रविवार, 31 जनवरी 2010

'सृजन' द्वारा 'साहि‍त्‍य चर्चा' का सफल आयोजन


स्‍थानीय साहि‍त्‍य संस्‍था 'सृजन' ने डाबा गार्डेन्‍स स्‍थि‍त पवन एनक्‍लेव में साहि‍त्‍य चर्चा कार्यक्रम का भव्‍य आयोजन कि‍या। मुख्‍य अति‍थि थे सेवा मुक्‍त वरि‍ष्‍ठ हि‍न्‍दी आचार्य प्रो. एस. एम. इकबाल। अध्‍यक्षता की सृजन के अध्‍यक्ष नीरव कुमार वर्मा ने और कार्यक्रम का संचालन सृजन के सचि‍व डॉ. टी. महादेव राव ने कि‍या। स्‍वागत भाषण करते हुए डॉ. टी. महादेव राव ने संस्‍था की गति‍वि‍धि‍यों का वि‍वरण प्रस्‍तुत कि‍या और साहि‍त्‍य चर्चा कार्यक्रम के उद्देश्‍यों पर प्रकाश डाला। उन्‍होंने कहा कि‍ इस तरह के कार्यक्रमों से नए लेखकों को प्रोत्‍साहन तो मि‍लता ही है साथ ही पुराने रचनाकारों को भी साहि‍त्‍य सृजन के लि‍ए प्रेरणा मि‍लेगी, जि‍ससे नए साहि‍त्‍य का सृजन होगा और हमारा हि‍न्‍दी साहि‍त्‍य नई ऊँचाइयाँ छू सकेगा।

मुख्‍य अति‍थि‍ प्रो एस एम इकबाल ने आयोजि‍त कार्यक्रमों के माध्‍यम से हि‍न्‍दी साहित्‍य की नि‍स्‍वार्थ सेवा करती सृजन संस्‍था की सराहना की। उन्‍होंने अपने उदबोधन में कहा कि‍ साहि‍त्‍य का अर्थ है समाज का हि‍त चाहने वाला और समाज के प्रति‍ अपने कर्तव्‍यों और दायि‍त्वों के बारे में अधि‍क जागरूक होते हैं कवि‍ और लेखक और समाज के हि‍त में रचनाधर्मि‍ता अपनाने की आज के युग में आवश्‍यकता है।‍ सृजन के अध्‍यक्ष नीरव कुमार वर्मा ने कहा कि‍ वि‍गत सात वर्षों से साहि‍त्‍य सृजन करने वाले कवि‍यों और लेखकों को संबल प्रदान करने वाली संस्‍था सृजन सही मार्गदर्शन दे रहा है। सभी रचनाकार ऐसी संस्‍था में आएँगे और गुणवत्‍तापूर्ण कार्यक्रम हम जो आयोजि‍त कर रहे हैं, उन्‍हें और अधि‍क स्‍तरीय बनाने में सहयोग करेंगे ऐसा वि‍श्‍वास है।

साहि‍त्‍य चर्चा कार्यक्रम की शुरुआत सीमा वर्मा की कहानी 'छोटी' से हुआ, जि‍में उन्‍होंने मानवीय संबंधों में आते बदलाव की और अनुभूति‍यों की बात की। तोलेटि‍ चंद्रशेखर ने अपनी कवि‍ता मदारी में वर्तमान समय में आम बादमी की दुर्दशा और कठि‍न परि‍स्‍थि‍ति‍यों को रेखांकि‍त कि‍या। एन.डी. नरसि‍म्‍हा राव ने कहानी शांति‍ के माध्‍यम से वि‍धवा वि‍वाह की बात कही। रामप्रसाद यादव ने बिंबों से भरी अपनी प्रभावी कवि‍तायें द्रौपदी और सीता, गुलाब और धरती सुनाई। संगीता राज ने मर्मस्‍पर्शी दो कवि‍तायें सुनाई जो कि‍ कोमल अनुभूति‍यों के शब्‍द चि‍त्र प्रतीत हो रहे थे। भारती शर्मा (प्रभात भारती) ने ताजमहल पर कवि‍ता पढी जो कि‍ वि‍वि‍ध आयाम लि‍ए हुए था। वीरेंद्र राय की कवि‍ताओं में जीवन के लक्षणों के बारे में बिंबात्‍मक लेकि‍न मन को छूती अनुभूति‍यों और संवेदनाओं की उपस्‍थि‍ति‍ थी। बी.वी. राव और डॉ.जी. रामनारायण ने तेलुगु से अनूदि‍त कवि‍तायें मैं भी पढूँगा और मातृ सौंदर्य लहरी का पाठ कि‍या। जी अप्‍पाराव राज ने राजनीति‍क व्‍यंग्‍य कवि‍तायें सुनाई जो कि‍ वर्तमान व्‍यवस्‍था पर चोट थीं। सीमा शेखर ने प्रकृति‍, औरत और वि‍शाखपटनम शीर्षक से स्‍त्री की वि‍वशता, प्रकृति‍ का प्रकोप और शहरीकरण से दूषि‍त होते वातावरण की बात अपनी कवि‍ताओं में कही। डॉ वि‍जय गोपाल संक्रांति‍ और पतंग शीर्षक कवि‍ता में आजकल के परि‍वेश का बिंबात्‍मक प्रस्‍तुति‍ की। संतोष अलेक्‍स ने सामयि‍क स्‍थि‍ति‍यों पर गजल पढी। नीरव कुमार वर्मा ने अपने व्‍यंग्‍य आम ही आम में हारस्‍य व्‍यंग्‍य के साथ नौकरीपेशा व्‍यक्‍ति‍यों की परेशानि‍यों का खुलासा कि‍या। डॉ. टी. महादेव राव ने अपनी सामयि‍क गजलों में शहरीकरण के कारण दूर होते संबंध और अभि‍नय करते चेहरों की बात आशावादी स्‍वर के साथ प्रस्‍तुत कि‍या। इस कार्यक्रम में डॉ नरसा रेड्डी, वि‍जयकुमार राजगोपाल, मुनि‍चन शा आदि‍ अन्‍य लोगों ने भी सक्रि‍यमा के साथ हि‍स्‍सा लि‍या। सभी रचनाओं पर सार्थक चर्चा हुई और अच्‍छे सुझाव भी रचनाकारों को दी गई। प्रो. एस.एम. इकबाल ने प्रति‍भागि‍यों को स्‍मृति‍चि‍ह्न प्रदान कि‍ए। संतोष अलेक्‍स के धन्‍यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम संपन्‍न हुआ।

नंद चतुर्वेदी की संस्मरण पुस्तक 'अतीत राग' पर गोष्ठी का आयोजन


उदयपुर में जन संस्कृति मंच द्वारा नंद चतुर्वेदी की संस्मरण पुस्तक 'अतीत राग' पर आयोजित एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। सुप्रसिद्ध आलोचक एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ. रामबक्ष ने इस अवसर पर कहा कि कल्पनाशीलता का पुराना युग समाप्त हो गया है और अब इसकी आंशिक संभावना गद्य में ही दिखाई दे रही है। तथ्य के प्रति बढ़ रहा आकर्षण बताता है कि पाठक अब ठीक-ठीक जानना चाहता है। यही कारण है कि नयी शताब्दी में कथेतर गद्य विधाओं को पारम्परिक विधाओं की तुलना में अधिक पसंद किया जा रही है। नये विश्व का स्वप्न अभी हमारे सामने नहीं है और वास्तविकता को जानने की आकांक्षा इसका स्थान ले रही है। उन्होंने 'अतीत राग' को कई कोणों से महत्वपूर्ण पुस्तक बताते हुए रहा कि कवियों का गद्य विद्वत समाज में आकर्षण का बिन्दु रहा है।

गोष्ठी के समालोचक डॉ. माधव हाड़ा ने कहा कि इस पुस्तक में नंद बाबू ने स्मृति का रचनात्मक उपयोग किया है। व्यतीत समय और समाज के विभिन्न सरोकारों, द्वन्द्वों और संशयों को एक साथ यहाँ देखना प्रीतिकर है। नंद बाबू स्मृति लिखते हुए भी अमूर्तन से बचते हैं और दूसरों के बहाने अपना जीवन संघर्ष भी पाठकों के समक्ष रखते हैं। युवा समीक्षक डॉ. पल्लव ने पुस्तक पर पत्र वाचन में कहा कि विधाई अंतर्क्रिया का अनुपम मेल इस पुस्तक में मिलता है। उन्होंने संस्मरणों की भाषा की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह कोई वायवीय संसार नहीं अपितु, लड़ते-संघर्ष करते मामूली लोगों के जीवन की दुनिया है। राजस्थान विद्यापीठ में हिन्दी सह आचार्य डॉ. मलय पानेरी ने पुस्तक में आए स्वतंत्रता सेनानियों के संस्मरणों को इतिहास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नंद बाबू ने विस्मृत होते जा रहे देश नायकों को चित्रित किया है। शोध छात्र गजेन्द्र मीणा ने गाँधी हत्या पर लिखे वृत्तान्त को नई पीढ़ी के लिए प्रेरक बताया।

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. नवल किशोर ने कहा कि सृजनात्मक गद्य का आस्वाद देती इस पुस्तक में नंद बाबू ने बड़े लेखकों-नेताओं के साथ स्थानीय लेखकों-कार्यकताओं को स्थान देकर प्रशंसनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज से अब जिस सामुदायिकता का तेजी से लोप होता जा रहा है उसका समृद्ध चित्र इन संस्मरणों में मिलता है। कवि नंद चतुर्वेदी ने पुस्तक को लिखे जाने का वृतान्त बताते हुए कहा कि आकस्मिक प्रसंगों में लिखे गए ये स्मृति आलेख उन लोगों का स्मरण है जिनका स्नेह उन्हें मिला है। उन्होंने कहा कि इन मूल्यवान जिंदगियों से हमारे बहुत से संशयों की निरर्थकता का उच्छेदन करने में मदद मिलती है। गोष्ठी का संयोजन कर रहे जसम के राज्य सचिव हिमांशु पण्ड्या ने कहा कि पुस्तकों पर चर्चा के साथ जरूरी विषयों पर बहस के आयोजन जसम द्वारा निरंतर किए जाएँगे। गोष्ठी में डॉ. मंजु चतुर्वेदी, डॉ. हुसैनी बोहरा, सहित अन्य वक्ताओं ने भी भागीदारी की। अंत में गणेशलाल मीणा ने सभी का आभार माना।

-हिमांशु पण्ड्या

मनोज भावुक के भोजपुरी कविता संग्रह चलनी में पानी का लोकार्पण

पूर्वांचल एकता मंच द्वारा दिल्ली में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मेलन में उतर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस सांसद श्री जगदिम्बका पाल के हाथों भोजपुरी के प्रख्यात साहित्यकार मनोज भावुक के गीत संग्रह चलनी में पानी का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता श्री शत्रुघ्न सिंहा, महुआ चैनल के चेयरमैन श्री पीके तिवारी, भोजपुरी सुरसम्राट मनोज तिवारी एवं लोकगायिका मालिनी अवस्थी जैसे लोग उपस्थित थे।

लोकार्पित पुस्तक की प्रशंसा करते हुए पूर्वांचल एकता मंच के अघ्यक्ष शिवजी सिंह ने कहा कि मनोज भावुक भोजपुरी के लोकप्रिय गजलकार एवं फिल्म समीक्षक है और इन्होंने अफ्रीका एवं ग्रेट ब्रिटेन आदि देशों में भोजपुरी का परचम लहराया है। इसलिए भोजपुरी साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट, बहुआयामी और बहुमुल्य योगदान के लिए इन्हें पूर्वाचल एकता मंच की ओर से भोजपुरी के अन्य शीर्ष कवियों के साथ डॉ प्रभुनाथ सिंह सम्मान से नवाजा गया।

विदित हो कि मनोज भावुक को उनके भोजपुरी गजल संग्रह 'तस्वीर जिन्दगी के' के लिए भी सन २००६ में भारतीय भाषा परिषद् सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्हें सम्मान प्रदान किया था ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी एवं आस्कर अवार्ड से सम्मानित सिंने जगत के नामी गीतकार गुलजार ने। एक मात्र भोजपुरी साहित्यकार कों यह सम्मान प्राप्त है। चलनी में पानी भावुक का दोहा एवं गीत संग्रह है। पुस्तक की भूमिका में डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव ने लिखा हैं कि यह जिन्दगी एक चलनी समान है। आदमी जिन्दगी भर इससे पानी उलीचता रह जाता है फिर भी आखिर में हासिल कुछ भी नहीं होता। नश्वरता दर्शन का ऐसा विम्ब साहित्य में दुर्लभ नहीं तो कम अवश्य है। चलनी में पानी सहज प्रयोग में भी गूढ़ दर्शन को व्यक्त करता है। भावुक ने एक दोहा में कहा है -
चलनी में पानी भरत बीतल उम्र तमाम
तबहू बा मन में भरम कइनी बहुते काम!

विश्व भोजपुरी सम्मेलन में उपस्थित लाखों दर्शकों ने तालियाँ बजाकर मनोज भावुक के इस लोकार्पित पुस्तक का स्वागत किया।

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की वेबसाइट

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय का यह प्रयास रहा है कि वह हिंदी को अन्तरराष्ट्रीय भाषा बनने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए। यह तभी संभव हो सकता है जब हिंदी न सिर्फ गंभीर विमर्श का माध्यम बने बल्कि हिंदी में लिखा गया महत्वपूर्ण साहित्य अंतरराष्ट्रीय पाठक समुदाय तक पहुँचे।

विश्वविद्यालय पिछले कुछ वर्षों से ज्ञान के विभिन्न अनुशासनों में शिक्षा और अनुसंधान के अतिरिक्त स्तरीय पुस्तकें प्रकाशित करने का काम भी कर रहा है। इसी क्रम में हमने यह निर्णय लिया है कि हिंदी में जो कुछ महत्वपूर्ण लिखा गया है, उसे अगले कुछ वर्षों में एक वेबसाइट के जरिये इंटरनेट पर, दुनिया भर में फैले गंभीर पाठकों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों को उपलब्ध कराया जाए।

हिंदी साहित्य, संदर्भ लेखों, विमर्शों, लेखक निर्देशिका,छवि संग्रहों को पाठकों,छात्रों, शोधार्थियों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध करवाने के गंभीर उद्देश्य के साथ विश्वविद्यालय द्वारा- हिंदी समय डॉट कॉम नामक वेबसाइट का आरंभ किया गया है। महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.hindisamay.com के द्वारा यह प्रयास किया जा रहा है कि भारतेन्दु काल से लेकर हिन्दी की अब तक की महत्त्वपूर्ण व लोकप्रिय पुस्तकों व साहित्य को हम इंटरनेट पर प्रकाशित कर पाठकों व पुस्तकों के बीच की दूरी पाटी जा सके। इस प्रयास के द्वारा पुस्तकों से विमुख होती नई पीढी को फिर से पुस्तकों की ओर आकर्षित करने में समर्थ हुआ जा सकेगा।

डॉ.अभिज्ञात को अम्बडेकर उत्कृष्ट पत्रकारिता सम्मान


कोलकाताः रविवार की देर रात तक आयोजित एक भव्य समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए अम्बेडकर सम्मान प्रदान किये गए। डॉ. अभिज्ञात को उत्कृष्ट पत्रकारिता सम्मान आरके एचआईवी एड्स रिसर्च एंड केयर सेंटर के चेयरमैन डॉ.धर्मेन्द्र कुमार ने प्रदान किया। दो दशकों से पत्रकारिता कर रहे डॉ. अभिज्ञात सम्प्रति सन्मार्ग में वरिष्ठ उप-सम्पादक हैं। वे साहित्य में भी सक्रिय हैं और छह कविता संग्रह तथा दो उपन्यास प्रकाशित हुए हैं। साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें पाँच पुरस्कार-सम्मान मिले हैं। यह समारोह उपनगर टीटागढ़ में आयोजित था।

महिलाओं के विकास में योगदान के लिए डॉ. सुरंजना चौधरी, ग्लोबल पर्सनालिटी आफ द ईयर रमेश प्रसाद हेला, औद्योगिक उपलब्धि सम्मान लोकनाथ गुप्ता, अम्बेडकर गुरुद्रोण सम्मान नृत्यानंद जी महाराज, सामाजिक जागरुकता सम्मान डॉ.संतोष गिरि, मैन आफ द ईयर सम्मान आत्माराम अग्रवाल, उभरता मीडिया उद्योग सम्मान विजन खबरा खबर (चैनल विजन) और यूथ आइको आफ द ईयर अवार्ड शिव प्रसाद गोसाईं को प्रदान किया गया। कार्यक्रम डॉ.भीमराव अम्बेडकर शिक्षा निकेतन और आरके एचआईवी एड्स रिसर्च एंड केयर सेंटर की ओर से आयोजित था। इस अवसर पर टीटागढ़ डॉ.भीमराव अम्बेडकर शिक्षा निकेतन संस्था का उद्घाटन, डॉ.अम्बेडकर और संस्था के संस्थापक स्व.मक्खनलाल की मूर्ति का अनावरण उद्योगपति आत्माराम अग्रवाल ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ उपस्थित श्रोताओं ने उठाया। आराधना सिंह ने भोजपुरी गीत पेश किए।

प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान में आचार्य नंदकिशोर हिन्द स्वराज की प्रासंगिकता पर व्याख्यान


रायपुर, १६ जनवरी। महात्मा गांधी द्वारा रचित विश्व प्रसिद्ध कृति हिन्द स्वराज की १०० वीं वर्षगाँठ के अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के सभागार में हिन्द स्वराज्य की प्रासंगिकता विषय पर एक व्याख्यान आयोजन प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान द्वारा किया गया। उक्त अवसर पर प्रख्यात आलोचक श्री भगवान सिंह की नाट्यकृति बिन पानी बिन सुन का विमोचन श्री नंदकिशोर आचार्य के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर बोलते हुए ख्यातिनाम गांधीवादी, चिंतक और लेखक जयपुर के नंदकिशोर आचार्य ने कहा कि गांधी जी की किताब हिन्द स्वराज्य आधुनिक एवं दार्शनिक दृष्टि से आज अधिक प्रासंगिक है। उन्होंने हिन्द स्वराज्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि स्वदेशी, स्थानीय जरूरतों के लिए स्थानीय संस्थानों द्वारा स्थानीय लोगों के लिए विकसित तकनीक है। हिन्द स्वराज्य अपने आप में एक सनातन प्रासंगिकता है। प्राणियों में मनुष्य में चेतना का विकास हुआ और बाद में उसमें हस्तक्षेप करने की क्षमता विकसित हुई। वर्तमान मनुष्य पर निर्भर करता है कि वह उसका उपयोग विकास के लिए करें या विनाश के लिए। उन्होंने तीन महान विचारकों की पुस्तकों का जिक्र करते हुए कहा कि एडम स्मिथ ने उत्पादन पर जोर दिया उससे बाजार की समस्या उत्पन्न हो गई परिणाम स्वरूप यह सिद्धांत समस्या सुलझाने में असमर्थ हो गया। इसी तरह कार्ल माक्र्स ने उत्पादन पर समाज के अधिकार का सिद्धांत दिया जिससे कार्पोरेट सेक्टर के पास स्वामित्व चला गया और रूस में एकाएक आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया। जबकि गांधी जी के हिन्द स्वराज में ऐसी व्यवस्था पर बल दिया गया है जो समतामूलक एवं अहिंसात्मक हो। उन्होंने कहा कि प्रकृति और मनुष्य के बीच का संबंध ही आपसी रिश्तों को बढ़ाएगा और आज के इस वैज्ञानिक युग में यह हम सब पर निर्भर करता है कि विकास अथवा विनाश में से कौन सी स्वतंत्रता चाहते हैं।

इसके पूर्व व्याख्यान कार्यक्रम के आरंभ में भागलपुर से आए चर्चित आलोचक श्रीभगवान ने कहा कि गांधी जी उपनिवेशवाद के विरोधी थे और सर्व समाज एवं सभी देशों के आगे बढऩे की बात करते थे। उन्होंने कहा कि विज्ञान का मतलब ज्ञान का सोच समझकर उपयोग करना है। गांधी जी भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल आचरण, नीतियों और श्रुतियों के अनुसार विकास की बात करते थे। गांधी जी स्वावलंबन और स्वायतता की बात करते थे क्योंकि उससे ही देश में सबको रोजगार मिलने के साथ ही आत्मनिर्भर बढ़ सकती थी। कालान्तर से देश में ही उनके हिन्द स्वराज की कल्पना की उपेक्षा कर दी गई मगर आज उसकी प्रासंगिकता और बढ़ गई है। श्री भगवान ने कहा कि गाँधी जी के सिद्धांतों में ग्रामीण स्वावलंबन की भावना छुपी हुई है। पश्चिमी दौड़ के कारण अपव्यय तथा धन का दुरूपयोग बढ़ा है जिस पर किसी का ध्यान नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि गांधी जी के सिद्धांतों को याद नहीं किया गया तो हम सब पर भारी संकट आने वाला है।

व्याख्यान के अध्यक्षीय उद्बोधन में कवि विश्वरंजन ने कहा कि एडम स्मिथ कार्ल मार्क्स एवं समतावादी समाज की संरचना से ज्यादा वैज्ञानिक व्यवहारिक, सोच गांधी जी की थी। गांधी जी नए युग के मनुष्य के लिए सबसे बड़े प्रकाशपुंज की तरह हैं। आज हम उनकी बुनियाद को अपने अंदर कितना गहरे में उतार पाते हैं यह आज की सबसे बड़ी प्रासंगिकता है। उन्होंने कहा कि बस्तर में पहले सामंतवादी माहौल था उसके बाद वन संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण अधिनियम के कारण आदिवासियों को काफी दिक्कतें आई। इन्हीं सबके चलते नक्सलवादी जैसी ताकतों को पैर पसारने के लिए अवसर मिल गया। उन्होंने कहा कि नक्सली सिद्धांत हिंसा पर केन्द्रित है और आखिर में वह टूटेगी पर बहुत नुकसान के बाद। उन्होंने कहा कि बस्तर की परिस्थिति अलग है कितने भी तथाकथित गांधीवादी हों वे नक्सली सुरंग के बीच जाकर बताएँ। विश्वरंजन ने कहा कि सोच वाला व्यक्ति निडर होता है। गांधी जी बड़े सत्यान्वेषी थे। उनकी सोच समतावादी थी। जो लोक के लिए सुविधाजनक है वह प्रासंगिक है।

कार्यक्रम के अंत में प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान की ओर से संस्थान के अध्यक्ष विश्वरंजन ने नंदकिशोर आचार्य और श्रीभगवान को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। आरंभ में अतिथियों का पुष्पहार से स्वागत किया गया। इस अवसर पर श्रीमती इंदिरा मिश्र, विनोद कुमार शुक्ल, नंदकिशोर तिवारी, राजेन्द्र मिश्र, बसंत तिवारी, संस्कृति आयुक्त राजीव श्रीवास्तव, प्रभाकर चौबे, रवि भोई, अशोक सिंघई, केयूर भूषण, गुलाब सिंह, प्रभाकर चौबे, विनोद शंकर शुक्ल, सुभाष मिश्र, जयप्रकाश मानस डी.एस.अहलुवालिया, डॉ. प्रेम दुबे, डॉ. वंदना केंगरानी, एच.एस.ठाकुर, एस. अहमद, संजीव ठाकुर, डॉ,सुधीर शर्मा, राम पटवा, हसन खान, अलीम रजा, नईम रजा, विनोद मिश्र, रवि श्रीवास्तव, विनोद साव, कमलेश्वर, बी. एल. पॉल, चित्रकार सुश्री सुधा वर्मा, एवं बड़ी संख्या में दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर और रायपुर के लेखक, पत्रकार, एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।
-- राम पटवा

आकाशवाणी पटना के प्रादेशिक समाचार एकांश का स्वर्ण जयंती समारोह

पटना, २८ दिसम्बर २००९, आकाशवाणी पटना के प्रादेशिक समाचार एकांश के ५० वर्ष पूरा होने पर आज यहाँ आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन करते हुए विधान परिषद के सभापति ताराकांत झा ने कहा कि आकाशवाणी के समाचार देश हित को ध्यान में रखते हुए प्रसारित किए जाते रहे हैं। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में आकाशवाणी पटना से प्रसारित समाचार सामाजिक सद्भाव फैलाने में सहायक रहे हैं। खबरों की विश्वसनीयता के मामले में भी आकाशवाणी के समाचार सभी से आगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि को बढ़ावा देने के क्षेत्र में भी आकाशवाणी की भूमिका राज्य सरकार से ज्यादा महत्वपूर्ण रही है।

इस अवसर पर आकाशवाणी पटना के समाचार संपादक संजय कुमार द्वारा संपादित और प्रभात प्रकाशन नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित पुस्तक ''आकाशवाणी समाचार की दुनिया'' का लोकापर्ण भी विधान परिषद के सभापति ताराकांत झा द्वारा किया गया। समारोह में ''ग्रामीण विकास में आकाशवाणी की भूमिका'' विषय पर विस्तार से संबोधित करते हुए पत्र सूचना कार्यालय के संयुक्त निदेशक अरूण कुमार वर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में विकास योजनाओं की जानकारी सबसे पहले देने में आकाशवाणी के समाचारों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार की विकास की योजनाओं को जनता तक सबसे पहले और तेजी से पहुँचाने में आकाशवाणी समाचार सबसे आगे रहे है। बिहार के विकास में भी आकाशवाणी पटना से प्रसारित समाचार की सफल सिद्ध हुए है। कार्यक्रम के दौरान प्रादेशिक समाचार एकांश से जुड़े अधिकारियों सर्वश्री केदार नाथ सिन्हा, एम.जेड.अहमद, अरूण कुमार वर्मा, विजय कुमार, शाह वासिफ इमाम को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विधायक आर.आर.कनौजिया, सुकुमार सिंह झा, आई.एच.खान, ध्रुव कुमार और तस्नीम कौसर सहित कई अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।