मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

साहित्य अकादमी में सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक का नार्वे में हिंदी लेखन पर व्याख्यान

चित्र में बाएँ से: दिल्ली विश्वविद्यालय की अंगरेजी की प्रोफ़ेसर, अनुवादक श्री सिंह, साहित्य अकादमी के सदस्य, साहित्य अकादमी के सदस्य, डॉ. ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक', डॉ. सतेन्द्र कुमार सेठी, आलोचक डॉ. कमल किशोर गोयनका, प्रदीप कुमार शुक्ल और राष्ट्र किंकर के संपादक विनोद बब्बर।

३१ मार्च को साहित्य अकादमी दिल्ली में प्रवासी मंच के तहत नार्वे से पधारे प्रवासी साहित्यकार और 'परिचय' (१९८०-१९८५) और 'स्पाइल-दर्पण' (१९८८ से) के संपादक सुरेशचन्द्र शुक्ल ने नार्वे में हिन्दी लेखन पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ साहित्य अकादमी के डॉ. ब्रिजेन्द्र त्रिपाठी द्वारा प्रवासी मंच और प्रवासी मंच में व्याख्यान देने वाले साहित्यकार का परिचय देकर किया।

कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय, साहित्य अकादमी के सदस्यों के अतिरिक्त प्रसिद्ध विद्वान डॉ. कमल किशोर गोयनका, डॉ विनोद सेठ, अमर उजाला के हरी प्रकाश, राष्ट्र किंकर के संपादक और नार्वे पर संस्मरण-पुस्तक 'इबसेन के देश में' के लेखक विनोद बब्बर, वैश्विका साप्ताहिक के संपादक, संजय मिश्र, स्पाइल-दर्पण दिल्ली के प्रतिनिधि और संपादक मंडल के सदस्य डॉ. सत्येन्द्र कुमार सेठी और अन्य लोगों ने प्रश्नोत्तर के दौरान सक्रिय भागीदारी से व्याख्यानमाला को बहुत रोचक बना दिया। अनेक सुझावों, प्रश्नों और संवाद ने गोष्ठी में जिज्ञासाओं और समस्याओं को हल करने के लिए संवाद बनाए रखने के लिए सामाजिक मीडिया में परस्पर संबंधों को बढाने की बात की गयी।

सुरेशचंद्र शुक्ल ने अपने व्याख्यान में नार्वे में मूल से नार्वेजीय भाषा और हिन्दी मूल से नार्वेजीय भाषा में अनुवाद पर ओस्लो में होने वाले सेमीनार, मासिक लेखक गोष्ठियों तथा हिन्दी भाषियों और क्षत्रों के लिए लेखन कर्मशाला में नार्वे के हिन्दी लेखन मंच, भारतीय-नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम नार्वे का कार्य उत्कृष्ट है। उन्होंने भारतीय, प्रवासी संस्थाओं द्वारा की जा रही हिन्दी, पंजाबी और अन्य भारतीय भाषाओँ की सेवा के लिए किये जा रहे कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए उसे सराहनीय बताया। सुरेशचंद्र शुक्ल ने अपनी सम्पादित प्रवासी कहानियों के संकलनों 'प्रतिनिधि प्रवासी कहानियां' (सन २००४ में प्रचारक बुक क्लब, वाराणसी, उत्तर प्रदेश से प्रकाशित) और 'समसामयिक प्रवासी कहानियां' सहित नार्वे के प्रवासी लेखकों के कहानी संग्रहों में स्वर्गीय हरचरण चावला का कहानी संग्रह 'आख़िरी कदम से पहले' ( सन १९८३ को नेशनल पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली से प्रकाशित) और सुरेशचंद्र शुक्ल का कहानी संग्रह 'अर्द्धरात्रि का सूरज' (सन १९९६ को हिन्दी प्रचारक पब्लिकेशन्स, वाराणसी द्वारा प्रकाशित और राष्ट्रपति शकर दयाल शर्मा द्वारा प्रशंसित) को खास बताया तथा यात्रा वृत्तान्त में सन १९७३ को वन्दे मातरम् प्रेस लखनऊ से छपी डॉ राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की पुस्तक 'मेरी साइकिल यात्रा' को यात्रा साहित्य में विशिष्ट बताया।

नार्वे के लेखकों की खास पुस्तकों जो हिन्दी साहित्य में चर्चित रहीं वे हैं स्वर्गीय पूर्णिमा चावला की पुस्तक 'कभी-कभी लगता है' और सुरेश चन्द्र शुक्ल की काव्य पुस्तकों 'रजनी' (१९८४ संगीता प्रकाशन, लखनऊ), नंगे पांवों का सुख' (१९८६ संगीता प्रकाशन, लखनऊ), 'नीड़ में फंसे पंख' ( १९९९ को हिन्दी प्रचारक पब्लिकेशन्स, वाराणसी जिसका लोकार्पण लन्दन में हुए विश्व हिन्दी सम्मलेन में माननीय विजय राजे सिंधिया द्वारा हुआ था),और 'गंगा से ग्लोमा तक' (२०१० को 'विश्व पुस्तक प्रकाशन, नयी दिल्ली से प्रकाशित)। संगीता शुक्ल सीमोन्सेन की हिन्दी की पाठ्य पुस्तक भी सराहनीय है जो हिन्दी स्कूल नार्वे में पढ़ाई जाती है। ओस्लो विश्व विद्यालय के प्रो. जोलर द्वारा हिन्दी का डाटा बेस भी एक उत्कृष्ट कार्य है।

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

वर्जीनिया में काव्य संध्या का आयोजन

दिनांक ७ अप्रैल २०१२ को अमेरिका के वर्जीनिया राज्य में स्थित राजधानी मंदिर के प्रांगण में ‘अखिल विश्व हिंदी समिति’ की ओर से एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इस काव्य गोष्ठी में स्थानीय रचनाकारों के अलावा न्यूजर्सी, फिलाडेल्फिया तथा न्यूयार्क से पधारे रचनाकारों ने भाग लिया। गोष्ठी का मुख्य विषय था ‘होली मिलन’।

आमंत्रित कवियों ने होली के त्यौहार से सम्बंधित सतरंगी रचनाओं का पाठ तो किया ही साथ में हास्य रस की रचनाओं से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। मंच संचालन किया विश्व प्रसिद्ध कवि श्री राकेश खंडेलवाल ने और अध्यक्षता की डॉ बिन्देश्वरी अग्रवाल ने। श्री राकेश खंडेलवाल ने समधुर गीतिकाव्य के रूप में प्रत्येक रचनाकार का मंच पर स्वागत किया तथा अपने गीतों से सब का मन मोह लिया। इस काव्य गोष्ठी में श्री घनश्याम गुप्ता, गुलशन मधुर,धनंजय कुमार, ललित आहलुवालिया अनूप भार्गव रजनी भार्गव, शशि पाधा, मधु महेश्वरी, डॉ बिन्देश्वरी अग्रवाल, विद्या पुरोहित ने रचना पाठ किया।

अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ बिन्देश्वरी अग्रवाल ने तथा अखिल विश्व हिंदी समिति की स्थानीय शाखा के अध्यक्ष श्री राकेश खंडेलवाल ने सभी अतिथियों का धन्यवाद करते हुए अनुरोध किया कि भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन में सहायता प्रदान करें ताकि हिंदी भाषा एवं संस्कृति के प्रचार–प्रसार की धारा अविरल गति से बहती रहे। कार्यक्रम का समापन राजधानी मंदिर कमेटी की ओर से आयोजित रात्रि भोज से हुआ।

राजधानी मंदिर के सहयोग से यह छठा कवि सम्मेलन आयोजित किया गया था| हर वर्ष होने वाले कवि सम्मेलन में अमेरिका के विभिन्न राज्यों से चुने हुये कवि इसमें भाग लेते हैं।

शशि पाधा

बुधवार, 11 अप्रैल 2012

"पत्रकारिता कोश" का १२वाँ अंक लोकार्पित

मुंबई, १० अप्रैल २०१२ , अथक सेवा संघ द्वारा घाटकोपर में आयोजित एक समारोह में भारत की प्रथम मीडिया डायरेक्टरी 'पत्रकारिता कोश-२०१२' का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत माननीय अतिथियों के दीप प्रज्ज्वलन व सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। रवि यादव की सरस्वती वंदना के बाद काव्य रंग में गीतेश गीत, डॉ. मुकेश गौतम, डॉ. रजनीकांत मिश्र, सुरेश मिश्र व रास बिहारी पांडेय ने काव्य पाठ किया।

इस अवसर पर बोलते हुए मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष तथा गरवारे इंस्टीट्यूट में पत्रकारिता विभाग के समन्वयक डॉ. रामजी तिवारी ने कहा- भगवान विष्णु के १२वें अवतार थे श्रीराम। राशियों की संख्या १२ होती है। १२ महीनों से ऋतु चक्र पूरा होता है और यह "पत्रकारिता कोश" का १२वाँ अंक है जिसमें मीडिया जगत की संपूर्ण जानकारी समाहित है। उन्होंने आगे कहा कि यह कोश भारतीय मीडिया के बारे में पूरी सूचना व जानकारी उपलब्ध कराकर देश को जोड़ने का काम कर रहा है और इसे निरंतर जारी रखने की आवश्यकता है। समारोह अध्यक्ष व दोपहर का सामना के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ल ने कहा कि "पत्रकारिता कोश" ने पहले अंक से लेकर अब तक के १२ वर्षों में लगभग ६०० फीसदी की वृद्धि दिखाई है जिससे मीडिया के लोकतंत्रीकरण का पता चलता है। इस अवसर पर भोजपुरी साहित्यकार डॉ. आशारानी लाल के भोजपुरी कथा संग्रह "सितली" के दूसरे संस्करण का विमोचन भी किया गया। डॉ. रामजी तिवारी ने "सितली" पर विशेष वक्तव्य के तहत कहा कि "सितली" के माध्यम से लेखिका ने नारी की सबलता को आवाज देते हुए भोजपुरी समाज के दुख दर्द को पाठकों के सामने लाने का प्रयत्न किया है।

स्टार न्यूज के वरिष्ठ संपादक जीतेंद्र दीक्षित ने कहा कि "पत्रकारिता कोश" में सटीक, सही व अद्यतन जानकारी है। इस अवसर पर निर्भय पथिक के संपादक अश्विनी कुमार बिजनेस भास्कर के परामर्श संपादक पी. अजय कुमार, हिंदी विद्या प्रचार समिति के मंत्री डॉ. राजेंद्र सिंह, राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरी संस्थान के राजभाषा अधिकारी व कवि सुरेश चंद्र जैन, महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड के सहायक निदेशक (राजभाषा) कलीम उल्लाह खान, कौमी फरमान पत्रिका के संपादक रईस खान, बिजनेस स्टैंडर्ड के प्रधान संवाददाता सुशील मिश्र, नवभारत के राजनीतिक संवाददाता सुरेंद्र मिश्र, हमलोग संस्था के अध्यक्ष एड. विजय सिंह आदि सहित अनेक पत्रकार व साहित्यकार उपस्थित थे।

कार्यक्रम के समय नवभारत के वरिष्ठ पत्रकार नामदार राही, अखिलेश कुमार मिश्र, दयाशंकर पांडेय, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के युवा नेता अरबिंद तिवारी, अक्रॉस मुंबई के संपादक संजय खिमेश्रा, दोपहर का सामना के संवाददाता श्रीश उपाध्याय, पुष्पराज मिश्र, शेषनारायण त्रिपाठी, रविन्द्र मिश्रा, नागेंद्र शुक्ल, पूर्ण विराम व एकता चक्र के संपादक यार मोहम्मद खान, बॉलीवुड ब्लॉग के संपादक मनोज यादव, मीडिया समाचार के संपादक पवन दुबे, लेखक सलाम उसमान शेख, निडर राही के संपादक पप्पू वर्मा, टाइम्स ऑफ ठाणे के संपादक दिनेश वर्मा, यशोहिन्द के संपादक दीपक वर्मा, उर्दू चैनल के संपादक कमर सिद्दीकी, विकलांग की पुकार के कार्यकारी संपादक सरताज मेहदी, विद्युत ध्वनि के संपादक राकेश मणि तिवारी, आजका दौर के संपादक श्याम सुंदर शर्मा, लेखिका मधुलता अरोड़ा, पत्रकार लक्ष्मी यादव, जनखुलासा के संपादक सौदागर जाधव, संवाद शक्ति के संपादक पवन तिवारी, हिन्दुस्तान की आवाज के संपादक मुक़ीम शेख, जगत प्रहरी के प्रबंध संपादक मुश्ताक खान, तेजस्वी दुनिया के संपादक महेश शर्मा, निर्भय पथिक के संवाददाता सुरेंद्र दुबे, हमारा महानगर के संवाददाता हरिश्चंद्र पाठक, मुंब्रा दर्पण समाचार के संवाददाता लहिरी मियाँ, ज्योतिषि लेखक आचार्य पवन त्रिपाठी, मजमूए-सदाक़त के सहायक संपादक सैयद फरमान अली, वरिष्ठ पत्रकार सैयद मुमताज रिज़्वी, पत्रकार किशोर पणिकर, समाजसेवी अरूण सिंह, कवि अनिल त्रिपाठी कड़क, दुर्गा वाहिनी महिला संगठन की अध्यक्षा व ज्वलंत समाचार की संपादक मीता सिंह के अलावा साहित्य, पत्रकारिता व कला जगत से संबद्ध अनेक विभूतियों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में "पत्रकारिता कोश" के संपादक आफताब आलम तथा "सितली" की रचनाकार डॉ. आशा रानी लाल ने भी अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत अथक सेवा संघ के अध्यक्ष अनिल गलगली ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनंत श्रीमाली ने किया जबकि आभार प्रदर्शन पत्रकारिता कोश के सहायक संपादक राजेश विक्रांत ने किया।

मुंबई से आफताब आलम की रपट