सोमवार, 27 दिसंबर 2010

सुशील 'हसरत` नरेलवी के काव्य संग्रह ''कुवार की धूप`` का लोकार्पण व कवि सम्मेलन


चण्डीगढ़ दिनांक : २१/११/२०१०, भारतीय साहित्य परिषद, मोहाली के सौजन्य से एवं 'सर्वेंटस ऑफ पीपल्स सोसाइटी`, चण्डीगढ़ के तत्वाधान में एक बहुभाषीय कवि सम्मेलन का आयोजन व कवि सुशील 'हसरत` नरेलवी के काव्य संग्रह ''कुवार की धूप`` का विमोचन समारोह लाजपत राय भवन, सैक्टर १५, में सम्पन्न हुआ। अमर शहीद लाला लाजपत राय जी की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार वीरेन्द्र मेंहदीरत्ता, अध्यक्ष प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ० रमेश कुंतल मेघ तथा मंच संचालक सुप्रसिद्ध शायर जय गोपाल 'अश्क` अमृतसरी रहे।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में अमर शहीद लाला लाजपत राय जी को पुष्पांजलि अर्पित की गई, श्री औंकार चन्द जी ने देश की आज़ादी में उनके योगदान का स्मरण कराया, सुशील 'हसरत` नरेलवी के काव्य संग्रह ''कुवार की धूप`` का लोकार्पण किया गया और फिर सुशील 'हसरत` नरेलवी ने अपने काव्य संग्रह से कविताएँ पढ़कर सुनाईं, जिन्हें भरपूर सराहना मिली।

काव्य संग्रह पर डॉ० प्रदीप शर्मा 'स्नेही`, अम्बाला, तथा डॉ सुभाष रस्तोगी, चण्डीगढ़ ने ने अपने पर्चे पढ़े। अध्यक्षीय टिप्पणी करते हुए सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ० रमेश कुंतल मेघ ने कहा कि ''सुशील 'हसरत` नरेलवी के काव्य संग्रह 'कुवार की धूप` में ग्रामीण आंचलिकता शामिल है जो कि उनकी कविता को आम चलन से हटाकर एक ऐसा आयाम देती है जो डॉ० भारतेन्दु सरीखे कवियों की रचनाओं में रचता-बसता था। इस संग्रह की कविताओं ने गाँव, माँ, रिश्तों, सामाजिक विद्रूपता एवं अन्य विषयों को गहराई से छुआ है।

समारोह के दूसरे भाग में अमर शहीद लाला लाजपत राय जी की याद में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें सुप्रसिद्ध शायर पूर्ण 'एहसान` पठानकोट से, ग़़जलकार जय गोपाल 'अश्क` अमृतसरी, कवयित्री सुशील बंसल 'शील`, कवयित्री, उर्मिला कौशिक 'सखी`, पवन 'मुंतज़िर`, कवयित्री शशि कौशल, ग़़जलकार चमन लाल 'चमन`, ग़़जलकार अमरजीत 'अमर`, ग़़जलकार एस०एल० धवन 'कमल`, कवि दीपक खेतरपाल, कवि मदन शर्मा 'राकेश`, राजेश 'पंकज`, कवि जोगिन्द्र सिंह, ग़जलकार एस० एल० कौशल, आर० के० भगत, कवि पवन बतरा, सन्नी चन्देल, राजन 'गऱीब`, महेंद्र, विजय कपूर, सुनील बरनालवी व अन्य कवियों ने भाग लिया।

राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय संयोजक जगदीश मितल, डॉ० राधेश्याम शर्मा, पूर्व निदेशक, हरियाणा साहित्य अकादमी, वरिष्ठ कथाकार डा० इन्दु बाली, कथाकार डॉ० कन्नौजिया, एन० एस० रत्न, समाज सेवी सुरेन्द्र शर्मा, पन्नु परवाज़, डा० अशोक कुमार, सी० आर० मुदगिल, डॉ० गार्गी, डॉ० डी० एस० गुप्त, उपन्यासकार ओ० पी० सौंधी, कथाकार जगमोहन कौर, कथाकार मदन शर्मा 'राकेश`, कथाकार मोती राम, संन्तोष गुप्ता, देव भारद्वाज, नरेन्द्र 'नाज़` डॉ० राजकुमार, प्रेम विज, डॉ० शशि प्रभा, अनन्त शर्मा 'अनन्त`, नरेन्द्र आर्य आदि साहित्यकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अन्त में, आयोजक संस्था ने मंचासीन महानुभावों, पधारे हुए साहित्यकारों, साहित्य प्रेमियों व श्रोतागणों का आभार प्रकट किया।

प्रेम जनमेजय आचार्य निरंजननाथ सम्मान से सम्मानित


राजसमंद। साहित्यिक पत्रिका 'संबोधन` द्वारा अणुव्रत विश्वभारती सभागार में आयोजित भव्य समारोह में सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय को उनकी कृति 'कौन कुटिल खल कामी` के लिए आचार्य निरंजननाथ सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान समिति के अध्यक्ष कर्नल देशबंधु आचार्य ने जनमेजय को सम्मान राशि २५ हजार रुपए, मधुसूदन पांडया ने शॅल एवं श्रीफल, विष्णु नागर ने स्मृति चिह्न, अध्यक्ष जीतमल कच्छारा ने मेवाड़ी पाग, डॉ० भगवतीलाल व्यास ने प्रशस्ति पत्र, समारोह संयोजक कमर मेवाड़ी ने साहित्य एवं एम डी कनोरिया ने श्री जी का बीड़ा भेंट कर सम्मानित किया।

समारोह एवं पुरस्कार समिति के संयोजक सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री कमर मेवाड़ी ने सम्मान चयन की निष्पक्ष प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने सम्मानित साहित्यकार प्रेम जनमेजय के साहित्यिक योगदान को रेखांकित किया तथा 'कौन कुटिल खामी` की व्यंग्य रचनाओं सशक्तता पर प्रकाश डाला। नरेंद्र निर्मल ने, इस अवसर पर नंद चतुर्वेदी के बधाई संदेश का वाचन किया। अफजल खां अफजल ने डॉ० प्रेम जनमेजय का विस्तृत परिचय दिया। इस अवसर पर श्रीमती सुधा आचार्य की प्रथम काव्य कृति का भी लोकार्पण विष्णु नागर ने किया। श्रीमती आचार्य ने अपनी चुनिंदा रचनाओं का पाठ किया।

सम्मानित साहित्यकार प्रेम जनमेजय ने कहा कि व्यंग्य लिखना एक दायित्वपूर्ण कर्म है। उसे सचेत होकर विवेकपूर्ण व्यंग्य करना चाहिए। वंचितों पर कभी भी व्यंग्य नहीं करना चाहिए। साहित्य मानव समाज की निरंतर बेहतरी के लिए लिखा जाता है। आज व्यंग्य के उपमान मैले हो गए हैं। राजनीति पर लिखे गए व्यंग्य अभिधा से गंधाने लगे हैं। आज आवश्यक्ता है बदलते हुए समाज में बाजारवाद के कारण उपजी विसंगतियों पर प्रहार करने की। प्रेम जनमेजय ने साहित्य के क्षेत्र में 'संबोधन` ४५ वर्षों के योगदान को विशिष्टि रूप से योगदान कमर मेवाड़ी के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने सुझाव दिया कि अगला वर्ष आचार्य निरंजननाथ का शताब्दी वर्ष है अत: इस अवसर पर उनकी अप्रकाशित तथा प्रकाशित रचनाओं को एक स्थान पर संकलित कर प्रकाशित किया जाए। प्रेम जनमेजय ने इस सम्मान को प्रतिष्ठापूर्ण बताया। इस अवसर पर प्रेम जनमेजय ने अपना व्यंग्य ' वसंत, तुम कहां हो` भी पढ़ा।

समारोह के मुख्य अतिथि एवं पुरस्कार समिति के सदस्य श्री विष्णु नागर ने कहा कि निरंजननाथ आचार्य सहज व्यक्तित्व के धनी एवं आमजन से गहरी सहानुभूति रखने वाले व्यक्तित्व थे। वे उस पंरपरा के आखिरी संवाहक थे जिन्होंने राजनीति एवं साहित्य के बीच संतुलन बनाए रखा। श्री विष्णु नागर ने कहा कि प्रेम जनमेजय की अपनी व्यंग्य रचनाओं में आत्म व्यंग्य करने से कभी चूकते नहीं हैं। उन्होंने 'कौन कुटिल खल कामी` की रचनाओं की पठनीयता को रेखांकित करते हुए कहा कि इनमे आज के बदलते सामाजिक परिवेश की विसंगतियों पर सार्थक प्रहार हैं। विष्णु नागर ने लघु पत्रिकाओं के प्रकाशन के संकट की चर्चा करते हुए संबोधन की ४५ वर्षों की निरंतरता की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने साहित्य के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज का समय पढ़ने-खिने से दुश्मनी का समय है। तब शब्द की सत्ता की परवाह कौन करता है। रचनाकार के लिए यह संकट का समय है। डॉ० भगवतीलाल व्यास ने व्यंग्य साहित्य में प्रेम जनमेजय की विशिष्टता की चर्चा की तथा 'व्यंग्य यात्रा` के महत्व को रेखांकित किया।

सम्मान समारोह के अध्यक्ष कर्नल देशबंधु आचार्य ने कहा कि जन्म शताब्दी के अवसर पर एक ग्रंथ प्रकाशित किया जाएगा एवं विविध आयोजनों के प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंनें अपने पिता के अनेक संस्मरण भी सुनाए।उन्होंने अगले वर्ष पुरस्कार राशि बढ़ाकार ३१ हजार करने की तथा अगले वर्ष से किसी भी विधा की प्रथम कृति को ११ हजार रुपए का पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की। कार्यक्रम का सफल संचालन श्री नरेंद्र निर्मल ने किया।

प्रस्तुति: नरेंद्र निर्मल

अविनाश वाचस्पति सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा सम्मानित


प्रख्यात हिन्दी व्यंग्यकार और साहित्याकार-ब्लॉगर अविनाश वाचस्परति को सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने हिन्दी साहित्य सम्मान से सम्मा‍नित करने का निर्णय लिया है। अविनाश वाचस्पति को यह सम्मान राजभाषा पुरस्कार वितरण समारोह में माननीय सचिव प्रदान करेंगे। उन्हें यह सम्मान हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में किए जा रहे योगदान के लिए दिया जा रहा है। पत्र सूचना कार्यालय के शास्त्रीन भवन, नई दिल्लीक में स्थित सम्मेएलन कक्ष में वर्ष २००८ - २००९ के लिए पुरस्का्रों का वितरण बुधवार दिनांक १५ दिसम्बर २०१० को किया जायेगा।

अंतर्जाल पर हिन्दी के लिए किया गया उनका कार्य किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे सामूहिक वेबसाइट नुक्कड़ के मॉडरेटर हैं, जिससे विश्व भर के एक सौ प्रतिष्ठित हिन्दी लेखक जुड़े हुए हैं। इसके अतिरिक्त उनके ब्लॉग पिताजी, बगीची, झकाझक टाइम्सत, तेताला अंतर्जाल जगत में अपनी विशिष्ट‍ पहचान रखते हैं। उन्हें देश भर में नेशनल और इंटरनेशनल ब्लॉगगर सम्मेलन आयोजन कराने का श्रेय दिया जाता है। मुंबई, दिल्ली, जयपुर, आगरा इत्यानदि शहरों में कराए गए उनके आयोजन अविस्मरणीय और हिन्दी के प्रचार/प्रसार में सहायक बने हैं। इंटरनेट पर हिन्दी के उनके निस्वार्थ सेवाभाव के कारण विश्वभर में उनके करोड़ों प्रशंसक मौजूद हैं।

अविनाश वाचस्पति ने भारतीय जन संचार संस्थान से 'संचार परिचय', तथा ‘हिंदी पत्रकारिता पाठ्यक्रम’ में प्रशिक्षण लिया है। व्यंग्य, कविता एवं फ़िल्म लेखन उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। सैंकड़ों पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। जिनमें नवभारत टाइम्‍स, हिन्‍दुस्‍तान, जनसत्‍ता, भास्‍कर, नई दुनिया, राष्‍ट्रीय सहारा, अमर उजाला, सन्मार्ग, हरिभूमि, अहा जिंदगी, स्‍क्रीनवर्ल्‍ड, मिलाप, वीर अर्जुन, डीएलए, साप्‍ताहिक हिन्‍दुस्‍तान, व्‍यंग्‍ययात्रा, आई नैक्‍स्‍ट, गगनांचल इत्‍यादि और जयपुर की अहा जिंदगी मासिक उल्लेीखनीय हैं। वे सोपानस्टेप मासिक और डीएलए दैनिक में नियमित रूप से व्यंग्य स्तंभ लिख रहे हैं। उन्होंने वर्ष २००८, २००९ और वर्ष २०१० में यमुनानगर, हरियाणा में आयोजित हरियाणा अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोहों में फिल्‍मोत्‍सव समाचार का तकनीकी संपादन किया है।

हरियाणवी फ़ीचर फ़िल्मों 'गुलाबो', 'छोटी साली' और 'ज़र, जोरू और ज़मीन' में प्रचार और जन-संपर्क तथा नेत्रदान पर बनी हिंदी टेली फ़िल्म 'ज्योति संकल्प' में सहायक निर्देशन किया है। राष्ट्रभाषा नव-साहित्यकार परिषद और हरियाणवी फ़िल्म विकास परिषद के संस्थापकों में से एक। सामयिक साहित्यकार संगठन, दिल्ली तथा साहित्य कला भारती, दिल्ली में उपाध्यक्ष। केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद के आजीवन सदस्यि। 'साहित्यालंकार' , 'साहित्य दीप' उपाधियों और राष्ट्रीय हिंदी सेवी सहस्त्राब्दी सम्मान' तथा ‘कविता शिल्पील पुरस्कापर’ से सम्मानित। 'शहर में हैं सभी अंधे' स्वारचित काव्य रचनाओं का संकलन हिन्दीप अकादमी, दिल्लीक के सौजन्य से प्रकाशित हुआ है। काव्य संकलन 'तेताला' तथा 'नवें दशक के प्रगतिशील कवि’ कविता संकलन का संपादन किया है।

उन्हें वर्ष २००९ के लिए हास्‍य-व्‍यंग्‍य श्रेणी में ‘संवाद सम्‍मान’ भी दिया गया है। ‘लोकसंघर्ष परिकल्‍पना सम्‍मान’ के अंतर्गत २०१० में वर्ष के ‘श्रेष्‍ठ व्‍यंग्‍यकार सम्‍मान’ अगले वर्ष लखनऊ में आयोजित एक भव्या समारोह में प्रदान किया जाएगा।

‘सृजन’ ने किया डॉ टी महादेव राव की लघुकथा संकलन ’चुभते लम्हें’ का लोकार्पण


१२ दिसंबर २०१० को वि‍शाखपटनम की हि‍न्दी’ साहि‍त्या संस्थाल ‘सृजन’ ने बिल्ड्र्स एसोशयेशन सभागार में संथा के सचिव एवं प्रसिद्ध हिन्दीं सेवी साहित्य।कार डॉ टी महादेव राव रचित ‘चुभते लम्हे ’ लघुकथा संग्रह के लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ हिन्दी साहित्यकार और वरिष्ठ हिन्दी आचार्य प्रो पी आदेश्वरर राव और विशेष अतिथि वरिष्ठ हिन्दी आचार्य प्रो एस एम इकबाल थे। पुस्तक विमोचन करते हुए प्रो पी आदेश्वर राव ने कहा कि डॉ टी महादेव राव की रचनाओं में एक अलग तरह का प्रभाव है जिसे ‍‍‍फिर एक बार हम उनके इस लघुकथा संग्रह में पाते हैं। देखने में छोटे जरूर हैं पर इनमें गहन और गंभीर अभिव्यक्ति निहित है। उन्होंने इस लघुकथा संग्रह ‍को पठनीय और विचार मंथन करने के लिए विवश करता संग्रह कहा। उन्होंने पुस्तक परिचय करते हुए कहा कि आज का आदमी लंबी रचनायें पढने की स्थिति में नहीं है और ऐसे में ऐसी छोटी कहानियों का अपना अलग महत्व हो जाता है और महादेव राव की यह लघुकथा संग्रह पाठक को अच्छी तरह उद्वेलित करती हैं और छोटे होने के बावजूद गंभीर घाव करने का प्रभाव रखती हैं। उन्होंने डॉ टी महादेव राव को पुस्तक प्रकाशन और विमोचन पर और साथ ही ऐसे समर्पित लेखन पर बधाई दी। उन्हों ने सृजन संस्था को अच्छे साहित्त्यिक कार्यक्रमों के सफल आयोजन पर अपना साधुवाद दिया।

विशेष अतिथि प्रो एस एम इकबाल ने कहा कि चुभते लम्हेंत के द्वारा महादेव राव में निहित कवि, हिन्दी उर्दू पर समान अधिकार से लिखने वाले रचनाकार से हमारा परिचय होता है। उन्होंने लघुकथाओं को न केवल प्रभावी बताया बल्कि संवेदनशील लेखक की पैनी दृष्टि और सजीव चि‍त्रण बताया। उन्हों ने सृजन के सदस्योंं और कार्यक्रमों को हि‍न्दीे साहित्यर कों प्रेरित करने वाले कार्यक्रमों की संज्ञा दी। सबसे पहले स्वागत भाषण करते हुए संस्था् के संयुक्त सचिव डॉ संतोष अलेक्स ने आहुतों का स्वादगत किया और संस्था की गति‍वि‍धि‍यों का वि‍वरण प्रस्तु्त कि‍या। उन्होंने कहा कि सृजन सभी रचनाकारों के मार्गदर्शन और संबल के लिए लगातार तत्पर रहता है। उन्होंने पुस्तषक विमोचन के इस कार्यक्रम को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम कहा क्योंकि‍ लेखक की कृति को सजग पाठकों के सम्मुख लाया जाता है। डॉ अलेक्स ने डॉ महादेव राव को एक सजग साहित्यकार बताते हुए कहा कि उनके नये रूपों से उनकी रचनायें अवगत कराती हैं।



सृजन के अध्य।क्ष नीरव कुमार वर्मा ने कहा कि‍ साहि‍त्य का अर्थ है समाज का हि‍त चाहने वाला और समाज के प्रति‍ अपने कर्त्तव्यों और दायि‍त्वों के बारे में जानने वाला। कवि और लेखक अधि‍क जागरूक होते हैं अतः समाज के हि‍त में रचनाधर्मि‍ता अपनाने की आज के युग में आवश्ययकता है।‍ सभी रचनाकार ऐसी संस्था में आयेंगे और गुणवत्ता पूर्ण कार्यक्रम हम जो आयोजि‍त कर रहे हैं, उन्हें और अधि‍क स्तरीय बनाने में सहयोग करेंगे ऐसा मेरा वि‍श्वास है। डॉ टी महादेव राव की पुस्तक चुभते लम्हे में, आज के युग में मानवीयता जिन विषम परिस्थीतियों से गुजर रही है उसका लघुकथाओं के रूप में प्रभावी प्रस्तुति है। उन्होंने लघुकथाओं को समाज का वर्तमान की वि‍संगति‍यों का प्रतीक बताया। अंत में पुस्तंक के लेखक और संस्थात सृजन के सचिव डॉ टी महादेव राव ने सभी उपस्थितों को धन्यतवाद दिया और विशेषकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले वरिष्ठ साहित्यॉकारों और सभी साथियों का आभार माना। ज्ञातव्य है कि अब तक डॉ टी महादेव राव की गजल संग्रह ‘जज्बात के अक्षर’, कविता संकलन ‘ विकल्प की तलाश में’, शोध प्रबंध ‘ नई कविता के नाट्यकाव्यों में चरित्र सृष्टि’ और लेख संक्रलन ‘कश्मीर गाथा’ प्रकाशि‍त हो चुकी हैं और अभिव्यक्ति सहि‍त अनेक पत्र पत्रिकाओं में उनकी रचनायें प्रकाशित होती रहती हैं।
**** डॉ टी महादेव राव

विश्व हिन्दी न्यास की पत्रिका ‘हिन्दी जगत’ को विद्यनिवास मिश्र पुरस्कार

दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय पूर्वज साहित्यकारों की समृद्ध विरासत को सहेजने का एक विनम्र एवं गैरसरकारी प्रयास है। इस संग्रहालय में अनेक प्रख्यात एवं कालजयी साहित्यकारों की धरोहर संग्रहीत और सुरक्षित की जा रही है। संग्रहालय द्वारा प्रतिवर्ष भाषा और रचनात्मक गतिविधियों में संलग्न पत्रिकाओं को पुरस्कृत किये जाने का सिलसिला आरम्भ किया गया है। इस शृंखला में अब तक अनेक पत्र-पत्रिकाओं एवं संस्थाओं को पुरस्कृत किया जा चुका है।

इस वर्ष चयन समिति ने विश्व हिन्दी न्यास की पत्रिका ‘हिन्दी जगत’ को विद्यनिवास मिश्र पुरस्कार के लिए चुना है। संग्रहालय के स्थापना दिवस ३० दिसम्बर २०१० को भोपाल में आयोजित एक गरिमामय समारोह में पत्रिका के सम्पादक , प्रसिद्द कवि एवं वर्त्तमान में टोकियो विश्व विद्यालय , जापान में हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रोफ़ेसर . डा सुरेश ऋतुपर्ण को शाल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जायेगा।