जब उसकी रचना का प्रमुख पात्र क्रैजी फैंटेसी कहानियों से बाहर निकल आता है और सौ से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। यह कहानी देश में दिनोंदिन शक्तिशाली होते जाते तंत्र की कारगुज़ारियों का तो पर्दाफाश करती ही है वह विकसित देश की अविकसित देशों के साथ की गई कूटनीतिक चतुराइयों पर भी तीखी टिप्पणियाँ करती है।

शर्मिला बोहरा जालान ने आज की मॉल संस्कृति से जुड़ी दो कहानियों 'कॉर्नसूप' और 'मॉलमून' का पाठ किया। घटनाक्रम अलग-अलग होते हुए भी दोनों कहानियाँ उस समाज पर तीखा कटाक्ष करती हैं जिसमें मॉल लोकप्रिय हो रहा है। खरीदने के लिए खरीदना, दिखावे के लिए खरीदना, कर्ज़ लेकर भी खरीदना, कहीं घूमने फिरने के बदले माल में जाने का बढ़ते चलन पर यह कहानियों चिन्ता वक्त करने में सक्षम हैं।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे भारतीय भाषा परिषद के निदेशक और प्रख्यात आलोचक डॉ.विजय बहादुर सिंह ने कहा कि इस कक्ष में पढ़ी गई कहानियों की अनुगूंज पूरे देश में सुनाई देगी। इस तरह की गोष्ठियों में विवाद होते हैं लेकिन उससे परिष्कार भी होता है। सभा में उपस्थित प्रबुद्ध जनों की प्रतिक्रिया पर अपना पक्ष रखने का विरोध किए जाने पर डॉ.सिंह ने कहा कि प्रतिक्रिया में लेखक से यह माँग नहीं की जानी चाहिए कि वह क्या दे। लेखक ने क्या दिया है वह ही प्रतिक्रिया के केन्द्र में रहे तो बेहतर होगा। प्रेमचंद और अज्ञेय ने भी अपनी रचनाओं पर अपना पक्ष रखा था। कार्यक्रम की अध्यक्षता सातवें दशक के चर्तित कथाकार आलोक शर्मा ने किया।

कहानियों पर डॉ.सत्या उपाध्याय, रमेश मोहन झा, राज्यवर्द्धन, शेराजखान बातिश, आशुतोष, अश्विनी झा, शुभ्रा उपाध्याय, रावेल पुष्प, जितेन्द्र जीतांशु ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं। अभिज्ञात की कहानी के बारे में कहा गया कि उनकी कहानी उदय प्रकाश और हैरी पाटर के कथानक और फैंटेसी की याद दिलाते हैं। कहानी की संचरना जटिल है और स्वरूप ग्लोबल। शर्मिला बोहरा जालान की कहानी पर लोगों का मंतव्य था कि यह एक नयी संस्कृति के खोखलेपन को उजागर करने में सफल हैं। उत्तर आधुनिक का स्मृतिलोप और इतिहास से कटने की चिन्ता इनमें है। कहानियों पर आपत्तियों भी दर्ज़ करायी गईं जिनका लेखकों ने जम कर जवाब दिया।

एक पुस्तक प्रेमी ऐसा भी


किसी व्यवसायी समाज में पुस्तक प्रेम देखना सुखद है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. रवि प्रकाश टेकचंदानी ऐसे पुस्तक प्रेमी हैं। वे अपने ग्रह नगर फैज़ाबाद में गत तीन वर्ष से पुस्तक मेले में स्टॉल लगा रहे हैं, जिसका उद्देश्य धन कमाना नहीं बल्कि लोगों को पुस्तकों के प्रति आकर्षित करना है। प्रख्यात लेखक हिमांशु जोशी भी इस कोशिश की सराहना करते हैं। डॉ. रवि के स्टॉल पर उत्कृष्ट सिंधी साहित्य के दर्शन होते हैं। इनमें सिंधी-अरबी, सिंधी-देवनागरी (सिंधी साहित्य दो लिपियों में लिखा जा रहा है।) और हिंदी में अनूदित सिंधी साहित्य शामिल होता है। (विवरण- अशोक मनवानी)