सोमवार, 24 जनवरी 2011

कविता वाचक्नवी के सम्मान में स्नेह मिलन और कवि गोष्ठी संपन्न


हैदराबाद,१४ जनवरी २०११ 'साहित्य मंथन' और 'विश्वम्भरा' के तत्वावधान में आज सायं प्रसिद्ध कवयित्री और संस्कृतिकर्मी डॉ. कविता वाचक्नवी के हैदराबाद आगमन पर 'स्नेह मिलन और कविगोष्ठी' का आयोजन किया गया। आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी के अनुसंधान अधिकारी प्रो। बी। सत्यनारायण की अध्यक्षता में संपन्न इस समारोह में कवयित्री का सारस्वत सम्मान किया गया। सर्वप्रथम दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो। ऋषभ देव शर्मा ने अंगवस्त्र द्वारा मुख्य अतिथि डॉ।वाचक्नवी का स्वागत किया। तदुपरांत 'विश्वम्भरा' के संरक्षकद्वय चन्द्र मौलेश्वर प्रसाद और द्वारका प्रसाद मायछ ने स्मृति-चिह्न के रूप में नामांकित रजत पट्टिका प्रदान की। मित्रों, शुभचिंतकों और प्रशंसकों की ओर से कार्यक्रम की संयोजिका संपत देवी मुरारका ने सम्मानचिह्न और मुक्तामाल भेंट कीं तथा रचनाकारों की ओर से पुस्तकें और लेखन सामग्री प्रदान की गईं। 'आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी', 'उच्च शिक्षा और शोध संस्थान' तथा 'अहल्या' पत्रिका की ओर से भी कवयित्री का सम्मान किया गया। आत्मीय जन के स्नेह और आशीष को अत्यंत संकोच और विनम्रता से स्वीकार करती हुईं कविता जी काफी प्रसन्न दिख रही थीं।

डॉ. कविता वाचक्नवी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में विस्तार से इन्टरनेट के माध्यम से साहित्य, भाषा और संस्कृति की सेवा के कई गुर बताए और हमेशा की तरह उन लोगों को जी भर कर लताड़ा जो इस शक्तिशाली माध्यम का प्रयोग केवल अपनी छपास मिटाने के लिए करते हैं। खूब कविताएँ पढी-सुनी गईं। अध्यक्षता आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी के प्रो। बी। सत्यनारायण ने की।डॉ।राधे श्याम शुक्ल , प्रो. ऋषभ देव शर्मा, डॉ. कविता वाचक्नवी, विशेष अतिथि आर. शांता सुंदरी, संचालक डॉ.बी बालाजी, द्वारका प्रसाद मायछ, चन्द्र मौलेश्वर प्रसाद, प्रो.माणिक्याम्बा मणि, गोपाल कुमार, राजेश मुरारका, डॉ.बलविंदर कौर, डॉ.गोरखनाथ तिवारी, पवित्रा अग्रवाल , लक्ष्मीनारायण अग्रवाल, अशोक कुमार तिवारी, सीमा मिश्र, आर. एस. जी राव, डॉ.शशांक शुक्ल, ज्योति नारायण, गोविन्द मिश्र, विनीता शर्मा, डॉ।देवेन्द्र शर्मा, भगवान दास जोपट, तेजराज जैन, संपत देवी मुरारका , आशादेवी सोमाणी, डॉ.प्रभाकर त्रिपाठी, डॉ.श्रीनिवास राव, श्रीनिवास सोमाणी एवं प्रो.किशोरी लाल व्यास ने अपने काव्यपाठ और संबोधन द्वारा कार्यक्रम को सफल बनाया।

राष्ट्र-किंकर ने आयोजित किया संस्कृति सम्मान समारोह,2011


नई दिल्ली। दिल्ली में पड़ रही जबरदस्त ठण्ड के बावजूद हमेशा की तरह इस बार भी पश्चिम दिल्ली की जनकपुरी के साहित्य कला परिषद सभागार में देश-विदेश से पधारे विद्वानों ने भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाने का संकल्प भी लिया। अवसर था साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था राष्ट्र-किंकर द्वारा आयोजित संस्कृति सम्मान समारोह का। समारोह के मुख्य अतिथि गुजरात से पधारे स्वामी डॉ. गौरांगशरण देवाचार्य तथा दिल्ली के महापौर श्री पृथ्वीराज साहनी ने संस्कृति सम्मान प्रदान करते हुए भारतीय संस्कृति के विश्वव्यापी प्रभावों की चर्चा करते हुए उसे सर्वाधिक वैज्ञानिक बताया। उन्होंने युवाओं विशेष रूप से बढ़ते बच्चों पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया।

समारोह के अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के सिद्धहस्त शिल्पी श्री गिर्राजप्रसाद एवं विशिष्ट अतिथि दिल्ली सरकार की भोजपुरी अकादमी के माननीय सदस्य प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव व आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री ने अपने विशिष्ट अंदाज में स्वयं को तथाकथित मार्डन घोषित करने वालो तथा मीडिया के एक वर्ग द्वारा सांस्कृतिक प्रदूषण फैलाने की आलोचना करते हुए देश के बुद्धिजीवी वर्ग से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। इससे पूर्व गायत्री परिवार की शाखा भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के प्रदेश संयोजक श्री खैराती लाल सचदेवा ने प्रतिकूल मौसम के बावजूद देश के कोने से कोने से पधारे सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था के साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यों की जानकारी दी। राष्ट्र-किंकर एवं भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की ओर से हर वर्ष मकर-संक्रांति के अवसर प्रदान किए जाने वाले संस्कृति सम्मान वैदिक विद्वान प्रो. डा. सुन्दरलाल कथूरिया, सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. देवेन्द्र आर्य, डा. शरदनारायण खरे, गुजरात के महंत सुनीलदास, शिलांग के डॉ. अकेला भाई, छात्र शक्ति के श्री दिनेश शर्मा, सेवा भारती के श्री ओमप्रकाश मिश्र, साहिबगंज के श्री सत्येन्द्र पाण्डेय को प्रदान किया गया। दिल्ली में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में सर्वाधिक भागीदारी करने वाले तीन विद्यालयों मोहनगार्डन के कमल मॉडल स्कूल, हस्तसाल के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तथा नागलोई के डी.एस.एम.सी.सै.स्कूल को यह सम्मान प्रदान किया गया। नोएडा के श्री ओ.पी.मुंझाल, झुंझुनू के डॉ. भरतसिंह प्राची, दिल्ली की श्रीमती सुषमा भंडारी, देवबंद के लोकेश वत्स और विजेन्द्र कश्यप, मेरठ के फ़ख़रे आलम को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए साहित्य किंकर सम्मान तथा पत्रकार श्री ओमवीर सिंह को पंचवटी पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत किया गया। समारोह के दौरान राष्ट्र-किंकर द्वारा दिल्ली के सर्वश्री अखिलेश द्विवेदी, किशोर श्रीवास्तव एवं देवबंद के डा. शमीम देवबंदी को विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर द्वारा प्रदत्त भाषा रत्न सहित विभिन्न मानद उपाधियों से भी सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर एक कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया जिसमें अपनी काव्य रचनाओं व हास्य से समा बांधाने वालों में सर्वश्री महेन्द्रपाल काम्बोज, श्रीगोपाल नारसन (रूड़की), डा. सुरजीत सिंह जोबन, श्रीमती सुषमा भंडारी, नंदलाल रसिक, रशीद सैदपुरी, श्रीमती शोभा रस्तौगी एवं किशोर श्रीवास्तव (दिल्ली) आदि प्रमुख थे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीपयज्ञ के पश्चात रेड रोज पब्लिक स्कूल रामापार्क के नन्हें-मुन्ने बच्चों द्वारा वंदेमातरम् से हुआ। कार्यक्रम का अत्यन्त रोचक, ज्ञानवर्द्धक व मनोरंजक संचालन राष्ट्र-किंकर के संपादक श्री विनोद बब्बर ने किया और इसमें उनका साथ दिया योगकिंकर के संपादक दर्शनकुमार एवं यथासंभव के मुनीष गोयल ने। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए श्री अम्बरीश कुमार ने मकर संक्रांति के ऐतिहासिक-पौराणिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने भीष्म पितामह द्वारा उत्तरायण की प्रतीक्षा, स्वामी विवेकानंद के जन्म, मुक्तसर पंजाब के गुरु गोविंद सिंह से जुड़े प्रसंगों की चर्चा कर खचाखच भरे सभागार को रोमांचित कर दिया। सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर श्याम प्रसाद ने पिछले वर्ष के समारोह का एक दुर्लभ चित्र कार्यक्रम संयोजक विनोद बब्बर को भेंट किया।

प्रस्तुतिः लाल बिहारी लाल, मीडिया प्रभारी, नई दिल्ली

हिन्दी चिट्ठाकारिता का एक नया कीर्तिमान

अविनाश वाचस्पति और गिरीश बिल्लौरे मुकुल के नाम
रविवार 9 जनवरी 2011 का दिन हिन्दी चिट्ठाकारिता - सम्मेलन के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। इस दिन खटीमा (उत्त राखंड) में हिन्दी चिट्ठाकारों के सम्मेलन का जीवंत प्रसारण इंटरनेट के जरिए पूरे विश्व में सफलतापूर्वक विभिन्न एग्रीगेटर्स, विशेषरूप से ब्लॉगप्रहरी (दिल्ली), सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक, ट्विटर, गूगल-बज्ज आदि के जरिये किया गया।

हिन्दी ब्लॉगरों के सम्मेलनीय स्वरूप को चहुं ओर इसकी सकारात्मकता के साथ प्रवाहित करने वाले चर्चित ब्लॉ्ग नुक्कड़ के लेखक और चिट्ठाकार, साहित्यकार, व्यंग्यकार अविनाश वाचस्पति ने जबलपुर के जानेमान चिट्ठाकार गिरीश बिल्लौरे ‘मुकुल’ के साथ मिलकर इन पलों को पूरे विश्व में प्रसारित करके ऐतिहासिक बना दिया है। इससे साबित होता है कि धुन के धनी जब चाहते हैं तो प्रत्येरक परिस्थिति को अपने अनुकूल बना नेक कार्यों को सर्वोत्तम अंजाम तक पहुँचा देते हैं। इस अवसर पर साहित्य शारदा मंच के तत्वावधान में उत्तराखंड स्थित खटीमा के चिट्ठाकार, कवि डॉ. रूपचन्द्रर शास्त्री ‘मयंक’ की दो पुस्‍तकों- सुख का सूरज और नन्हें सुमन का लोकार्पण डॉ. इन्द्रराम, सेवानिवृत्ता प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय काशीपुर के कर कमलों द्वारा किया गया । अविनाश वाचस्पति जी इस समारोह के मुख्यस अतिथि रहे। एक साथ कई पायदानों पर सफलतापूर्वक सफर करने वाले अविनाश वाचस्पसति और गिरीश बिल्लौतरे के इस कारनामे का, हिन्दी चिट्ठा विधा के चितेरे करोड़ों दर्शकों ने लगातार 6 घंटे तक भरपूर आनंद लिया और इसके साक्षी बने।

इस संबंध में यह भी उल्लेखनीय है कि इस जीवंत प्रसारण को अब भी http://bambuser.com/channel/girishbillore/broadcast/1313259 पर देखा और सुना जा रहा है। इसे टीम वर्क का अन्यnतम उदाहरण बतलाते हुए अविनाश वाचस्प ति ने इसका श्रेय जबलपुर के गिरीश बिल्लौ्रे, दिल्लीह के पद्मसिंह के उनमें अपने प्रति विश्वापस के नाम करते हुए कहा है कि इस सजीव प्रसारण से हिन्दी ब्लॉ्गिंग के शिखर पर पहुंचने के प्रयासों में अभूतपूर्व तेजी देखने में आएगी।

इस अवसर पर खटीमा में मौजूद रहे, प्रख्यात हिदी चिट्ठाकार लखनऊ के रवींद्र प्रभात (परिकल्पना) , दिल्ली के पवन चंदन (चौखट) , राजीव तनेजा (हंसते रहो) , धर्मशाला के केवलराम (चलते चलते), बाराबंकी के रणधीर सिंह सुमन (लोकसंघर्ष) , खटीमा के रावेन्द्र कुमार रवि, डॉ. सिद्धेश्वर सिंह और आसपास के क्षेत्रों यथा बरेली, पीलीभीत, हल्द्वानी इत्यादि के साहित्यपकार, कवि, प्रोफेसरों और हिन्दी चिट्ठाजगत के प्रेमियों सोहन लाल मधुप, बेतिया से मनोज कुमार पाण्डेय (मंगलायतन) ,शिवशंकर यजुर्वेदी, किच्छा से नबी अहमद मंसूरी, लालकुऑ (नैनीताल) से श्रीमती आशा शैली हिमांचली, आनन्द गोपाल सिंह बिष्ट, रामनगर (नैनीताल) से सगीर अशरफ, जमीला सगीर, टनकपुर से रामदेव आर्य, चक्रधरपति त्रिपाठी, पीलीभीत से श्री देवदत्त प्रसून, अविनाश मिश्र, डॉ. अशोक शर्मा, लखीमपुर खीरी से डॉ. सुनील दत्त, बाराबंकी से अब्दुल मुईद, पन्तनगर से लालबुटी प्रजापति, सतीश चन्द्र, मेढ़ाईलाल, रंगलाल प्रजापति, नानकमता से जवाहर लाल, सरदार स्वर्ण सिंह, खटीमा से सतपाल बत्रा, पी. एन. सक्सेना, डॉ. गंगाधर राय, सतीश चन्द्र गुप्ता, वीरेन्द्र कुमार टण्डन आदि उल्लेखनीय हैं। कार्यक्रम का संचालन श्री रावेन्द्र कुमार रवि द्वारा किया गया।

प्रेषक : नुक्कड़ संपादकीय टीम।

जगदीप सिंह दाँगी पुरस्कृत


लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज युवा कम्प्यूटर इंजीनियर जगदीप सिंह दाँगी को इस वर्ष का राष्ट्रीय पुरस्कार "आउटस्टैन्डिंग यंग पर्सन ऑफ़ इंडिया - 2010" प्रदान किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिये विज्ञान एवम् तकनीक श्रेणी में प्रदान किया गया है। उक्त पुरस्कार श्री दाँगी को दिनाँक 28 दिसम्बर को विशाखापटनम में आयोजित जेसीआई नेटकॉन 2010 राष्ट्रीय समारोह में जेसीआई इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेसी संतोष कुमार पी. ने प्रदान किया। इस अवसर पर देश के विभिन्न प्रांतों से आये हुए लगभग ढाई हजार जेसीआई प्रतिनिधि उपस्थित थे। यह पुरस्कार राष्ट्रीय स्तर पर दस विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले युवाओं को प्रदान किये गये। इस वर्ष यह पुरस्कार श्री दाँगी के अतिरिक्त, चिकित्सा के क्षेत्र में प्रसिद्ध कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. शलिमा आर गौतम एवम् सीएनएन टॉप टेन हीरो श्री कृष्णन नारायन्न मदुराई सहित अन्य छह व्यक्तियों को प्रदान किये गये हैं। अन्तर्राष्ट्रीय संस्था जेसीआई द्वारा हर वर्ष ये पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं। इसके पूर्व इस पुरस्कार को पाने वाले श्रेष्ठ युवाओं में प्रसिद्ध क्रिकेटर सचिन तेनडुलकर, कपिल देव, सुनील गावस्कर, पीटी ऊषा आदि हैं।

मध्य-प्रदेश के गंजबासौदा में जन्मे जगदीप सिंह दाँगी ने कम्प्यूटर के क्षेत्र में हिन्दी के विकास में उल्लेखनीय कार्य किया है। यह पुरस्कार उनके प्रथम हिन्दी सॉफ़्ट्वेयर एक्सप्लोरर आई-ब्राउजर++, प्रखर फ़ॉन्ट परिवर्तक, यूनिदेव, शब्द-अनुवादक, शब्द-ज्ञान आदि सॉफ़्ट्वेयर के लिये प्रदान किया गया है। इन्हें पूर्व में भी अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है कंप्यूटर के क्षेत्र में केबिन केयर एविलिटी फ़ाउंडेशन ने जगदीप सिंह दाँगी को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार और एक लाख रूपये की राशि के साथ-साथ वर्ष 2008 का मास्टरी अवार्ड प्रदान किया। वे वर्तमान में अटल बिहारी वाजपेयी - भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवम् प्रबंधन संस्थान ग्वालियर में वैज्ञानिक/इंजीनियर के पद पर रह कर हिन्दी सॉफ़्ट्वेयर के क्षेत्र में लगे हुए हैं।

पंकज सुबीर को वर्ष २०१० का ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार


युवा कथाकार पंकज सुबीर को उपन्यास ये वो सहर तो नहीं के लिये वर्ष 2010 का ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार प्रदान किया गया । भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा दिल्ली पुस्तक मेले में 29 दिसंबर को आयोजित कार्यक्रम में शीर्ष आलोचक डॉ नामवर सिंह की अध्यक्षता, वरिष्ठ कथाकार श्रीमती चित्रा मुदगल के मुख्य आतिथ्य तथा डॉ विजय मोहन सिंह, श्री रवीन्द्र कालिया, कथाकार श्री अखिलेश, श्रीमती ममता कालिया, कवि दिनेश शुक्ली की उपस्थिति में 31000 रुपये तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया ।

आलोक श्रीवास्तव को रूस का अंतर्राष्ट्रीय पूश्किन सम्मान


मास्को। हिन्दी के जाने-माने कवि आलोक श्रीवास्तव को उनकी पुस्तक 'आमीन' के लिए रूस का अंतरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है। रूस के ‘भारत मित्र' समाज द्वारा प्रतिवर्ष हिन्दी के एक प्रसिद्ध कवि या लेखक को मास्को में हिन्दी-साहित्य का यह महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मान दिया जाता है। पिछले तीन वर्ष से इस सम्मान की घोषणा नहीं की गई थी। लिहाज़ा हाल के वर्षों में प्रकाशित हिंदी की चर्चित-पुस्तकों का जायज़ा लेने के बाद सम्मान-समिति ने आलोक श्रीवास्तव के ग़ज़ल-संग्रह 'आमीन' को अंतर्राष्ट्रीय पूश्किन सम्मान, वर्ष 2008' देने का निर्णय लिया है। आलोक को यह सम्मान जल्द ही मास्को में आयोजित होने वाले एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम में दिया जाएगा। लगभग दो दशक से लेखन-क्षेत्र में सक्रिए आलोक श्रीवास्तव की रचनाएं हिन्दी-साहित्य की सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। वे फ़िल्म और टेलीविजन धारावाहिकों में लेखन-कार्य भी करते रहे हैं और उनकी ग़ज़लों व नज़्मों को जगजीत सिंह और शुभा मुद्गल जैसे कई ख्यातनाम गायक अपनी आवाज़ दे चुके हैं। ग़ज़ल-संग्रह 'आमीन' के लिए आलोक को मप्र साहित्य अकादमी का 'दुष्यंत कुमार पुरस्कार', 'हेमंत स्मृति कविता सम्मान' और 'परंपरा ऋतुराज सम्मान' जैसे कई प्रतिष्ठित साहित्यिक-सम्मान मिल चुके हैं लेकिन वे हिंदी के पहले ऐसे युवा ग़ज़लकार हैं जिन्हें रूस का यह महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त होगा।

'भारत मित्र' समाज के महासचिव अनिल जनविजय ने मास्को से जारी विज्ञप्ति में यह सूचना दी है। प्रसिद्ध रूसी कवि अलेक्सान्दर सेंकेविच की अध्यक्षता में हिन्दी-रूसी साहित्य के मूर्धन्य कवि-लेखकों व अध्येता-विद्वानों की पांच सदस्यीय निर्णायक-समिति ने आलोक श्रीवास्तव को वर्ष 2008 के अंतर्राष्ट्रीय पूश्किन सम्मान के लिए चुना है। निर्णायक-समिति में हिन्दी साहित्य की प्रसिद्ध रूसी अध्येता व विद्वान ल्युदमीला ख़ख़लोवा, रूसी कवि अनातोली पारपरा, कवयित्री अनस्तसीया गूरिया, कवि सेर्गेय स्त्रोकन और लेखक व पत्रकार स्वेतलाना कुज्मिना शामिल थे। सम्मान के अन्तर्गत आलोक को पन्द्रह दिवस की रूस-यात्रा पर बुलाया जाएगा और उन्हें मास्को, सेंट पीटर्सबर्ग आदि नगरों की साहित्यिक-यात्रा कराई जाएगी। यात्रा के दौरान रूस के कवियों, लेखकों और बुद्धिजीवियों के साथ आलोक की भेंट कराई जाएगी और साथ ही रूस स्थित 'भारत मित्र' समाज आलोक श्रीवास्तव की प्रतिनिधि रचनाओं का रूसी भाषा में अनुवाद प्रकाशित करेगा। आलोक से पहले यह सम्मान कवि उदयप्रकाश, लीलाधर मंडलोई, पवन करण, बुद्धिनाथ मिश्र, कहानीकार हरि भटनागर और महेश दर्पण आदि को दिया जा चुका है। पेशे से टीवी पत्रकार आलोक श्रीवास्तव इन दिनों दिल्ली में रहते हैं।

रूस स्थित ’भारत मित्र’ समाज द्वारा 01 जनवरी 2011 को प्रेस के लिए जारी विज्ञप्ति ।

कला समीक्षक मनमोहन सरल को वर्णपट सम्मान


उज्जैन स्थित कलावर्त न्यास द्वारा १५वे राष्ट्रीय कला उत्सव में कला समीक्षक मनमोहन सरल को राष्ट्रीय वर्णपट अलंकरण प्रदान किया गया। सम्मान पट्टिका में लिखा गया- "निशित समीक्षा के माध्यम से समीक्षा विधा को नए आयाम देते हुए कला को समाजोन्मुखी दिशा प्रदान करने का आपका प्रयास वन्दनीय है ।एत्दर्थ कलावर्त न्यास आपको राष्ट्रीय वर्णपट अलंकरण से विभूषित करता है।"

विशेष रूप से आयोजित समारोह में अनेक चित्रकार,कलाप्रेमियों और विशिष्ट जन के विशाल उपस्थिति में यह सम्मान प्रदान किया गया, शाल, श्रीफल प्रशसती पत्र और दस हजार रूपये की राशी भी दी गयी। इस कला पर्व में देश भर के कला विद्यालयों के ३५० छात्र, उनके शिक्षक एवं विदेशी अतिथि शामिल हुए। यह कला वर्ष १५ वर्षों से अनवरत संपन्न हो रहा है।

जितेन्द्र ‘जौहर’ को वर्ष-२०१० का ‘सृजन-सम्मान’


रॉबर्ट्सरगंज (सोनभद्र, उप्र, भारत) २३ दिसम्बर,२०१० को स्थानीय विवेकानन्द प्रेक्षागृह में हिन्दी दैनिक ‘बहुजन परिवार’ के स्थापना-दिवस एवं अंग्रेज़ी दैनिक ‘सोनभद्र कॉलिंग’ के विमोचन समारोह के संयुक्त अवसर पर ‘प्रेरणा’ (त्रैमा) के संपादकीय सलाहकार एवं सुपरिचित कवि श्री जितेन्द्र ‘जौहर’ को साहित्यिक योगदान के लिए वर्ष-२०१० के द्वितीय ‘सृजन-सम्मान’ से अलंकृत किया गया। श्री ‘जौहर’ को यह सम्मान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सोनभद्र के उप ज़िलाधिकारी श्री त्रिलोकी सिंह एवं विशिष्ट अतिथि बेसिक शिक्षाधिकारी श्री राजेश कुमार सिंह के साथ वरिष्ठ साहित्यकार पं. अजय शेखर तथा देश के ख्यातिलब्ध बुज़ुर्ग शाइर व ‘यथार्थ गीता’ के उर्दू मुतर्जिम मुनीर बख़्श आलम साहब के कर-कमलों द्वारा प्रदान किया गया।

कन्नौज (उप्र) में जन्मे श्री जितेन्द्र ‘जौहर’ ने देश-विदेश की 200-250 पत्र-पत्रिकाओं, वीडियो एलबम, वेब-पत्रिकाओं, ब्लॉग्ज़, न्यूज़-पोर्टल्ज़ पर अपने उत्कृष्ट चिंतनप्रधान मौलिक लेखन तथा समीक्षाओं के साथ ही टेलीविज़न, आकाशवाणी एवं काव्य-मंचों पर ओजस्वी व मर्यादित हास्य-व्यंग्यपरक रचनाओं की प्रस्तुतियों व मंच-संचालन के माध्यम से जनपद सोनभद्र की महत्त्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज करायी है। अभी हाल ही में देश की लोकप्रिय साहित्यिक-सांस्कृतिक त्रैमासिक पत्रिका ‘सरस्वती सुमन’(देहरादून) ने उन्हें अपने आगामी ‘मुक्तक/रुबाई विशेषांक’ का अतिथि संपादक मनोनीत किया है। वे देश की प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका ‘अभिनव प्रयास’ (अलीगढ़) के सहयोगी भी हैं। पेशे से अंग्रेज़ी विषय के प्रतिभा-सम्पन्न अध्यापक श्री जितेन्द्र जौहर के हिन्दी-प्रेम की सर्वत्र सराहना होती रही है। उन्होंने देश के विभिन्न विद्यालयों-महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं, आदि द्वारा आयोजित महत्त्वपूर्ण विषयों पर अनेकानेक कार्यशालाओं में प्रभावशाली भागीदारी निभाते हुए शैक्षिक योगदान भी दिया है। समारोह के इस अवसर पर ‘भ्रष्टाचार और पत्रकारिता’विषय पर आयोजित एक विचार-गोष्ठी में जनपद के वरिष्ठ साहित्यकारों सर्व श्री मुनीर बख़्श आलम, पं. अजय शेखर, पत्रकार विजय विनीत, विमल जालान, डॉ. अर्जुन दास केसरी, कथाकार रामनाथ शिवेन्द्र एवं महाकाल समाचार के संपादक श्रीवास्तव जी,सहित अनेक वरिष्ठ पत्रकारों तथा साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कविवर श्री जितेन्द्र ‘जौहर’ को बधाई दी। संपादक श्री आशुतोष चौबे ने अपने जोशीले उद्‌बोधन में भ्रष्टाचार के कतिपय पहलुओं पर प्रमाण-सम्मत प्रकाश डाला। उन्होंने समस्त पाठकों व नागरिकों के अपनत्व के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए निष्पक्ष तथा निर्भीक पत्रकारिता के साथ ही उच्च गुणवत्तायुक्त वैचारिक सामग्री के प्रकाशन का वादा किया।

इस अवसर पर भोजपुरी के वरिष्ठ गीतकार श्री जगदीश पंथी को सम्मानित करने के अतिरिक्त समाचार-पत्र द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्य अतिथि ने ट्रॉफी व प्रमाण-पत्र देकर पुरस्कृत किया। हिन्दी दैनिक ‘बहुजन परिवार’ तथा अंग्रेज़ी दैनिक ‘सोनभद्र कॉलिंग’ के संपादक श्री अभिषेक चौबे के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का सफल संयोजन बूरो चीफ़ श्री ब्रजेश कुमार पाठक एवं टीम ने तथा संचालन आशुतोष पाण्डेय ‘मुन्ना’ ने किया। उक्त अवसर पर एबीआई कॉलेज की हिन्दी प्रवक्ता श्रीमती सुशीला चौबे और जेसीज बालभवन की हेड मिस्ट्रेस डॉ. विभा दुबे सहित भारी संख्या में जनपद के पत्रकार, वरिष्ठ साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
प्रस्तुति : विजय कुमार ‘तन्हा’