सोमवार, 26 अक्तूबर 2009

पाँच ग़ज़लकारों को दुष्यंत कुमार स्मृति सम्मान

बरेली। साहित्य संस्था 'सृजन' की ओर से शहर के पाँच ग़ज़लकारों को दुष्यंत कुमार स्मृति सम्मान प्रदान किया गया। सम्मानित होने वाले ग़ज़लकारों में शिवनाथ बिस्मिल, कृष्णा खंडेलवाल कनक, विनय सागर जायसवाल, शालिनी गुंजन और डॉ. राहुल अवस्थी शामिल हैं।

दुष्यंत कुमार सम्मान से सम्मानित डॉ. राहुल अवस्थी ने दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल परंपरा पर बात करते हुए उनकी कई ग़ज़लें सुनाई। उन्होंने कहा कि दुष्यंत कुमार ग़ज़ल को आम आदमी से जोड़कर देखते थे। यही बात आज भी उन्हें पाठकों के बीच लोकप्रिय बनाए हुए है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में इंजीनियर आर.पी.सिंह एजीएम टेलीफ़ोन और डॉ. आर.एम. मिश्रा एडीएम सिटी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भोपाल से आए दुष्यंत कुमार के पुत्र आलोक त्यागी ने की। सृजन की ओर से मोनिका अग्रवाल, निरूपमा अग्रवाल, ऋषि कुमार शर्मा, रोहित अग्रवाल आदि उपस्थित थे।

सिंधी साहित्य में उत्तर आधुनिकता

दिल्ली विश्वविद्यालय के आधुनिक भारतीय भाषा और साहित्यिक अध्ययन विभाग ने राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के सहयोग से एक संगोष्ठी का आयोजन किया। विषय था- ''सिंधी साहित्य में उत्तर आधुनिकता''। पहली बार इतने महत्वपूर्ण विषय पर सिंधी और अन्य भाषाओं के लेखक एकत्र हुए। संगोष्ठी के समन्वयक थे- डॉ. रवि प्रकाश टेकचंदानी। डॉ. रवि स्वयं सिंधी के जाने-माने रचनाकार और अध्येता हैं।

राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के निदेशक डॉ. मनोहर मतलानी, प्रो. पी.सी.पटनायक ने जहाँ अपने विचारों से आमंत्रित साहित्यकारों को अवगत कराया वहीं सिंधी साहित्य में उत्तर आधुनिकता पर समीक्षक आनंद खेमानी, मोहन गेहानी, वसदेव मोही, डॉ. हसो दादलानी, भगवान अटलानी, डॉ. कमला गोकलानी, डॉ. सतीष रोहिरा और डॉ. मुरलीधर जेटली ने विभिन्न सत्रों में शोधपत्र पढ़े। डॉ. टी.एस. सत्यनाथ, डॉ. के.प्रेमनाथन, डॉ. राजेंद्र मेहता, डॉ. अमितवा चक्रवर्ती, प्रो. एन.डी. मिरजकर, हीरो ठाकुर, प्रो. सी.जे. दसवानी और सिंधू भगिया मिश्रा ने साहित्यिक विमर्श में हिस्सा लिया।

संगोष्ठी का सार यह था कि सिंधी साहित्य में अभी उत्तर आधुनिकता का समुचित विकास नहीं हुआ है। इस दिशा में कार्य की ज़रूरत है। इस संगोष्ठी के आयोजन से न सिर्फ़ सिंधी और भारत की अन्य भाषाओं के मध्य संपर्क गहरा होगा बल्कि परस्पर आदान-प्रदान और अनुवाद कार्य करने वाले लेखक भी प्रोत्साहित होंगे। सिंध से आए इंस्टीट्यूट ऑफ सिंधोलॉजी के पूर्व डायरेक्टर प्रो. शौकत शोरो ने सिंधी कहानी की पड़ताल की। राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के उपाध्यक्ष श्रीकांत भाटिया ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया। दैनिक जागरण इस संगोष्ठी का मिडिया सहयोगी था।

विवरण- अशोक मनवानी

'ज़िंदगी के स्वर' का लोकार्पण


दिनांक २१ अक्टूबर २००९ को नगर होशंगाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार सजीवन मयंक के ६७वें जन्मदिन के अवसर पर उनके सातवे संकलन ''ज़िंदगी के स्वर'' का लोकार्पण नगर के नेहरू पार्क में वरिष्ठ साहित्यकार श्री जगमोहन शुक्ल जी के कर कमलों द्वारा किया गया। श्री शुक्ला जी ने मयंक जी की रचनाओं को आज के दौर की वास्तविकताओं का काव्य रूप निरूपित किया तथा मयंक जी के इस शेर को संदर्भित किया 'कहते हैं हम जिसे ज़िंदगी, लगती एक मशीन है यारों'। इस अवसर पर नगर के होशंगाबाद के अनेक गणमान्य नागरिक एवं साहित्यकारों में मोहन वर्मा, गिरीमोहन गुरु, कृष्ण स्वरूप शर्मा, एम.पी.मिश्रा, एवं सुश्री जया नर्गिस विशेष रूप से उपस्थित थे। श्री मयंक के इस संकलन में १०० ग़ज़लें, २०० मुक्तक, एवं ४० क्षणिकाएँ समाहित हैं।

लघु कथा पुस्तक संकलन ''नजरिया'' का विमोचन

व्यंगात्मक व चुटीली व्यवहारिक लघु कथाओं के संकलन की पुस्तक ''नजरिया'' का विमोचन २०/०९/२००९ को हिन्दी भवन मे आयोजित अंबिका प्रसाद दिव्य स्मृति पुरस्कार समारोह मे नागालेन्ड के पूर्व राज्यपाल श्री ओ.पी. श्रीवास्तव व प्रसिद्ध व्यंगकार श्री प्रेम जनमेजय द्वारा किया गया। इस पुस्तक के लेखक श्री सुदर्शन कुमार सोनी है। इस अवसर पर प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक श्री मोती सिंह एन.एच.डी.सी के कार्यपालक निर्देशक भी उपस्थित थे।

''नजरिया'' ८४ लघु कथाओ का संकलन है जिसकी लघु कथाओं को पढ़कर ऐसा लगता है कि पाठक ने यह घटना अपने आस-पास घटित होते देखी है। प्रत्येक लघु कथा मानव मूल्यों को लेकर संवेदनशील है तथा एक स्पष्ट संदेश पाठक को देती है।
हिन्दी भवन में आयोजित कार्यक्रम मे अनेक ख्याति प्राप्त साहित्यकार, साहित्य अनुरागी जन व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

(चन्द्रभान 'राही')
१३६शिर्डी पुरम कोलार रोड भोपाल म.प्र.

हरिनारायण को बृजलाल द्विवेदी साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान


भोपाल। दिल्ली से प्रकशित साहित्यिक पत्रिका 'कथादेश' के संपादक हरिनारायण को पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है। वर्ष २००८ के सम्मान के लिए श्री हरिनारायण के नाम का चयन पाँच सदस्यीय निर्णायक मंडल ने किया जिसमें नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव( मुंबई), सप्रे संग्रहालय, भोपाल के संस्थापक विजयदत्त श्रीधर( भोपाल ), छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक रमेश नैयर, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति सच्चिदानंद जोशी, साहित्य अकादमी के सदस्य गिरीश पंकज (रायपुर) शामिल थे। पूर्व में यह सम्मान वीणा(इंदौर) के यशस्वी संपादक डॉ.श्यामसुंदर व्यास और दस्तावेज (गोरखपुर) के संपादक डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को दिया जा चुका है।

सम्मान समिति के सदस्य संजय द्विवेदी ने बताया कि हिन्दी की स्वस्थ साहित्यिक पत्रकारिता को सम्मानित एवं रेखांकित करने के उद्देश्य से इस सम्मान की शुरुआत की गई है। इस सम्मान के तहत किसी साहित्यिक पत्रिका का श्रेष्ठ संपादन करने वाले संपादक को ११ हज़ार रुपए, शाल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह एवं सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया जाता है। मार्च १९४८ में जन्में श्री हरिनारायण १९८० से कथादेश का संपादन कर रहे हैं। वे हंस, विकासशील भारत, रूप कंचन के संपादन से भी जुड़े रहे हैं। उनके संपादन में कथादेश ने देश की चर्चित साहित्यिक पत्रिकाओं में अपनी जगह बना ली है।

प्रेषकः संजय द्विवेदी,
(अध्यक्ष)
जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, प्रेस काम्पलेक्स,
एमपी नगर, भोपाल(मप्र)
Email- 123dwivedi@gmail.com