सोमवार, 30 जनवरी 2012

पर्यटक जी को अंतिम प्रणामः

१९८० एवं ९० के दशक में लखनऊ में उभरते साहित्यकारों- विशेषकर कवियों को एकजुट कर नवोदित साहित्यकार परिषद नामक एक मंच प्रदान करनेवाले रामनारायण त्रिपाठी पर्यटक आज ३० जनवरी २०१२ को पंचतत्त्व में विलीन हो गए। कैंसर की कष्टकारक लंबी बीमारी से विगत रविवार को दोपहर बाद उन्होंने पार्थिव शरीर त्याग दिया।

१९८९ में भाई पर्यटक जी के नेतृत्व में नवोदित साहित्यकार परिषद द्वारा लखनऊ के मिनी रवींद्रालय में मनाया गया पं. माखनलाल चतुर्वेदी जन्म शताब्दी समारोह इतना भव्य एवं चर्चित रहा कि उसके सामने राज्य सरकार द्वारा कानपुर में लाखों रुपए खर्च करके मनाया गया सरकारी समारोह भी फीका पड़ गया था। उसी वर्ष नवोदित साहित्यकार परिषद ने लोकगीतों के संकलन पर अद्वितीय काम करनेवाले पं. रामनरेश त्रिपाठी का जन्मशताब्दी समारोह भी पूरी गरिमा के साथ मनाया गया। इस समारोह में परिषद को आशीर्वचन देने के लिए लखनऊ की शान समझे जानेवाले वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय अमृतलाल नागर जी भी उपस्थित थे ।  संगठनकुशल भाई पर्यटक जी एवं परिषद के राष्ट्रीय महासचिव राजेश राय के नेतृत्व में जो महत्वपूर्ण काम किये गए उसके लिये वे सदा याद किये जाएँगे।
-मुंबई से ओमप्रकाश तिवारी की रपट

2 टिप्‍पणियां:

डॉ. नागेश पांडेय 'संजय' ने कहा…

‎'पर्यटक' जी का अनायास चले जाना विचलित कर गया. बाल साहित्य के लिए पूरे मन से समर्पित थे. कई साल पहले 'राष्ट्रधर्म' में उन्होंने मेरे संयोजन में एक स्तम्भ " बाल साहित्य मनीषी" प्रारंभ किया था. इस बहाने हिंदी के वरिष्ठ बाल साहित्यकारों पर नियमित रूप से कई आलेख प्रकाशित हो सके थे.
गत वर्ष उनके प्रयासों से जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर में बाल साहित्य पर संगोष्ठी हुई थी. मैं उनके साथ ही लखनऊ से गया था.क्या पता था, वह अंतिम सहयात्रा होगी.
वह अंतिम सहयात्रा

संध्या शर्मा ने कहा…

विनम्र श्रद्धांजलि....