मंगलवार, 31 अगस्त 2010

भारत-नार्वे लेखक सेमिनार

दिनांक १७ अगस्त, लिटरेचर हाउस, ओस्लो में भारतीय-नार्वेजीय लेखक सेमिनार सम्पन्न हुआ। सेमिनार का विषय था 'भारत नार्वे के मध्य साहित्यिक सम्बन्ध'। यह सेमिनार दो नोबेल साहित्य पुरस्कार विजेताओं 'रवीन्द्र नाथ टैगोर और ब्योर्नस्त्यार्ने ब्योर्नसन के विषय में था। टैगोर की १५० वीं जयन्ती और ब्योर्नसन की १०० वीं पुण्यतिथि इसी वर्ष है। 'रवीन्द्र नाथ टैगोर' और कबीर पर अपना व्याख्यान गुरूनानक देव विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हरमहेन्द्र सिंह बेदी ने दिया और विश्वकवि टैगोर पर अपना व्याख्यान दिया प्रो असीम दत्ताराय ने। राष्ट्रीय चेतना के नायक नार्वेजीय लेखक ब्योर्नस्त्यार्ने ब्योर्नसन पर अपना व्याख्यान दिया सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' ने। लघु पत्रिकाओं की साहित्य में भूमिका पर अपना व्याख्यान दिया विनोद बब्बर ने तथा गुरूमत का भारतीय साहित्य में योगदान पर अपना वक्तव्य दिया डा ग़ुरूनाम कौर ने। नार्वेजीय राजदूत आन ओल्लेस्ताद ने भारत में नार्वे के साहित्य के अनुवाद पर प्रकाश डालते हुए दोनो देशों के सांस्कृतिक सम्बन्धों पर प्रकाश डाला। भारतीय राजदूत ने भी भारत और नार्वे के मध्य सांस्कृतिक संबंधों के वृहत्तर होने की पुष्टि करते हुए २२ वर्ष पुरानी और नार्वे से प्रकाशित एक मात्र हिन्दी पत्रिका 'स्पाइल-दर्पण' तथा सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' के योगदान को दोनो देशों के मध्य साहित्यिक और सांश्कृतिक संबन्धों को मजबूत बनाने वाल बताया। पहले सत्र के बाद दूसरे सत्र में अनेक नार्वेजीय और प्रवासी कवियों ने अपनी कवितायें पढ़ीं जिन्हें बहुत सराहा गया।

नार्वे में भारतीय लेखक सम्मानित

इस सेमिनार के दो दिन पूर्व नार्वे में इण्डो नार्विजन इनफारमेशन एण्ड कल्चरल फोरम के तत्वाधान में १५ अगस्त को चिली संस्कृति केंन्द्र वाइतवेत, ओस्लो मेऋ २२वें अन्तराष्ट्रीय सांस्कृतिक समारोह में भारतीय लेखकों को हिन्दी सेवा के लिए पुरस्कृत किया गया। पुरस्कृत लेखकों में बालशौरि रेडडी, प्रो हरमहोन्द्र सिंह बेदी, राष्ट्रकिंकर के सम्पादक विनोद ब्ब्बर, डा ग़ुरूनाम कौर, यालमार शेलान को भारतीय दूतावास के दिनेश कुमार नन्दा, पी ब़ालाचन्द्रन और डिस्ट्रिक्ट के मेयर थूरस्ताइन विंगेर ने प्रदान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता फोरम के अध्यक्ष सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' ने की। कार्यक्रम में हिन्दी स्कूल के बच्चों ने हिन्दी और संस्कृत में गायत्री मन्त्र और राष्ट्रगान गाया जिसे बहुत पसन्द किया गया। भारतीय, श्रीलंका एवं चिली के कलाकारों ने अपने-अपने देशों के लोकनृत्य प्रस्तुत किया। 'ए मेरे वतन के लोगों, 'ए मेरे प्यारे वतन' और 'हमारा स्वर्ग सा भारत' पसन्द किया गया। बालशौरि रेडडी ने हिन्दी और तेलगू में, विनोद बब्बर जी ने हिन्दी में, प्रो ह़रमहोन्द्र सिंह बेदी ने हिन्दी, डा गुरूनाम कौर ने पंजाबी में अपनी-अपनी कवितायें सुनायी। स्थानीय लेखकों में सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', राय भटटी, दलजीत सिंह, माया भारती और नार्वेजीय लेखकों में सिगरीद मारिये रेफसुम, इंगेर मारिये लिल्लेएंगेन और लीव एवेनसेन प्रमुख थे।

'गंगा से ग्लोमा तक' का विमोचन


(चित्र में बाएँ से सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक', भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव दिनेश कुमार नंदा, नार्वेजीय सांसद हाइकी होल्मोस, भारत में नार्वे की राजदूत महामहिम आन ओल्लेस्ताद काव्यकृति 'गंगा से ग्लोमा तक का विमोचन करते हुए, इंडो नार्विजन इन्फार्मेशन एंड कल्चरल फोरम के उपाध्यक्ष हराल्ड बूरवाल्ड और संचालक संगीता शुक्ल सीमोनसेन) दिनांक १७ अगस्त, लिटरेचर हाउस, ओस्लो में भारतीय-नार्वेजीय लेखक सेमिनार में विदेशों में हिन्दी का प्रचार-प्रसार करने वाले नार्वे २२ वर्षों से नार्वे से प्रकाशित एक मात्र हिन्दी पत्रिका स्पाइल-दर्पण के सम्पादक सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' के हिन्दी में सातवें काव्य संग्रह 'गंगा से ग्लोमा तक' का विमोचन भारत में नार्वे की राजदूत महामहिम आन ओल्लेस्ताद ने किया। भारतीय राजदूत महामहिम बन्बित ए ऱाय ने लेखक को बधाई देते हुए कहा कि हमें गर्व है कि लेखक ने भारत और नार्वे के मध्य सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाया है और हिन्दी के प्रचार-प्रसार में अतुलनीय योगदान दिया है। भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव दिनेश कुमार नन्दा ने कहा कि सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' हम सभी के लिए अनुकरणीय हैं। विदेशों में हिन्दी में साहित्य सृजन में लेखक का महत्त्वपूर्ण स्थान है। विमोचित पुस्तक 'गंगा से ग्लोमा तक' की समीक्षा प्रस्तुत की हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार बालशौरि रेडडी ने कहा कि संग्रह की कवितायें मील का पत्थर साबित होंगी और आशा है कि हिन्दी कए आयाम को विस्ताार देने वाली कवितायें नये-नये प्रतीकों और बिम्बों द्वारा मानवीय त्रासदी, कमजोर वर्ग और श्रमजीवी को देवता स्वरूप बनाने वाली कवितायें साहित्य में मानवतावादी युग का सूत्रपाात करेंगी। आशा है कि काव्यसंग्रह 'ग्लोमा से गंगा तक' का स्वागत देश-विदेश में होगा।

बालशौरि रेडडी जी ने कहा कि शुक्ल जी स्वयं स्वीकार करते हैं कि गंगा उनकी माता देवकी है तो ग्लोमा माता यशोदा है। मेरा विश्वास है कि ऐसी पवित्र भावना से कार्य करने वाले लोग न अपने लिए बल्कि अपनी जन्मभूमि तथा कर्मभूमि के लिए सम्मान अर्जित कर सकते हैं। नार्वेजीय लेखक यूनियन एवं नार्वेजीय लेखक सेन्टर की अध्यक्षों ने और भारत से आये साहित्य्कारों प्रो हरमहोन्द्र सिंह बेदी, राष्ट्र किंकर के सम्पादक विनोद ब्ब्बर और डा ग़ुरूनाम कौर, ने बधाई दी।

सोमवार, 30 अगस्त 2010

शिक्षाविद् वेद मोहला (एम.बी.ई.) की दो पुस्तकों का लंदन में विमोचन

(बाएं से बैठे हुएः श्री कैलाश बुधवार, श्री वेद मोहला (एम.बी.ई.), डा. अरुणा अजितसरिया (एम.बी.ई.)। खड़े हुए – उषा राजे सक्सेना, तेजेन्द्र शर्मा, माइकल वार्ड एवं आनंद कुमार)
कथा यू.के. एवं एशियन कम्‍यूनिटी आर्ट्स ने 23 अगस्त 2010 की शाम 6:30 बजे वरिष्ठ शिक्षाविद् वेद मित्र मोहला, (एम.बी.ई.) की दो पुस्तकों आई जी सी एस ई हिन्दी एवं इक्कीसवीं सदी का बाल साहित्य का लोकार्पण समारोह लंदन के नेहरू केन्द्र में आयोजित किया। पुस्तकों का लोकार्पण श्री कैलाश बुधवार (भूतपूर्व अध्यक्ष बीबीसी हिन्दी विभाग) एवं ब्रिटेन में हिन्दी परीक्षक डा. अरुणा अजितसरिया के हाथों सम्पन्न हुआ।

यूके हिन्दी समिति की उपाध्यक्षा श्रीमती उषा राजे सक्सेना ने वेद जी के व्यक्तित्व के अनछुए पहलुओं से श्रोताओं का परिचय करवाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार तीस वर्षों से भी अधिक समय से वेद जी अपना समय और पैसा ख़र्च करके ब्रिटेन के बच्चों को हिन्दी पढ़ा रहे हैं। उन्होंने मोहला जी की प्रकाशित कृतियों एवं उनको मिले अलग अलग सम्मानों की भी चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए कथाकार तेजेन्द्र शर्मा (महासचिव, कथा यूके) ने कहा कि एक सिविल इंजीनियर की तरह कैलाश जी ने ब्रिटेन में हिन्दी भाषा सिखाने की नींव रखी है। पैंतीस साल से बिना किसी लाभ की आशा के हिन्दी के भवन को सुदृढ़ बना रहे हैं और साथ ही साथ भारत और ब्रिटेन के बीच एक भाषाई पुल का निर्माण भी कर रहे हैं।

श्री कैलाश बुधवार ने वेद मोहला जी को एक ऐसा मातृभाषा प्रेमी बताया जिसने विदेशी कंक्रीट के जंगल में एकलव्य की तरह हिन्दी की अराधना की है और एक सिविल इन्जीनियर होने के कारण हिन्दी पढ़ाने वाले पंडितनुमा अंगोछे वाली छवि को बदला।
श्रीमती अरुणा अजितसरिया के अनुसार इस पुस्तक में आई जी सी एस ई के पाठ्यक्रम के साथ- साथ मारिशस एवं सिंगापुर के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में निर्धारित 'अनुवाद' तथा 'शब्दों के समुचित प्रयोग' के पाठ भी सम्मिलित किए गए हैं। पुस्तक के अंतिम भाग में हिंदी का लघु शब्‍दकोष, जिसमें लगभग 2400 शब्दों के अर्थ दिए गए हैं, विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी होगा। इसके अतिरिक्त प्रश्नपत्रों का नियोजन परीक्षा के लिए अपेक्षित जानकारी की तैयारी करने में सहायक होगा। इस प्रकार से इस एक पुस्तक में उन्हें परीक्षा की तैयारी करने की समस्त सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। अपने प्रस्तुत रूप में यह पुस्तक अहिंदी- भाषी विद्यार्थियों को हिंदी सीखने में सहायक होगी।

दि फ़ार पैवेलियन (वेस्टेण्ड नाटक) के लेखक, निर्माता एवं निर्देशक माइकल वार्ड ने अपने हिन्दी प्रेम के बारे में साफ़ हिन्दी में बोलते हुए कहा, "मैं एक लेखक और प्रोड्यूसर हूं और मुझे इतनी ख़ुशी है कि मुझे भारतीय फ़िल्मकारों की अगली पीढ़ी के साथ काम करने को मिल रहा है। ये नये फ़िल्म निर्माता युवा पीढ़ी के हैं, उनमें टेलेण्ट है और ये ज़्यादा से ज़्यादा अपना समय फ़िल्म निर्माण एवं कहानी दिखाने एवं स्क्रीनप्ले की कला को समझने में मेहनत लगा रहे हैं।"

श्री कैलाश बुधवार द्वारा लिये गये साक्षात्कार के दौरान वेद मोहला जी ने कहा, "मैं 1979 में एक सामाजिक कार्यक्रम में सपरिवार गया। मेरे पांच वर्षीय पुत्र ने एक महिला रेणुका बहादुर के पूछने पर बताया कि वह हिन्दी बोल तो सकता है, परन्तु लिख-पढ़ नहीं सकता। उन्होंने आगे पूछा कि क्या लिखना-पढ़ना भी चाहोगे, तो बच्चे ने उत्साहपूर्वक कहा: 'हां, अवश्य, यदि मेरे पिताजी आज्ञा दें।' आज्ञा लेने जब रेणुका बहादुर मेरे पास आईं, तो न जाने क्यों मेरे मुंह से निकल गया, "हिन्दी सिखाने के लिए इसे साथ लाना तो क्या, मैं स्वयं भी पढ़ाने के लिए आ सकता हूं।" उस वाक्य ने मेरे जीवन की दिशा ही बदल डाली। न केवल तब हिन्दी विद्यालय की नींव पड़ी, बल्कि तब से जीवन का प्रत्येक रविवार हिन्दी अध्यापन के लिए समर्पित हो गया और मैं एक अध्यापक बन गया। "

वेद मोहला जी के दो विद्यार्थियों ने चिल्ड्रन्स लिटरेचर इन दि टवैण्टी फ़र्स्ट सेंचुरी पुस्तक के अंशपाठ किये।
कार्यक्रम में वेद मोहला जी के छात्र एवं चाहने वालों के साथ साथ भारतीय उच्चायोग के हिन्दी एवं संस्कृति अधिकारी श्री आनंद कुमार, डा. श्याम मनोहर पांडेय, डा. गौतम सचदेव, सोहन राही, दिव्या माथुर, डा. पद्मेश गुप्त, इंदर स्याल, के.बी.एल. सक्सेना, मंजी पटेल वेखारिया, गुरप्रीत कौर, यादव चन्द्र शर्मा आदि उपस्थित थे।

रचना गौड़ 'भारती` के काव्य संग्रह ''नई सुबह`` का लोकार्पण

कोटा। भारती प्रकाशन द्वारा प्रकाशित श्रीमती रचना गौड़ 'भारती` के प्रथम काव्य संग्रह ''नई सुबह`` का लोकार्पण कोटा में आयोजित अखिल भारतीय स्तर के नारी साहित्यकार सम्मेलन में हुआ। अब तक का यह तीसरा नारी साहित्यकार सम्मेलन था जिसमें देश के विभिन्न प्रदेशों की लेखिकाओं ने भाग लिया। लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे परिषद के राष्ट्रीय

अध्यक्ष बलवंत जानी, मुख्य अतिथि मानव मूल्यों के विश्वकोशकार डा० धर्मपाल मैनी एवं विशिष्ट अतिथि देश की मानी हुई लेखिका एवं केन्द्रीय मानव समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष डा०मृदुला सिन्हा ,परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डा०दयाकृश्ण विजय, प्रदेशाध्यक्ष डा० मथुरेश नन्दन कुलश्रेश्ठ एवं स्वंय लेखिका श्रीमती रचना गौड़ 'भारती` ने किया। जिसका संक्षिप्त विवरण वीरेन्द्र विद्यार्थी द्वारा दिया गया। काव्य संग्रह को नारी संवेदनाओं की प्रभावी अभिव्यक्ति बताया गया।

लेखिका जो अखिल भारतीय साहित्य परिषद के नारी प्रकोश्ठ की प्रदेशाध्यक्ष भी है ने अपने प्रथम काव्य संग्रह को अपने पिता स्व. श्री सत्यभानु श्रीवास्तव एवं ससुर स्व. श्री रधुन्न्दन प्रसाद गौड़ को समर्पित किया। इन्होने काव्य संग्रह को सामाजिक समस्याओं एवं प्राकृत प्रभाव से वशीभूत बताया। साहित्य परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डा०दयाकृश्ण विजय, ने काव्य संग्रह की भूमिका में कहा कि श्रीमती रचना गौड़ भारती की कविताओं का यह संकलन 'नई सुबह` सच में साहित्य क्षितिज पर लालिमा बिखराती उषा का अवतरण है। उषा धरा पर चेतना का संचरण है। कर्म का आव्हान है। प्रगति का सिंहनाद है। कुछ सिखरांत छूने का संकल्प है। उन्होन कहा कि श्रीमती भारती की कविताओं में यही स्वर आरम्भ से अन्त तक सुनाई देता है। अखिल भारतीय साहित्य परिषद राजस्थान के अध्यक्ष डा. मथुरेश नन्दन कुलश्रेश्ठ ने कहा कि कवियत्री की ७२ कविताओं में से १५ कविताएं तो प्रकाश से ही सम्बन्धित हैं जो आशावाद और जीवन की स्वस्थ दशा का प्रतीक है। उन्होन कहा कि कविताओं की एक बड़ी विशेषता यह है कि ये कविताएं टुकडों में नहीं वरन एक सांस में लिखी गई हैं। कभी भी लेखनी न ठहरी है न ही पुनर्विचार किया गया है। कोटा के वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार रामू भैया ने कहा कि यदि आपको भाब्द संसार में सृजन का नया कैनवास देखना हो, नए रंग दंखने हों, नई तूलिका देखनी हो और नए सूरज की नई सुबह देखनी हो तो बस इस काव्यकृति को आद्योपान्त पढ़ते जाइए।

वरिष्ठ उद्घोषक आकाशवाणी कोटा व दोहा,गजल एवं व्यंगकार रामनारायण मीणा' 'हलधर`` ने कहा कि नई सुबह काव्य संकलन कृति मानवीय संवेदनाओं का एक ऐसा इंद्रधनुष है जिसमें आधुनिक जीवन भौली के सभी रंग बड़े सलीके से समाहित है। कृति को पढ़ते हुए एक अत्यंत संवेदनशील स्त्री की कोमल भावनाएं ,पुरुष के प्रति उसका निश्कपट समर्पण ,परिवार व समाज के प्रति जिम्मेदारी आदि गुणों का अत्यंत गहनता से जानने का सुअवसर कहा जा सकता है। कवियत्री के इस काव्य कौशाल पर मर मिटने को जी करता है। कोटा की ही वरिष्ठ समीक्षक डा. गीता सक्सेना ने कहा कि हाड़ौती अंचल की रचनाकार श्रीमती रचना गौड़ भारती का सद्य प्रकाशित काव्य संग्रह नई सुबह का ताना बाना, भाव और विचार रुपी कोमल-कठोर तंतुओं से निर्मित है। यह कृति विभिन्न काव्य संवेदनाओं की बाल अरुणिमा है। इसमें निशा के अंधकार कें व्यामोह में लिपटी जन चेतना को शनैः शनै। प्रात: की लालिमा से संलिप्त कर प्रगति पथ गामिनी बनाने की चेश्ठा है। कोटा के ही गीत व गजलकार डा. नलिन ने कहा कि रचना भारती की कविताएं वैदुश्य का दर्पण एवं पाठक के मन मस्तिष्क को झंकृत करने की क्षमता रखती है। इन कविताओं में गेयात्मकता है, लयात्मकता है।

इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसके प्रत्येक पृश्ठ का रेखांकन, कोटा की ही युवा उभरती रेखांकनकार यामिनी गौड़ ने किया है जो कि लेखिका की ही पुत्री है। मात्र १६ वर्ष की ही उम्र में वे देश की जानी मानी साहित्यिक पत्रिकाओं मधुमती,साहित्य अमृत एवं सरस्वती सुमन का रेखांकन भी कर चुकी है। इसी कार्यक्रम में रेखांकनकार यामिनी गौड़ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बलवंत जानी एवं साहित्यकार डा० मृदुला सिन्हा द्वारा शाल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। इनके द्वारा कार्यक्रम की स्मारिका का रेखांकन भी किया गया है।

आर.सी.शर्मा ’आरसी’ के ग़ज़ल संग्रह ’पानी को तो पानी लिख’ का लोकार्पण

(चित्र में बाएँ से- महेन्द्र नेह, शकूर अनवर, भगवती प्रसाद गौतम, मुख्य अतिथि अनमोल शुक्ल’अनमोल’, शिवराम, आर.सी.शर्मा’आरसी’ डॊ. अजय जन्मेजय एव. डॊं.गजेन्द्र बटोही)
कोटा १४ अगस्त : सुपरिचित गीतकार एव ग़ज़लकार आर.सी.शर्मा ’आरसी’ के सद्य प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह ’पानी को तो पानी लिख’ का लोकार्पण ’विकल्प’ जन सांस्कृतिक मंच कोटा द्वारा १४ अगस्त १० को स्वतंन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कोटा में उमरावमल पुरोहित सभागार में सम्पन्न हुआ । समारोह की अध्यक्षता साहित्यकार, रंगकर्मी एवं नाट्य लेखक शिवराम ने की । मुख्य अतिथि बिजनौर से पधारे ग़ज़लकार अनमोल शुक्ल ’अनमोल’ तथा विशिष्ट अतिथि बाल साहित्य के ख्यातनाम लेखक डॊ. अजय जन्मेजय तथा अविचल प्रकाशन के संस्थापक डॊ. गजेन्द्र बटोही थे ।

कार्यक्रम का प्रारम्भ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं द्वीप प्रज्वलित करने के साथ हुआ । सर्व प्रथम ग़ज़लकार एवं गायक शरद तैलंग ने आर.सी.शर्मा’ आरसी’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला । उन्होंनें कहा आरसी की एक गज़ल के कुछ शे’रों द्वारा ही उनके व्यक्तित्व तथा कृतित्व की सम्पूर्ण जानकारी मिल जाती है । वो कुछ शे’र इस प्रकार थे ’बुज़ुर्गों का हमारे साथ यह एह्सान है प्यारे, शहर भर में हमारी अब अलग पहचान है प्यारे" - "मेरे गीतों में इक नन्हा सा बालक मुस्कराता है, मगर ग़ज़लों मे शामिल दर्द-ए-हिन्दुस्तान है प्यारे" । शायर शकूर अनवर ने कहा कि आरसी की ग़ज़लें मौज़ूदा हालात की तल्खी और खुशबू दोनों को सादगी और शिद्दत से बयान करतीं हैं, भाईचारे का पैगाम देतीं हैं तथा मेलमिलाप और यकजहेती बढ़ातीं हैं । साहित्यकार भगवती प्रसाद गौतम ने आरसी के गज़ल संग्रह पर पत्रवाचन करते हुए कहा कि ये ग़ज़लें सच को सच कहने का आह्वान हैं और यही एक समर्थ रचनाकार का सबसे बडा गुण है ।

इसके पश्चात ग़ज़ल संग्रह ’पानी को तो पानी लिख’ का अतिथियों द्वारा लोकार्पण हुआ । गायक शरद तैलंग ने जब इस संकलन की दो ग़ज़लों ’खुशी के पल तो जीवन में महज़ दो चार होते हैं, दुखी इन हादसों से हम हज़ारों बार होते हैं’ तथा " हम खुद ही उड़ सके न परों की थकान से, शिकवा नहीं है कोई हमें आसमान से" की संगीतमय प्रस्तुति दी तब पूरे हॊल में लोग गज़लों का आनन्द उठाते रहे । डॊ. अजय जन्मेजय ने अपने उदबोधन में आरसी की गज़लों के चुनिन्दा शे’रों का हवाला दे कर उन्हें ज़िन्दगी का शायर बताया और कहा कि गज़लों में सौन्दर्य के विविध रंग-रूपों की उपस्थिति और सच्चाई का पक्ष उनकी विशिष्ठ्ता है । उन्होंने आरसी के इस क्षैत्र में निरन्तर प्रगति करते रहने की कामना की । संग्रह के प्रकाशक डॊ. गजेन्द्र बटोही ने भी इस पुस्तक की रचना यात्रा की जानकारी श्रोताओं को देते हुए ’आरसी’ को मानवीय मूल्यों का साधक शायर बताया । समारोह में ग़ज़लकार आरसी ने अपनी कुछ गज़लों का सस्वर पाठ भी किया ।

समारोह के मुख्य अतिथि ग़ज़लकार अनमोल शुक्ल ’अनमोल’ ने अपने वक्तव्य में आरसी जी के कथ्य और शिल्प की चर्चा की तथा उनके पहले संकलन ’अहल्याकरण’ की प्रशस्ति में प्राप्त अनेक पाठकों की प्रतिक्रिया का हवाला देकर आरसी जी की क़लम की जादूगरी पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए कहा कि आरसी ने ग़ज़ल लेखन परम्परा में अपनी प्रभावी दस्तक दी है सधी छंदबध्द्ता,मनोहरी लय और सामाजिक विद्रूपताओं को दर्पण दिखातीं ये गज़लें सामाजिक सत्य और प्रेम के विविध रूपों की छटाएं हैं । इनकी ग़ज़लों के कथ्य का कैनवास बहुत व्यापक है तथा कुछ खास अनुभूतियों तक ही सीमित नहीं है ।

अन्त में समारोह के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकर शिवराम ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में आरसी जी की ग़ज़लों के अनेक शेरों पर अपने बहुत ही सारगर्भित उदबोधन द्वारा इस संग्रह की विवेचनात्मक समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि राहबोध, संकल्प सजगता और संवाद उत्सुकता आरसी की विशिष्टता है जो इस संकलन की ग़ज़लों में मुखर हुई है । सच को सच कह, ज़िन्दगी की कहानी बयान करना उनकी शायरी का आधार है ।

समारोह में ’विकल्प’ संस्था की ओर से सभी अतिथियों का नगर के प्रतिनिधि साहित्यकरों - अखिलेश ’अंजुम’, एन.के.शर्मा, हितेश व्यास, अरुण सेदवाल, रामकरण स्नेही, डॊ, इन्द्र बिहारी सक्सेना, जी.के.भट्ट, नरेन्द्र चक्रवर्ती, नितेश शर्मा ने माल्यार्पण तथा ’विकल्प सृजन सम्मान’ के स्मृति चिन्ह प्रदान कर स्वागत एवं समानित किया । इस अवसर पर प्रसिद्ध शायर के.के.सिंह ’मयंक’ की उपस्थिति भी विशिष्ठ रही। कार्यक्रम का सफ़ल संचालन साहित्यकार महेन्द्र नेह ने किया तथा आभार ’आरसी’ ने व्यक्त किया । समारोह में बडी तादाद में नगर के साहित्यकार तथा गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे ।
प्रस्तुति : शरद तैलंग

हिंदी और उर्दू और नज़दीक आयीं


चित्र में बाएँ से- (बाएं से मोनिका मोहता, हरि भटनागर, ज़कीया ज़ुबैरी, आसिफ़ इब्राहिम और तेजन्द्र शर्मा)
“ये बहुत सुकून देने वाली बात है कि कथा यूके और एशियन कम्यूरनिटी आर्ट्स मिल कर यहां यूके में हिंदी और उर्दू के बीच भाषाई पुल बनाने की पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं लेकिन हमें इस बात को भी देखना होगा कि हमारा आज का पाठक इन कहानियों की विषय-वस्तुर कथानक और लोकेल से जुड़ सके और कहानियों से जुड़ाव महसूस कर सके।” उक्ता विचार कथा यूके और एशियन कम्यूकनिटी आर्ट्स द्वारा प्रकाशित ब्रिटेन की उर्दू क़लम का नेहरू सेटर, लंदन में 21 जुलाई 2010 की शाम लोकार्पण करते हुए हुए भारतीय उच्चाियोग में मंत्री (समन्वसय) श्री आसिफ़ इब्राहिम ने व्यणक्तत किेये।


हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार तेजेन्द्र शर्मा एवं ज़कीया ज़ुबैरी द्वारा संपादित ब्रिटेन की उर्दू क़लम में ब्रिटेन में बसे 8 उर्दू कहानीकारों की 16 कहानियों का हिंदी अनुवाद प्रकाशित किया गया है। इस पुस्तक की लम्बी भूमिका कथाकार-पत्रकार एवं कथा यूके की उपाध्यक्षा अचला शर्मा ने लिखी है। इस मौक़े पर प्रोफ़ेसर अमीन मुग़ल ने अपनी बात कहते हुए कहा कि बेशक नेचर के हिसाब से हिंदी और उर्दू बहुत नज़दीकी भाषाएं हैं और दोनों भाषाओं के बीच आदान प्रदान की लम्बी परम्प रा है, कथा यूके और एशियन कम्यूदनिटी आर्ट्स की इस बात के लिए तारीफ़ की जानी चाहिये कि वे अपने सीमित साधनों से इतने महत्वनपूर्ण काम को अंजाम दे रहे हैं।

इस अवसर पर भारत से विशेष रूप से पधारे कहानीकार-संपादक-प्रकाशक हरि भटनागर ने अपने लम्बे लिखित लेख द्वारा श्रोताओं का परिचय कहानियों से करवाया। उनके अनुसार संकलन की कहानियां ग़म की कथा को रो पीट कर, चिल्ला चोट कर के नहीं बल्कि बहुत ही ख़ामोश ढंग से व्यक्त करती हैं। कि कथा का कलात्मक वैभव कहीं भी क्षतिग्रस्त नहीं होता और सबसे बड़ी बात यह कि उस निज़ाम का चेहरा बेनक़ाब होता है जो भेदभाव की राजनीति कर के लोगों में फूट डालता है और उन्हें कहीं का नहीं छोड़ता।

कथा यूके के महासचिव, कथाकार ओर किताब के संपादक द्वय में से एक तेजेन्द्र शर्मा का कहना था कि हमें पहले समस्या को स्वीकार करना होगा। अब समय आ गया है कि हम मान लें कि हिन्दी और उर्दू दो भाषाएं हैं और हमें उनके बीच की दूरी को पाटना है। उन्होंने इस किताब और इस तरह की दूसरी किताबें प्रकाशित किये जाने की ज़रूरत की बात कही और बताया कि उनकी कोशिश रहेगी कि कहानी के अलावा, कविता, ग़ज़ल और इतर साहित्ये का भी दोनों भाषाओं में अनुवाद कराते रहें।
नेहरू सेंटर की निदेशक मोनिका मोहता ने इस अवसर पर नेहरू सेंटर और कथा यूके के लम्बेल समय चले आ रहे सार्थक रिश्तों की बात कही और उम्मीरद की कि ये सिलसिला आगे भी चलता रहेग।

भारत से पधारे पत्रकार अजित राय ने कहा कि इस पुस्तक का प्रकाशित होना एक ऐतिहासिक घटना है क्योंकि पहली बार ब्रिटेन के आठ उर्दू लेखकों की कहानियां हिन्दी में एक साथ छपी हैं। हिन्दी और उर्दू एक भाषा नहीं हैं। हम आज़ादी के बाद से ही इनके एक होने का भ्रम पाले रहे और दूरियां बढ़ती गईं।

एशियन कम्यूानिटी आर्ट्स की अध्योक्ष ज़कीया जुबैरी ने उपस्थित लोगों के प्रति आभार मानते हुए कहा मेरा सपना है कि हिन्दी और उर्दू की गंगा जमुनी तहज़ीब, शब्दों की मिठास, अपनापन, ख़ुलूस सब हमारे साहित्य और ज़िन्दगी का हिस्सा बन जाएं। हमारे रिश्ते राजनीति से संचालित न हों। हमारे रिश्ते साहित्य, कला और एक दूसरे पर विश्वास से पैदा हों। यह न तो पहला प्रयास है और न ही आख़री । हम इस मुहिम को जारी रखेंगे। हिन्दी उर्दू कहानियों की निशस्तें रखी जाएंगी, और अगला संकलन शायद उन कहानियों का हो जो कि उन नशिस्तों में पढ़ी जाएं।

इसी अवसर पर कथाकार सूरज प्रकाश (भारतीय प्रतिनिधि कथा यूके) की नवीनतम कृति दाढ़ी में तिनका का अनूठा विमोचन भी हुआ जब एक युवा पाठिका हेमा कंसारा ने मंच पर आकर उनकी कृति का लोकार्पण किया। सूरज प्रकाश ने अपने लम्बे लेखकीय सन्नाटे के बारे में बात करते हुए लेखक की न लिख पाने की छटपटाहट का विस्तार से ज़िक्र किया। सूरज प्रकाश पिछले बारह वर्षों से कथा यूके से जुड़े हैं।

कार्यक्रम में अन्य लोगों के अतिरिक्त उर्दू कहानीकार जितेन्द्र बिल्लु, सफ़िया सिद्दीक़ि, मोहसिना जीलानी, बानो अरशद एवं फ़हीम अख़्तर, फ़िल्मकार यावर अब्बास, भूतपूर्व बीबीसी हिन्दी अध्यक्ष कैलाश बुधवार, हिन्दी कथाकार दिव्या माथुर, उषा राजे सक्सेना, कादम्बरी मेहरा एवं महेन्द्र दवेसर, कवि निखिल कौशिक, शिक्षाविद वेद मोहला, नाटककार इस्माइल चुनारा, अयूब औलिया, हिन्दी एवं संस्कृति अधिकारी आनंद कुमार, भारत से आए फ़िल्म आलोचक विनोद भारद्वाज, लदंन और आसपास के शहरों के हिंदी और उर्दू के रचनाकार बड़ी संख्या में मौजूद थे।