सोमवार, 26 सितंबर 2011

’समकालीन भारतीय सन्दर्भ और हिन्दी’विषय पर संगोष्ठी आयोजित

मेरठ, दिनांक 13 सितंबर 2011, हिन्दी विभाग, चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में ’हिन्दी दिवस’ के उपलक्ष्य में ’समकालीन भारतीय सन्दर्भ और हिन्दी’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वरिष्ठ कवि एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली में पूर्व प्राध्यापक रहे प्रो. केदारनाथ सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज समय आ गया है कि हिन्दी के माध्यम से अन्य भारतीय भाषाओं तथा उसके साहित्य की बात हो। आज इस बात की बेहद जरूरत है कि औपचारिक क्षेत्रों से हिन्दी का विकास हो तथा यह अनौपचारिक क्षेत्रों में भी आए। आज की हिन्दी एक बड़ा काम कर रही है कि इससे भारतीय साहित्य के इतिहास का निर्माण हो रहा है। आज हिन्दी भारत की सेतुभाषा बन चुकी है क्योंकि अगर आप एक भाषा से दूसरी भाषा में जाना चाहे तो अनुवाद इसका माध्यम है। हिन्दीभाषियों को भी दूसरी भाषाएं -दक्षिण की भाषाएं सीखनी चाहिए ताकि अनुवाद कर सकें। अनुवाद के क्षेत्र में हिन्दी में रोजगार है। इसलिए हिन्दी वालों को दूसरी भाषाओं के साथ प्रत्यक्ष संबंध जोड़ना होगा।

इस अवसर पर केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ कथाकार प्रो. गंगा प्रसाद ’विमल’ ने कहा कि बोल-चाल की भाषा का हिन्दी में भरपूर प्रयोग होता है। सरकारी काम-काज में हिन्दी का प्रयोग धीरे-धीरे बढ़ रहा है। समाचार पत्रों की संख्या में भास्कर, उमर उजाला, दैनिक जागरण आदि पत्रों की संख्या दूसरी भाषा इकाइयों से ज्यादा है। हिन्दी की गति फिल्मों व संचार माध्यमों में भी बढ़ रही है। देश में जो प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा में मातृ-भाषाओं का प्रयोग किया जाता है इसका अनुपात आज बढ़ा है। यह हिन्दी की बढ़ी हुई स्थिति को देखने का वैज्ञानिक तरीका है। आज हिन्दी को समकालीन सन्दर्भों में जानना जरूरी है। आज विश्व स्तर पर हिन्दी के प्रति जो रुझान कम था, वह बढ़ रहा है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. एच.सी. गुप्ता ने कहा कि हिन्दी बोलने में हमें गर्व करना चाहिए। हमें भी पाठ्यक्रम निर्माण हिन्दी में करना होगा, तभी हम अति विकसित देशों की श्रेणी में आ सकेंगे। हिन्दीभाषी लोग दुनियाँ में 3. से 4. वर्षो के भीतर बढ़े हैं अगर यह ठीक बात है तो हिन्दी का प्रसार भी तेजी से बढ़ना चाहिए। माननीय कुलपति ने कहा कि ’हिन्दी दिवस’ हमारे लिए औपचारिकता है। हर दिन हमारे लिए ’हिन्दी दिवस’ है। हर दिन हमें हिन्दी की बात करनी चाहिए। अन्त में हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि हम हिन्दी के क्षेत्रीय रूप पर भी काम कर रहे हैं तो दूसरी ओर राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रवासी साहित्य पर पाठ्यक्रम निर्धारित किया है। कार्यक्रम का संचालन मोनू सिंह एवं प्रगति ने किया।

हिन्दी दिवस के इस अवसर पर प्रो. वाई विमला, प्रो.एस.के. दत्ता, डा. महेश गर्ग, मेरठ के साहित्यकार पं. ईश्वर चन्द्र गंभीर, ज्वाला प्रसाद कौशिक ’साधक’, सुमनेश ’सुमन’, तुषा शर्मा, आदि तथा डॉ. अशोक मिश्र, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. रवीन्द्र कुमार, डा. गजेन्द्र सिंह, विवेक, अंजू, आरती राणा, अमित कुमार, ललित सारस्वत, नेत्र पाल, तथा छात्र-छात्राओं में कौशल, दलीप, पिण्टू, शिवानी, चंचल, संध्या, मिलिन्द, ब्रह्मसिंह, ज्योति, मनीषा, मोहनी, कपिल, आयुषी, पूजा, चरण सिंह, अनुराधा, राहुल आदि उपस्थित रहे।

--हिन्दी परिषद् , हिन्दी विभाग, चै. चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ