रविवार, 26 सितंबर 2010

लंदन में एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स एवं कथा यू.के. द्वारा "साहिर लुधियानवी एक रोमांटिक क्रांतिकारी" कार्यक्रम का आयोजन

लंदन के नेहरू सेन्टर में एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स एवं कथा यू.के. द्वारा "साहिर लुधियानवी एक रोमांटिक क्रांतिकारी" शीर्षक से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बीबीसी उर्दू सेवा के श्री रज़ा अली आबिदी ने साहिर लुधियानवी (मूल नाम अब्दुल हैय) के बचपन, जवानी, साहित्यिक शायरी और फ़िल्मी नग़मों की चर्चा की। साहिर के मुंबई में बसने पर श्री आबिदी ने कहा कि किसी शहर के रंग में रंग जाना बहुत सहज होता है मगर साहिर ने बम्बई को अपने रंग में रंग दिया। तेजेन्द्र शर्मा ने चित्रकार मक़बुल फ़िदा हुसैन, फ़िल्मकार मुज्ज़फ़र अली, एवं संसद सदस्य श्री विरेन्द्र शर्मा की उपस्थिति में अपने पॉवर-पाइन्ट प्रेज़ेन्टेशन की शुरूआत फ़िल्म हम दोनों के भजन अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम से करते हुए कहा कि आज ईद और गणेश चतुर्थी के त्यौहार हैं, तो चलिये हम अपना कार्यक्रम एक नास्तिक द्वारा लिखे गये एक भजन से करते हैं।
एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स की अध्यक्षा काउंसलर ज़कीया ज़ुबैरी ने ईद के कारण कार्यक्रम में शामिल न होने पर खेद प्रकट करते हुए श्रोताओं के लिये संदेश भेजा कि जो श्रोता आज ईद मना रहे हैं उनको गणेश चतुर्थी की बधाई और जो गणेश चतुर्थी मना रहे हैं उन्हें ईद की मुबारक़बाद। इस तरह ज़कीया जी ने कार्यक्रम की शुरूआत में ही एक सेक्युलर भावना से दर्शकों के दिलों को सराबोर कर दिया।

अपनी प्रस्तुति में तेजेन्द्र शर्मा ने साहिर की एक संपूर्ण रोमांटिक कवि की छवि से लेकर उनके क्रांतिकारी रूप तक की यात्रा को प्रस्तुत करते हुए अनेक फ़िल्मी गीत और ग़ज़लों को पर्दे पर दिखाया। तेजेन्द्र शर्मा ने आगे बताया कि साहिर ने फ़िल्मों में जो भी लिखा वो अन्य फ़िल्मी गीतकारों के लिये एक चुनौती बन कर खड़ा हो गया। उनका लिखा हर गीत जैसे मानक बन गये। उनकी कव्वाली न तो कारवां की तलाश है (बरसात की रात), हास्य गीत सर जो तेरा चकराए (प्यासा), देशप्रेम गीत ये देश है वीर जवानों का (नया दौर), सूफ़ी गीत लागा चुनरी में दाग़ छिपाऊं कैसे (दिल ही तो है) और शम्मी कपूर के तुमसा नहीं देखा के लिये लिखा गया गीत- यूं तो हमने लाख हसीं देखे हैं.. आदि गीतों की याद ताज़ा की। साहिर की भाषा पर टिप्पणी करते हुए तेजेन्द्र का कहना था कि किसी भी बड़े कवि या शायर की लिखी वही शायरी ज़िन्दा रही है जो आम आदमी तक प्रेषित हो पाई है। उन्होंने कहा कि साहिर, शैलेन्द्र और शकील अपने समय के फ़िल्मी गीतों की ऐसी त्रिमूर्ति थे जिन्होंने फ़िल्मी मुहावरे में उत्कृष्ठ साहित्य की रचना की।

कार्यक्रम की शुरूआत में नेहरू केन्द्र की निदेशक मोनिका मोहता ने अतिथियों का स्वागत किया। तेजेन्द्र शर्मा ने कथाकार महेन्द्र दवेसर, ग़ज़लकार प्राण शर्मा एवं जमशेदपुर की विजय शर्मा को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस कार्यक्रम की तैयारी में कुछ सामग्री भेजी। कार्यक्रम में अन्य लोगों के अतिरिक्त नसरीन मुन्नी कबीर, प्रो. अमीन मुग़ल, ग़ज़ल गायक सुरेन्द्र कुमार, शिक्षाविद अरुणा अजितसरी, दिव्या माथुर एवं उच्चायोग के श्री जितेन्द्र कुमार भी शामिल थे।

मारीशस में हिंदी समारोह संपन्न


मारीशस के राष्ट्रपति श्री अनिरूद्ध जगन्नाथ ने छत्तीसगढ़, भारत की साहित्यिक संस्था सृजन सम्मान द्वारा विश्वभर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार, साहित्यकारों का सम्मान एवं हिन्दी की सेवा की प्रशंसा करते हुए कहा कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषाओं में सम्मिलित करने का प्रयास करना अच्छी बात है। यह विचार उन्होंने भारत के छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक संस्था सृजन सम्मान द्वारा आयोजित साहित्यिक भ्रमण के अंतर्गत संस्था के राष्ट्रीय महासचिव एवं यात्रा संयोजक द्वय जयप्रकाश मानस एवं एच.एस.ठाकुर के नेतृत्व में मारीशस पहुँचे यात्रा समूह के सदस्यों के साथ आयोजित एक बैठक में व्यक्त किए। उन्होंने संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मारीशस की अर्थव्यवस्था एवं उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी सदस्यों से बातचीत की। इस अवसर पर मारीशस की प्रथम महिला श्रीमती सरोजनी जगन्नाथ विशेष रूप से उपस्थित थी।

तृतीय अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन बाली (इंडोनेशिया) में
बैठक के आरंभ में जयप्रकाश मानस ने पुस्तकें भेंटकर राष्ट्रपति का स्वागत किया। अपने स्वागत उद्बोधन में मानस ने व्यस्तता के बावजूद भारतीय साहित्यकारों के दल को समय देने के लिए राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्था के माध्यम से मारीशस में द्वितीय हिन्दी सम्मेलन का आयोजन किया गया। गतवर्ष पहला अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन थाईलैंड में किया गया था । हिन्दी दिवस के अवसर पर मारीशस के सात वरिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान भी किया गया। उन्होंने राष्ट्रपति को अवगत कराया कि भविष्य में हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषाओं में सम्मिलित किए जाने का प्रयास जारी है और इस सिलसिले में अगले साल इंडोनेशिया (बाली) में तृतीय अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन करने का निर्णय लिया गया है।

राष्ट्रपति भवन में साहित्यकारों का दल
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का एक पत्र एवं बस्तर के कलाकारों द्वारा निर्मित धातु शिल्प भी राष्ट्रपति को सौंपा गया। इसके अलावा अनेक साहित्यकारों ने अपनी पुस्तकें तथा फ़िलाटेलिक सोसायटी ऑफ इंडिया की छत्तीसगढ़ इकाई की ओर से भारत के साहित्यकारों एवं अगले माह आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों पर केन्द्रित भारतीय डाक टिकटों के दो एलबम भेंट किए गए। तत्पश्चात राष्ट्रपति के साथ सदस्यों का एक फ़ोटो सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें प्रथम महिला एवं बड़ी संख्या में मारीशस के शिक्षाविद एवं साहित्यकार भी सम्मिलित थे। राष्ट्रपति भवन की ओर से सदस्यों के लिए स्वल्पाहार का आयोजन भी किया गया था। उल्लेखनीय है कि साहित्यिक संस्था सृजन सम्मान द्वारा संस्था के महासचिव जयप्रकाश मानस के नेतृत्व में विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर से १८ सितम्बर तक मारीशस का साहित्यिक, सांस्कृतिक पर्यटन अध्ययन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर के ६१ सदस्यों ने भाग लिया।

हिन्दी का संसार एवं संसार की हिन्दी विषय पर संगोष्ठी
भ्रमण के दौरान मारीशस सरकार द्वारा गठित सांस्कृतिक प्रतिष्ठान हिन्दी स्पीकिंग यूनियन द्वारा हिन्दी दिवस पर हिन्दी का संसार एवं संसार की हिन्दी विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि थे हिन्दी के वरिष्ठ उपन्यासकार अभिमन्यु अनत और अध्यक्षता की जयप्रकाश मानस ने । द्वितीय सत्र में कृतियों का विमोचन एवं मॉरीशस के साहित्यकारों का अंलकरण कार्यक्रम आयोजित था । इस सत्र के मुख्य अतिथि थे - मारीशस के संस्कृति एवं कला मंत्री श्री मुखेश्वर शोन्नी ।

मॉरीशस के ७ साहित्यकारों को सृजनश्री अंलकरण
इस अवसर पर सृजन-सम्मान द्वारा वहाँ के वरिष्ठ ७ साहित्यकारों को सृजन-श्री अंलकरण से अलंकृत किया गया । सम्मानित साहित्यकारों को शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मान किया गया। जिसमें उपन्यास के लिए मारीशस के श्री अभिमन्यु अनत, कहानी के लिए प्रकारेश धुरंधर, नाटक के लिए महेश राम जीयावन, कविता के लिए पूजा नंद नेमा, महिला विमर्श के लिए भानुमति नागदान, हिन्दी सेवा के लिए स्व.मुनेश्वर लाल चिन्तामणी के अलावा महात्मा गांधी संस्थान के वरिष्ठ व्याख्याता एवं कार्यक्रम के संयोजक विनय गोदारी को सृजन श्री सम्मान से विभूषित किया गया। संगोष्ठी में भारत से मारीशस पहुँचे अनेक साहित्यकारों की पुस्तकों, पत्रिकाओं एवं गीतों के कैसेटों का विमोचन भी किया गया। इसके अलावा सदस्यों ने महात्मा गांधी संस्थान का भ्रमण किया। संस्थान के विभागाध्यक्ष एवं अन्य प्राध्यापकों ने प्रतिष्ठान की गतिविधियों की जानकारी दी। साथ ही प्रतिष्ठान द्वारा संचालित हिन्दी प्रचार अभियान के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक का अवलोकन किया।

इस सांस्कृतिक अध्ययन दल में यात्रा संयोजक जयप्रकाश मानस एवं एच.एस.ठाकुर सहित छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के संचालक राजीव श्रीवास्तव, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, डॉ.महेन्द्र ठाकुर, दीपक पाचपोर, सुरेश तिवारी, चेतन भारती, संजीव ठाकुर, डॉ.निरुपमा शर्मा, डॉ.सीमा श्रीवास्तव, लतिका भावे, शकुन्तला तरार, अरूणा चौहान,अरविन्द मिश्रा, कुमेश कुमार जैन, नागेन्द्र दुबे, टामन सिंह सोनवानी, श्रीमती पदमनी सिंह, अभिषेक सोनवानी, ललित गणवीर, श्रीमती गणवीर, जी.एस.बाम्बरा, श्रीमती आर.बाम्बरा, प्रतापचंद पारख, सत्यपाल, श्रीकांत अग्रवाल, रमाकांत अग्रवाल, बिलासपुर के राजेश सोन्थलिया, रायगढ़ के सत्यदेव शर्मा, संजय तिवारी, उसत राम, भीखलाल पटेल, सुरेश पंडा, सुरेश छत्री, श्रीमती क्षत्री, अर्जुन दास, देवानी, एम.आर.ठाकुर, समुन्द सिंह, मिश्री लाल पाण्डे, राजेश तिवारी, सरायपाली के मीनकेतन दास, नागपुर महाराष्ट्र के भाषाविद डॉ.रामप्रकाश सक्सेना, हनुमन्त ठाकरे, नागेन्द्र अन्नाराव, रामदेव खुशहाल राव, बंडोपाद्ये यशवंत, नरेन्द्र दंडारे, उत्तराखण्ड नैनीताल के दिवाकर भट्ट, मध्यप्रदेश भोपाल के डी.पी.सक्सेना, मधु सक्सेना, प्रकाशचंद तापड़े, अरूणा तापड़े एवं सृजन-सम्मान के यात्रा-पार्टनर क्रियेटिव ट्रेव्हलर्स के प्रमुख विकास मल्होत्रा आदि सम्मिलित थे।

(मारीशस से लौटकर हीरामन सिंह ठाकुर)

यादें मुकेश की ....कार्यक्रम सम्पन्न

जयपुर : प्रसिद्ध पार्श्व गायक स्व. मुकेश की पुण्य तिथि के अवसर पर जयपुर के प्रतिष्ठित ’जयपुर क्लब’ द्वारा २८ अगस्त ’१० को ’यादें मुकेश की...’ कार्यक्रम का आयोजन क्लब परिसर में किया गया। कार्यक्रम में क्लब के सदस्यों के अतिरिक्त मुकेश के गीतों के जाने माने गायक कोटा के राजीव मलहोत्रा को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया था।

राजीव ने अपने गायन की शुरूआत मुकेश द्वारा गाई गईं रामचरित मानस की चौपाई ’ मंगल भवन अमंगल हारी.. से की और उसके बाद मुकेश के विभिन्न गीत जैसे ’होठों पे सचाई रहती है’ दुनिया से जाने वाले जाने चले जाते हैं कहाँ .. , कहीं दूर जब दिन ढ़ल जाए.., जाऊँ कहाँ बता ए दिल.., चल अकेला चल अकेला.., ये मेरा दीवानापन है.., कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है.., के साथ साथ उभरती हुई गायिका भव्या छाबडा के साथ कुछ युगल गीत ’सावन का महीना.., दिल की नज़र से नज़रों के दिल से.., क्या खूब लगती हो बडी सुन्दर दिखती हो.. ए मेरे सनम ए मेरे सनम.. गीत गाकर मुकेश की याद ताज़ा कर दी।

कार्यक्रम में गायक एवं ग़ज़लकार शरद तैलंग ने भी ’सजन रे झूठ मत बोलो.. तथा दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई .. तथा अजमेर से आए हुए गायक सुरेन्द्र विजयवर्गीय ने ’ सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी.. और इक दिन मिट जायेगा माटी के मोल..गीतों को सुना कर मुकेश को अपनी श्रद्धांजली दी। राजीव और भव्या के साथ जब शरद तैलंग ने फ़िल्म संगम का प्रसिद्ध गीत ’हर दिल जो प्यार करेगा वो गाना गाएगा.. सुनाया तो लोग झूमने लगे। कार्यक्रम में जयपुर क्लब के सद्स्य आर.के.परनामी, रवि शर्मा, केप्ट्न अरोरा, मधुकर पुरोहित नें भी मुकेश के विभिन्न गीतों को सुनाकर सबकी प्रशंसा बटोरी। इस अवसर पर नर्तक गोविन्दा ने ’जाने कहाँ गए वो दिन .. पर भावाभिनय भी किया। कार्यक्रम में सुपरिचित प्यानो एकॊर्डियन वाद्क अरुण चतुर्वेदी, की-बोर्ड वादक ब्रजेश दाधीच, गिटार वादक सुमित, ऒक्टोपेड़ वादक चेतन शर्मा तथा ढोलक कोंगों पर बबलू ने संगत की। कार्यक्रम का संचालन शरद तैलंग ने किया।

सृजनात्मक लेखन कार्यशाला हेतु ब्लॉगरों से प्रविष्टि आमंत्रित

रायपुर । रचनाकारों की संस्था, प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, रायपुर, छत्तीसगढ़ द्वारा देश के उभरते हुए कवियों/लेखकों/निबंधकारों/कथाकारों/लघुकथाकारों/ब्लॉगरों को देश के विशिष्ट और वरिष्ठ रचनाकारों द्वारा साहित्य के मूलभूत सिद्धातों, विधागत विशेषताओं, परंपरा, विकास और समकालीन प्रवृत्तियों से परिचित कराने, उनमें संवेदना और अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करने, प्रजातांत्रिक और शाश्वत जीवन मूल्यों के प्रति उन्मुखीकरण तथा स्थापित लेखक तथा उनके रचनाधर्मिता से तादात्मय स्थापित कराने के लिए अ.भा.त्रिदिवसीय (१३, १४, १५ नवंबर, २०१०) सृजनात्मक लेखन कार्यशाला का आयोजन बिलासपुर में किया जा रहा है । इस अखिल भारतीय स्तर के कार्यशाला में देश के ७५ नवोदित/युवा रचनाकारों को सम्मिलित किया जायेगा ।

संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है-
  • प्रतिभागियों को २० अक्टूबर, २०१० तक अनिवार्यतः निःशुल्क पंजीयन कराना होगा । पंजीयन फ़ार्म संलग्न है ।
  • प्रतिभागियों का अंतिम चयन पंजीकरण में प्राप्त आवेदन पत्र के क्रम से होगा ।
  • पंजीकृत एवं कार्यशाला में सम्मिलित किये जाने वाले रचनाकारों का नाम ई-मेल से सूचित किया जायेगा ।
  • प्रतिभागियों की आयु १८ वर्ष से कम एवं ४० वर्ष से अधिक न हो ।
  • प्रतिभागियों में ५ स्थान हिन्दी के स्तरीय ब्लॉगर के लिए सुरक्षित रखा गया है ।
  • प्रतिभागियों को संस्थान/कार्यशाला में एक स्वयंसेवी रचनाकार की भाँति, समय-सारिणी के अनुसार अनुशासनबद्ध होकर कार्यशाला में भाग लेना अनिवार्य होगा ।
  • प्रतिभागी रचनाकारों को प्रतिदिन दिये गये विषय पर लेखन-अभ्यास करना होगा जिसमें वरिष्ठ रचनाकारों द्वारा मार्गदर्शन दिया जायेगा ।
  • कार्यशाला के सभी निर्धारित नियमों का आवश्यक रूप से पालन करना होगा ।
  • प्रतिभागियों को सैद्धांतिक विषयों के प्रत्येक सत्र में भाग लेना अनिवार्य होगा । अपनी वांछित विधा विशेष के सत्र में वे अपनी इच्छानुसार भाग ले सकते हैं ।
  • प्रतिभागियों के आवास, भोजन, स्वल्पाहार, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह की व्यवस्था संस्थान द्वारा किया जायेगा ।
  • प्रतिभागियों को कार्यशाला में संदर्भ सामग्री दी जायेगी ।
  • प्रतिभागियों को अपना यात्रा-व्यय स्वयं वहन करना होगा ।
  • प्रतिभागियों को १२ नवंबर, २०१० शाम ५ बजे के पूर्व कार्यशाला स्थल - बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में अनिवार्यतः उपस्थित होना होगा । पंजीकृत/चयनित प्रतिभागी लेखकों को कार्यशाला स्थल (होटल) की जानकारी, संपर्क सूत्र आदि की सम्यक जानकारी पंजीयन पश्चात दी जायेगी ।

प्रस्तावित/संभावित विषय एवं विशेषज्ञ लेखक

दिनाँक १३ नवंबर, २०१०
रचना की दुनिया – दुनिया की रचना – श्री चंद्रकांत देवताले – विश्वनाथ प्रसाद तिवारी – प्रभाकर श्रोत्रिय
रचना में यथार्थ और कल्पना – श्री राजेन्द्र यादव – नीलाभ – केदारनाथ सिंह
रचना और प्रजातंत्र – श्री अखिलेश – रघुवंशमणि – परमानंद श्रीवास्तव
रचना और भारतीयता – श्री नंदकिशोर आचार्य – श्री अरविंद त्रिपाठी – विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
रचना : महिला, दलित और आदिवासी –– सुश्री अनामिका - कात्यायनी - मोहनदास नैमिशारण्य
रचना और मनुष्यता के नये संकट - श्री विनोद शाही- श्रीप्रकाश मिश्र – सीताकांत महापात्र

दिनाँक १४ नवंबर, २०१०
रचना और संप्रेषण – श्री कृष्ण मोहन – ज्योतिष जोशी – मधुरेश
शब्द, समय और संवेदना – श्री नंद भारद्वाज - श्रीभगवान सिंह – ए.अरविंदाक्षन
कविता की अद्यतन यात्रा – श्री वीरेन्द्र डंगवाल – ओम भारती - अशोक बाजपेयी
कविता - छंद और लय – श्री दिनेश शुक्ल – राजेन्द्र गौतम – डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र
कैसा गीत कैसे पाठक ? - श्री राजगोपाल सिंह – यश मालवीय – माहेश्वर तिवारी
कहानी-विषयवस्तु, भाषा, शिल्प – श्री शशांक – डॉ. परदेशीराम वर्मा – गोविन्द मिश्र

दिनाँक १५ नवंबर, २०१०
कहानी की पहचान – सुश्री उर्मिला शिरीष - सूरज प्रकाश – सतीश जायसवाल
लघुकथा क्या ? लघुकथा क्या नहीं ? – श्री अशोक भाटिया – फ़ज़ल इमाम मल्लिक - बलराम
आलोचना क्यों, आलोचना कैसी? श्री शंभुनाथ – डॉ. रोहिताश्व - विजय बहादुर सिंह
ललित निबंध : कितना ललित-कितना निबंध – श्री नर्मदा प्रसाद उपा.-अष्टभुजा शुक्ल – डॉ.श्रीराम परिहार
(अंतिम नाम निर्धारण स्वीकृति/अस्वीकृति उपरांत)

संपर्क सूत्र
जयप्रकाश मानस
कार्यकारी निदेशक
प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, छत्तीसगढ़
एफ-३, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा, रायपुर, छत्तीसगढ – ४९२००१
ई-मेल-pandulipipatrika@gmail.com
मो.-९४२४१-८२६६४
बिलासपुर
श्री सुरेन्द्र वर्मा, मो.-९४२५५-७०७५१
श्री राजेश सोंथलिया, ९८९३०४८२२०

पंजीयन हेतु आवेदन पत्र फार्म नमूना
०१. नाम -
०२. जन्म तिथि व स्थान (हायर सेंकेंडरी सर्टिफिकेट के अनुसार) -
०३. शैक्षणिक योग्यता –
०४. वर्तमान व्यवसाय -
०५. प्रकाशन (पत्र-पत्रिकाओं के नाम) –
०६. प्रकाशित कृति का नाम –
०७. ब्लॉग्स का यूआरएल – (यदि हो तो)
०८. अन्य विवरण ( संक्षिप्त में लिखें)
०९. पत्र-व्यवहार का संपूर्ण पता (ई-मेल सहित)

– हस्ताक्षर

’सृजन’ विशाखपटनम ने आयोजि‍त की पावस कवि‍गोष्ठी

विशाखपटनम की स्थानीय हिन्दी साहि‍त्य संस्थात ‘सृजन’ ने डाबा गार्डेन्स स्थि‍त पवन एनक्लेव में वर्षा ऋतु और प्रकृति‍ पर केंद्रि‍त पावस कवि‍ गोष्ठी का आयोजन कि‍या। सृजन के अध्यक्ष नीरव कुमार वर्मा ने अध्य‍क्षता की और कार्यक्रम का संचालन सृजन के सचि‍व डॉ टी महादेव राव ने कि‍या।

स्वागत भाषण करते हुए डॉ टी महादेव राव ने संस्था की गति‍वि‍धि‍यों का वि‍वरण प्रस्तुत कि‍या और पावस कवि‍गोष्ठी कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। वर्षा, वर्षाऋतु और प्रकृति‍ में वर्षा के कारण होने वाले परि‍वर्तनों से प्रभावि‍त होकर कवि‍ लि‍खने के लि‍ये प्रेरि‍त होता है और ऐसे उत्साही और उल्लास भरे माहौल में नये कवि‍यों और वरि‍ष्ठ रचनाकारों को प्रोत्साहि‍त करने के उद्देश्य से ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन सृजन करता आ रहा है। इससे न केवल नई रचनाओं का जन्म होता है बल्कि हमारा हि‍न्दी साहि‍त्य भी नये सौंदर्य से अलंकृत होता है।

सृजन के अध्यक्ष नीरव कुमार वर्मा ने कहा कि‍ वि‍गत आठ वर्षों से, साहि‍त्य सृजन करने वाले कवि‍यों और लेखकों को संबल प्रदान करने वाली संस्था, सृजन सही मार्गदर्शन कर रही है। सभी रचनाकार इस संस्था में आयेंगे और हम जो गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम आयोजि‍त कर रहे हैं, उन्हें और अधि‍क स्तरीय बनाने में सहयोग करेंगे ऐसा मेरा वि‍श्वा‍स है। उन्होंने कहा साहि‍त्य का अर्थ है समाज का हि‍त चाहने वाला और कवि‍, लेखक समाज के प्रति‍ अपने कर्तव्यों और दायि‍त्वों के बारे में अधि‍क जागरूक होते हैं। आज के युग में समाज के हि‍त में रचनाधर्मि‍ता अपनाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर हाल ही में हि‍न्दी शोध के लि‍ये डाक्टनरेट उपाधि‍ पाने वाले संस्था के संयुक्त सचि‍व एवं राष्ट्रीय स्तर के युवा अनुवादक, रचनाकार डॉ संतोष अलेक्स का संस्था द्वारा सम्मा‍न कि‍या गया। इस कार्यक्रम में वि‍जयकुमार राजगोपाल, वेंकटलक्ष्मी, सीएच ईश्वर राव ने भी सक्रि‍य रूप से हि‍स्सा लि‍या। संस्था के संयुक्त सचि‍व डॉ संतोष अलेक्स के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।

आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी , हैदराबाद द्वारा वर्ष २०१० के पुरस्कारों की घोषणा


आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी, हैदराबाद द्वारा वर्ष २०१० के हिंदी दिवस के संदर्भ में आंध्र प्रदेश के हिंदी सेवियों और हिंदी साहित्यकारों को विभिन्न पुरस्कार प्रदान किये जाने की घोषणा की गई है। अत्यंत हर्ष का विषय है कि इस वर्ष का हिंदीभाषी लेखक पुरस्कार विगत बीस वर्षों से दक्षिण भारत में हिंदी के उच्च स्तरीय अध्यापन और शोधकार्य के साथ निरंतर विविध विधाओं में श्रेष्ठ आलोचनात्मक तथा सृजनात्मक मौलिक लेखन के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य की सेवा कर रहे डॉ। ऋषभ देव शर्मा को प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है। १९५७ में उत्तर प्रदेश में जन्मे डॉ. ऋषभ देव शर्मा के तीन कविता संकलन 'तेवरी', 'तरकश' तथा 'ताकि सनद रहे ' प्रकाशित हैं। 'तेवरी चर्चा' और 'हिंदी कविता : आठवाँ नवाँ दशक' जैसी समीक्षात्मक कृतियों के अलावा उनकी अनेक रचनाएँ पत्रपत्रिकाओं और ब्लोगों के माध्यम से पर्याप्त लोकप्रियता प्राप्त कर चुकी हैं। उन्हें एक दर्ज़न से अधिक महत्त्वपूर्ण पुस्तकों के संपादन और सहलेखन का भी श्रेय प्राप्त है।

उल्लेखनीय है कि अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष एक तेलुगुभाषी हिंदीसेवी को दिए जाने वाले 'पद्मभूषण मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार' हेतु इस वर्ष डॉ. सी. शेषगिरि राव का चयन किया गया है। संस्था के निदेशक डॉ. के वी एल एन एस शर्मा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि पद्मभूषण मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार के लिए नकद एक लाख रुपये तथा हिंदीभाषी लेखक पुरस्कार के लिए पच्चीस हज़ार रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है। विज्ञप्ति के अनुसार इस वर्ष दक्षिण भारतीय भाषेतर हिंदी लेखक पुरस्कार डॉ. किशोरी लाल व्यास को,उत्तम अनुवाद पुरस्कार वाई सी पी वेंकट रेड्डी को तथा तेलुगुभाषी युवा हिंदी लेखक पुरस्कार डॉ. सत्यलता को प्रदान किए जाएँगे। ये तीनों पुरस्कार भी पच्चीस-पच्चीस हज़ार के हैं।

इनके अतिरिक्त तेलुगु और हिंदी भाषियों द्वारा लिखित सोलह हिंदी रचनाओं के प्रकाशन हेतु अकादमी द्वारा दो लाख के आर्थिक अनुदान की भी घोषणा की गई है। ये सभी पुरस्कार १४ सितम्बर को हिंदी दिवस के अवसर पर प्रदान किए जाएँगे।

आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी के पुरस्कारों के लिए चयित सभी हिंदी सेवियों और साहित्यकारों को बधाई !!!


चंद्र मौलेश्वर