सोमवार, 30 मई 2011

कोपेनहैगेन में साहित्य संध्या

२२ मई २०११, नन्हीं जलपरी के देश की राजधानी डेन्मार्क के प्रथम सांस्कृतिक कैफे ट्रांकेबार में वैश्विक समुदाय की संरक्षक श्रीमती पूर्णिमा वर्मन का भव्य स्वागत किया गया, जिसमें भारतीय मूल के धार्मिक, सामाजिक और साहित्यिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।  इस कैफे की स्थापना भारतीय मूल के रेडियो कलाकार, प्रोड्यूसर, उद्घोषक और गजलकार तथा रेडियो सबरंग से संस्थापक श्री चाँद शुक्ला हदियाबादी तथा मूलरूप से डेनमार्क की निवासी चित्रकार, कवि, लेखक, अनुवादक एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती रिगमोर कुबलाक रासमुसेन (रिग मोर) ने की है।

कार्यक्रम का प्रारंभ चाँद हदियबादी ने डेन्मार्क में साहित्यिक गतिविधियों के विषय में बताकर किया। उन्होंने रेडियो सबरंग से ट्रंकबार तक की यात्रा के कुछ रोचक संस्मरणों को अतिथियों के साथ बाँटा औॅर ट्रंकबार की लोकप्रिय परंपराओं के विषय में बताया जिसमें द्वार से सटी खिड़की में रखे झरने में संजोई गई शुभ मणियों को कैफ़े के अतिथियों द्वारा उठाने और कैफे में पहली बार पधारने वाली महिला के गले में एक स्कार्फ पहनाने की मनमोहक परंपराएँ शामिल थीं। उन्होंने रेडियो सबरंग की वेब साइट के नये परिवर्तनों को भी सबके साथ बाँटा।
कोपेनहैगे निवासी प्रवासी उपन्यासकार एवं कथाकार अर्चना पैन्यूली ने कार्यक्रम का संचालन किया। उपस्थित हिंदी कर्मियों का परिचय दिया और उनसे अपने कार्य में आने वाली समस्याओं उनके निराकरणों और अपने कार्य अनुभवों के विषय में बोलने के लिये उन्हें आमंत्रित किया। इस अवसर पर सुनीता मंगा, आशा अरोड़ा और कुमुद माथुर ने हिंदी शिक्षण से संबंधित अपने विचार प्रस्तुत किेये। प्रवासी भारतीयों के लिये हिंदी की उपयोगिता बताते हुए उपन्यासकार व कथाकार राजकुमार कोहली ने कहा कि भारतीय मन की संवेदनाओं का जैसा चित्रण हिंदी भाषा में हो सकता है वैसा अंग्रेजी या अन्य भाषाओं में नहीं हो सकता। रेडियो प्रोड्यूसर एवं उद्घोषक गुरुदयाल सिंह रमता ने कहा कि दूसरी भाषा से हमें धन समृद्धि सबकुछ मिल जाती है लेकिन अपनी भाषा के छूटते ही हम अपनी सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं को खो बैठते हैं।

पहले सत्र के बाद अनेक प्रकार के गर्म व ठंडे पेय के साथ समोसे और पकौड़ों का अल्पाहार परोसा गया। दूसरे सत्र का प्रारंभ प्रीति सिंह की तीन छंदमुक्त रचनाओं से हुआ। उनके बाद अर्चना पैन्यूली ने अपनी दो कविताओं का पाठ किया। कुमुद माथुर की एक लंबी कविता के बाद सबके आग्रह पर चाँद हदियाबादी की गजलों ने खूब रंग जमाया। श्रीमती रिगमोर ने पूर्णिमा वर्मन की कुछ रचनाओं के डैनिश अनुवाद का पाठ किया, अंत में पूर्णिमा वर्मन की गजलों और सुरीले गीतों से संध्या संपन्न हुई।
धन्यवाद ज्ञापन चाँद हदियाबादी ने किया। कार्यक्रम में उपरोक्त वक्ताओं के अतिरिक्त रवि मंगा, रघुनाथ माथुर, कमल घोष, शारदा दुलानी, सत्यदेव चतुर्वेदी, ज्योति पैन्यूली, कमल कोहली, प्रवीण सक्सेना और दिनेश शर्मा भी उपस्थित थे।

--दिनेश शर्मा

4 टिप्‍पणियां:

manmohan saral ने कहा…

Priy Purnima ji
openhagen mein aapke swagat pa badhai. Karykram bahut achha hua. aapki sumadhur awaz men gazal aur kavita sinne ka lobh mujhe bhi ho gaya hai. kab woh avsar milega? Archna ji ki kahaniyan to padhta raha hoon, unki kavitaon ko padhne ka mauka abhi tak nahin mila. unhen bhi badhai den.
manmohan saral, Mumbai

Archana ने कहा…

Purnimaji,

Apke netratav main bahut rauchak va sarthak Hindi karyakaram ho gaya Copenhagen main.
Many Hindi lovers got motivated.
Thanks!

Archana Painuly, Copenhagen

Devi Nangrani ने कहा…

Poornima ji
Copenhagen mein aapka karyakram safalta ke charan chuta raha iske liye aapko aur Shri Chand Shukla ji ko bahut hi badhayi v shubhkamanyein
Devi Nangrani, NJ

डा० व्योम ने कहा…

चाँद हदियावादी और अर्चना पैन्यूली का नाम हिन्दी साहित्य में जाना माना है, हिन्दी साहित्य के लिए आपके प्रयास रंग लाएँगे। पूर्णिमा वर्मन के बहाने यह साहित्यिक समारोह सम्पन्न हुआ और इसका समाचार चित्रों सहित यहाँ देकर पूर्णिमा वर्मन ने असंख्य हिन्दी प्रेमियों को भी अपनी इस साहित्यिक यात्रा का सहभागी बना लिया है। वधाई ।