रविवार, 26 जुलाई 2009

"राजभाषा अधिकारी कोश" के सम्बंध में सूचना

देश भर के राजभाषा अधिकारियों को एक सूत्र में पिरोने के लिए "भारत पब्लिकेशन" (द डायरेक्टरी पीपुल) की ओर से "राजभाषा अधिकारी कोश" का प्रकाशन सितंबर में होगा। इस अखिल भारतीय कोश का संपादन वरिष्ठ पत्रकार व पत्रकारिता कोश के संपादक मो. आफताब आलम करेंगे। यह पहला अवसर है जब राजभाषा हिंदी के प्रचार, प्रसार व कार्यान्वयन के लिए नियुक्त किए गए राजभाषा अधिकारियों को एक मंच पर लाने के लिए किसी कोश का प्रकाशन किया जा रहा है।

राजभाषा अधिकारी कोश में सरकारी कार्यालयों, उपक्रमों, संस्थानों, बैंकों, आदि में राजभाषा कार्यान्वयन के लिए नियुक्त विभिन्न स्तर के अधिकारियों, जैसे-हिंदी अधिकारी, वरिष्ठ हिंदी अधिकारी, प्रबंधक (राजभाषा), सहायक प्रबंधक (राजभाषा), उप प्रबंधक (राजभाषा), महाप्रबंधक (राजभाषा), सहायक निदेशक (राजभाषा), उप निदेशक (राजभाषा), निदेशक (राजभाषा), राजभाषा प्रभारी, आदि के नाम, पदनाम, पता, फोन, मोबाइल नंबर, ई-मेल पता आदि की जानकारी प्रकाशित की जाएगी। साथ ही देश भर में संचालित की जा रही नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के विवरण, साहित्यिक संस्थाएँ, साहित्य प्रेमी, सरकारी पत्र-पत्रिकाएँ, आदि के विवरण भी शामिल किए जाएँगे।

लगभग ३०० पृष्ठों पर आधारित इस कोश के प्रकाशन हेतु राजभाषा अधिकारियों व संबंधित जानकारियों को संकलित करने का काम तेज़ी से चल रहा है। सभी सरकारी कार्यालयों, उपक्रमों, बैंकों के राजभाषा अधिकारियों, साहित्य प्रेमियों, साहित्यिक संस्थाओं से अनुरोध है कि वे अपना विवरण ३१ जुलाई, २००९ तक संपादक, राजभाषा अधिकारी कोश, भारत पब्लिकेशन, प्लॉट नं १४- जे-७, शिवाजी नगर, कोंकण बैंक के सामने, गोवंडी, मुंबई- ४०००४३१. महाराष्ट्र के पते पर भेज दें अथवा मोबाइल नंबर ०९२२४१६९४१६ / ९८२०१२०९१२ या ई-मेल-aftaby2k@hotmail।com पर संपर्क कर सकते हैं।

2 टिप्‍पणियां:

aftab alam ने कहा…

Editor ji,
"Rajbhasha Adhikari Kosh" ke sambandh men suchna wali news achhi lagi aur iske liye bahut bahut dhanyavad. lekin is news men address 4-j-7 ke badle 14-j-7 galti se chhap gaya hai. kripya ise sudhar dain to behtar.
aftab alam

धीरेन्द्र सिंह ने कहा…

इस कोष के संपादक के बारे में राजभाषा जगत में कभी पहले कुछ सुना नहीं गया है। एक नया नाम है तथा इस बारे में पत्र, सूचना आदि नगर राजभाषा कार्यान्वयन स्तर के साथ-साथ क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय से भी सूचना आती तो वह ज्यादा प्रभावशाली रहती। अभी तो सूचना प्रेषित करने में संशय है।