शनिवार, 28 मार्च 2009

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में राष्ट्रकवि ‘दिनकर’ शताब्दी समारोह


हैदराबाद, 23 मार्च 2009, देशभर में ‘दिनकर शताब्दी’ के अंतर्गत आयोजित समारोहों की इस कडी में यहाँ उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में एकदिवसीय साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आरंभ में संस्थान के आचार्य एवं अध्यक्ष डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने विषय प्रवर्तन करते हुए आवेग, वाग्मिता, आक्रोश, व्यंग्य और सौंदर्यबोध जैसे आयामों की कसौटी पर 'दिनकर' के काव्य के मूल्यांकन की आवश्यकता बताई। दीप प्रज्वलन द्वारा कार्यक्रम का उद्घाटन करने के उपरांत ‘स्वतंत्र वार्ता’ के संपादक, मुख्य अतिथि डॉ. राधेश्याम शुक्ल ने ध्यान दिलाया कि ‘दिनकर’ अपनी काव्य कृतियों में भारतीय इतिहास और मिथकों से कथासूत्र ग्रहण करके उनके माध्यम से आधुनिक युग के प्रश्नों की व्याख्या करते हैं। उन्होंने ‘दिनकर’ को प्रेम और युद्ध का ऐसा कवि स्वीकार किया जिसकी आस्था मानवधर्म और वैश्विकता में है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए आर्ट्स कालेज, उस्मानिया विश्वविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. एम. वेंकटेश्वर ने कहा कि ‘दिनकर’ आवेगपूर्ण राष्ट्रीयता के साथ गहन सांस्कृतिक चिंतन को अभिव्यक्त करनेवाले ऐसे कवि हैं जिन्होंने आपद्धर्म के रूप में युद्ध के औचित्य का दृढ़तापूर्वक प्रतिपादन किया है। इस अवसर पर अर्पणा दीप्ति ने दिनकर के व्यक्तित्व और विचारधारा, डॉ. पी.श्रीनिवास राव ने उनकी कृति ‘कुरुक्षेत्र’, डॉ. बलविदंर कौर ने ‘परशुराम की प्रतीक्षा’, डॉ. जी. नीरजा ने ‘उर्वशी’ और डॉ. मृत्युंजय सिंह ने ‘संस्कृति के चार अध्याय’ पर केंद्रित आलेख प्रस्तुत किए तो डॉ.. साहिराबानू बी. बोरगल ने ‘दिनकर की डायरी’ के विविध प्रसंगों पर प्रकाश डाला। समारोह के दौरान हेमंता बिष्ट, कैलाशवती, अंजली मेहता, सुचित्रा, जी. श्रीनिवास राव, एस.. वंदना, संगीता, कुतुबुद्दीन और एस. इंदिरा ने राष्ट्रकवि की विभिन्न कृतियों से ली गई कतिपय प्रतिनिधि और प्रसिद्ध रचनाओं का भावपूर्ण शैली में वाचन किया। चर्चा परिचर्चा को विजयलक्ष्मी, हेमलता, एन. वंदना, रऊफ मियाँ, भगवान, रीना झा, वैभव भार्गव, ए.जी. श्रीराम, के. नागेश्वर राव, ज्योत्स्ना कुमारी तथा भगवंत गौडर आदि ने अपनी जिज्ञासाओं से जीवंत बनाया|

तेजेन्द्र शर्मा - 'वक़्त के आइने में' का विमोचन


'तेजेन्द्र शर्मा - वक़्त के आइने में' का विमोचन राजेन्द्र प्रसाद भवन सभागार, 210 दीनदयाल उपाध्याय मार्ग (आई.टी.ओ. के निकट), नई दिल्ली-110002 में 4 अप्रैल 2009 की शाम 5.30 बजे कृष्णा सोबती, डा. नामवर सिंह एवं राजेन्द्र यादव के हाथों सम्पन्न होगा।

तेजेन्द्र शर्मा - वक़्त के आइने में रचना समय के संपादक हरि भटनागर द्वारा संपादित, ब्रिटेन के हिन्दी लेखक तेजेन्द्र शर्मा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर, एक आलोचनात्मक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में राजेन्द्र यादव, परमानन्द श्रीवास्तव, असग़र वजाहत, जगदम्बा प्रसाद दीक्षित, ज़कीया ज़ुबैरी, ज्ञान चतुर्वेदी, पुष्पा भारती, सूर्यबाला, धीरेन्द्र अस्थाना, प्रेम जनमेजय, सूरज प्रकाश, शम्भु गुप्त, अजय नावरिया के साथ साथ ब्रिटेन, कनाडा, अमरीका एवं यू.ए.ई. के लेखकों आलोचकों के लेख शामिल हैं। 412 पृष्ठ की इस पुस्तक के पहले खण्ड में तेजेन्द्र शर्मा का आत्मकथात्मक लेख - मैं और मेरा समय के अतिरिक्त उनके दो साक्षात्कार शामिल किये गये हैं जो हरि भटनागर एवं मोहन राणा द्वारा लिये गये हैं। राजीव रंजन के साथ इन्दु शर्मा के बारे में एक संस्मरणात्मक बातचीत है तो उनकी सात प्रतिनिधि कहानियाँ - क़ब्र का मुनाफ़ा, देह की क़ीमत, पासपोर्ट का रंग, कैंसर, ढिबरी टाइट, एक ही रंग, के साथ साथ कुछ कविताएँ एवं ग़ज़लें भी शामिल हैं। इस आलोचनात्मक ग्रन्थ में तेजेन्द्र शर्मा की एक व्यक्ति, कथाकार एवं आयोजक के रूप में समीक्षा की गई है।

संतोष एलेक्स की पुस्तक का लोकार्पण


विशाखापत्तनम, 25 फरवरी 2009, संतोष एलेक्स की नवीनतम पुस्तक, 'समकालीन मलयालम कहानियाँ' का लोकार्पण डॉ. एस.एम. इकबाल, प्रोफ़ेसर एवं भूतपूर्व अध्यक्ष हिन्दी विभाग, आंध्रा विश्वविद्यालय द्वारा संपन्न हुआ। शिलालेख प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में संतोष एलेक्स ने मलयालम भाषा की चुनी हुई 17 कहानियों का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया है। यह आयोजन विशाखापत्तनम की संस्था सृजन द्वारा आयोजित किया गया। प्रो. इकबाल ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए संतोष को बधाई दी और आज की विश्व में अनुवाद के महत्व को रेखांकित किया। डा. टी महादेव राव ने स्वागत भाषण में संतोष के अनुवाद की प्रशंसा करते हुए कहा कि संग्रह में अनूदित कहानियों की भाषा इतनी स्वाभाविक है कि इनको पढ़ते हुए हिन्दी कहानी पढ़ने का पूरा आनंद मिलता है। अंत में संतोष एलेक्स ने धन्यवाद ज्ञापन किया और अनुवाद के अनुभवों को उपस्थित लोगों के साथ बाँटा।

(फोटो में बाएँ से- डॉ.महादेव राव, प्रो.इकबाल, संतोष एलेक्स)

व्यंग्यकार डॉ ज्ञान चतुर्वेदी को काव्य मधुबन का 'व्यंग्यश्री' सम्मान


कोटा, ७ मार्च २००९, साहित्यिक संस्था काव्य मधुबन द्वारा देश के प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ ज्ञान चतुर्वेदी को एक भव्य समारोह में `व्यंग्यश्री' सम्मान प्रदान किया गया । यह सम्मान प्रति वर्ष किसी प्रतिष्ठित व्यंग्यकार को प्रदान किया जाता है। पूर्व में यह सम्मान डॉ हरीश नवल, बंकट बिहारी पागल, डॉ सूर्यबाला, विष्णु नागर, डॉ शेरजंग गर्ग तथा डॉ बालेन्दु शेखर तिवारी को दिया जा चुका है। होली के अवसर पर आयोजित अपने सालाना कार्यक्रम `फुहार' के दस वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संस्था ने रोटरी क्लब के सहयोग से इस वर्ष `दो दिवसीय अखिल भारतीय व्यंग्य शिविर' का भी आयोजन किया जिसमें देश के अनेक लब्ध प्रतिष्ठित व्यंग्यकार शामिल हुए।

कार्यक्रम का उद्घाटन नई दुनिया संडे के संपादक विष्णु नागर ने किया। अध्यक्षता डॉ नरेन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने की तथा विशिष्ट अतिथि उदयपुर से पधारे व्यंग्यकार डॉ देवेन्द्र `इन्द्रेश' थे। प्रथम सत्र में डॉ राजश्री गोहदकर द्वारा सरस्वती वन्दना प्रस्तुत किए जाने के पश्चात संस्था द्वारा संम्पादित व्यंग्य संकलन `व्यंग्योदय' का विमोचन किया गया जिसमें देश के लगभग ३० व्यंग्यकारों की रचनाएँ शामिल की गई हैं। कार्यक्रम का संचालन विजय जोशी ने किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में हास्य व्यंग्य कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार रघुराज सिंह हाड़ा थे तथा अध्यक्षता समाजसेवी श्री जी डी पटेल ने की। इस कवि सम्मेलन में बृजेन्द्र कौशिक, अरविन्द सोरल, भगवती प्रसाद गौतम, महेन्द्र नेह, शून्याकांक्षी, प्रेम शास्त्री, हलीम आइना, डॉ देवेन्द्र `इन्द्रेश' शरद तैलंग, ओम नागर `अश्क' तथा आर स़ी श़र्मा `आरसी' ने अपनी रचनाओं सें श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। संचालन मुकुट मणिराज ने किया।

समारोह के दूसरे दिन तृतीय सत्र में `व्यंग्य के सामाजिक सरोकार' विषय पर डॉ गीता सक्सेना ने पत्र वाचन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व्यंग्यकार डॉ ज्ञान चतुर्वेदी थे तथा अध्यक्षता डॉ प्रेम जनमेजय ने की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ ओंकार नाथ चतुर्वेदी, विष्णु नागर एवं डॉ अजय अनुरागी थे। संचालन उषा झा ने किया । इसी सत्र में डॉ अजय अनुरागी के व्यंग्य संग्रह `दबाव की राजनीति' एवं कमलेश चौधरी की पुस्तक `किसमिस के अंगूरी ठाठ' का भी विमोचन किया गया। विजय जोशी तथा वीरेन्द्र विद्यार्थी ने पुस्तकों पर प्रकाश डाला। दो दिवसीय समारोह का समापन प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ ज्ञान चतुर्वेदी को `व्यंग्यश्री' सम्मान प्रदान किए जाने के साथ हुआ। काव्य मधुबन संस्था की ओर से उन्हें प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न तथा शाल प्रदान किया गया। डॉ चतुर्वेदी ने अपनी दो हास्य व्यंग्य रचनाओं का पाठ भी किया। इससे पूर्व युवा ग़जल गायक रजब अली ने अपनी ग़जलों से सभाकक्ष को संगीतमय बना दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक करण सिंह राठौड़ थे तथा अध्यक्षता डॉ प्रेम जममेजय ने की। संचालन संस्था के सचिव अतुल चतुर्वेदी ने किया तथा संस्था के सचिव अशोक हावा ने आभार प्रदर्शन किया।

राजभाषा हिन्दी हीरक जयन्ती एवं होली काव्य संगीत संगोष्ठी


टोरांटो, कैनेडा - ७ मार्च २००९ को, 'सद्भावना हिन्दी साहित्यिक संस्था' व 'वसुधा' हिन्दी साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका के तत्वावधान में राजभाषा हिन्दी की हीरक जयन्ती व होली हेतु एक काव्य-संगीत संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। संस्था व वसुधा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में सतत संलग्न हैं। यह आयोजन उस शृंखला से जुड़ी एक कड़ी है। हिन्दी प्रेमियों के एकत्रीकरण, मिलन व अल्पाहार के उपरान्त माँ सरस्वती का पूजन संपन्न हुआ। दीप प्रज्वलित किया मुख्य अतिथि तत्कालीन कोंसुलाध्यक्ष माननीय श्री सुरेन्द्र अरोरा व श्रीमती नीलिमा अरोरा ने। सरस्वती वंदना गाई अमृता शाक्य ने, तथा उनके स्वर में स्वर मिलाया गर्व से अभिभूत सभी उपस्थित हिन्दी-प्रेमियों ने। संगोष्ठी के प्रतिभागी क्रमानुसार हैं - श्री सुरेन्द्र अरोरा, श्री दुबे उमादत्त अनजान, श्री राजीव शर्मा, श्री वीरेन्द्र ढींगरा, श्री शांति स्वरूप सूरी, श्री जगमोहन मेहरा, श्री गोपाल बघेल, श्री आनन्द गोयल, श्रीमती दीप एटवाल, डॉ. प्रीति धामणे, कुमारी अमृता शाक्य, आचार्य संदीप कुमार त्यागी, श्री सरन घई एवं श्रीमती स्नेह ठाकुर।

इस संगोष्ठी के दौरान संस्था द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की सूची में हिन्दी की हीरक जयन्ती के उपलक्ष्य में जुड़ने वाली शीघ्र प्रकाश्य पुस्तक 'काव्य-हीरक' की घोषणा भी की गयी। संस्था की अध्यक्ष एवं वसुधा की संपादक-प्रकाशक श्रीमती स्नेह ठाकुर ने विशिष्ट अतिथियों, श्रोताओं व संस्था के सदस्यों के प्रति आभार प्रदर्शित करते हुये उन्हें टोरांटो, कैनेडा में इस सर्वप्रथम आयोजित राष्ट्रभाषा हिन्दी हीरक जयन्ती को सफल बनाने हेतु धन्यवाद दिया तथा भोजन के लिये आमंत्रित किया। राजभाषा हिन्दी की हीरक जयन्ती की गरिमा को अक्षुण्ण रखते हुए होली के विविध रसों से प्लावित यह समारोह संपन्न हुआ।

स्नेह ठाकुर
अध्यक्ष : सद्भावना हिन्दी साहित्यिक संस्था
संपादक-प्रकाशक वसुधा