रविवार, 29 नवंबर 2009

'पत्रकारिता के सामाजिक सरोकार` विषय पर व्याख्यान


उदयपुर के माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय के नवगठित मीडिया अध्ययन केन्द्र में 'पत्रकारिता के सामाजिक सरोकार` विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए सुपरिचित कवि कथाकार शैलेय ने अपने व्याख्यान में कहा कि अख़बार आदमी का सबसे बड़ा दोस्त है जो सहकार का भाव पैदा करता है। यह हमें सजग - सतर्क बनाते हुए देश-काल-परिस्थिति का सही मूल्यांकन करने की शक्ति भी देता है। उन्होने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी को वह संस्कार किए जाने की ज़रूरत है जिससे वह सामाजिक सरोकारों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सके। जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा आयोजित पंचायत राज स्वर्ण जयन्ती समारोह के अन्तर्गत आयोजित इस व्याख्यान के मुख्य अतिथि वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, उदयपुर केन्द्र निदेशक प्रो. अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि बाजार वाद और भूमण्डलीकरण के बीच से ही भूख़मरी, रोज़गार और सूचनाओं की बहसों ने जन्म लिया है। यह ऐसा समय है जब श्वेत-श्याम में चीज़ों का विभाजन पूर्णत: बेमानी हो गया है और परिदृश्य धुंधला गया है। उन्होने हालिया घटनाओं का उल्लेख कर बताया कि जब हमारी सहिष्णुताएँ ख़तरे में हैं तब मीडिया को वह विवेकपूर्ण संस्कार देना होगा जो मनुष्यता के लिए आवश्यक है। प्रो. चतुर्वेदी ने मीडिया पाठ्यक्रमों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ समकालीन देश व समाज के अध्ययन से भी जोड़ने की आवश्यकता प्रतिपादित की। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार और 'प्रत्यूष' के सम्पादक विष्णु शर्मा 'हितैषी' ने पत्रकारों की युवा पीढ़ी का आह्वान किया की वह अपनी सामाजिक प्रतिबद्वता को चिन्हित करे ताकि पत्रकारिता के सरोकारों की सचमुच व्यापक प्रतिष्ठा सम्भव हो। मानविकी संकाय अध्यक्ष प्रो. श्रीनिवासन अरयर ने कहा कि क्षरण के विरुद्व अक्षर धर्म को अपनी भूमिका फिर से रेखांकित करनी होगी जिसे पत्रकारिता, शिक्षा और साहित्य की त्रिवेणी बनाती है। इससे पहले महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एन. के. पण्ड्या ने अतिथियों का स्वागत किया और मीडिया अध्ययन केन्द्र के समन्वयक डॉ. पल्लव ने विश्वविद्यालय के चांसलर प्रो. भवानी शंकर गर्ग के संदेश का वाचन किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ (मान्य विश्वविद्यालय) की कुलपति प्रो. दिव्य प्रभा नागर ने कहा कि सामाजिक सरोकारों वाली पत्रकारिता ने ही राजस्थान विद्यापीठ जैसी संस्थाओं को जन्म दिया है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा मीडिया अध्ययन केन्द्र के प्रारम्भ को गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यहाँ होने वाला अध्ययन अध्यापन पत्रकारिता के सामाजिक सरोकारों को प्रगाढ़ करेगा। प्रो. नागर ने मीडिया के समक्ष अभावग्रस्त दुनिया की ज़रूरतों को उजागर करने की चुनौती बताई। समारोह में प्रो. नागर ने केन्द्र द्वारा प्रकाशित परिचय पुस्तिका का विमोचन भी किया। संचालन केन्द्र की छात्रा मुक्ता व्यास ने किया। लोक शिक्षण प्रतिष्ठान के निदेशक सुशील कुमार ने आभार व्यक्त किया। समारोह में आकाशवाणी के निदेशक डॉ. इन्द्र प्रकाश श्रीमाली, बुनियादी शिक्षा के सम्पादक के. आर. शर्मा, डॉ. लक्ष्मी नारायण नन्दवाना, प्रो. सुरेन्द्र भाणावत, प्रो. पी. आर. व्यास सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, पत्रकार और विद्यार्थी उपस्थित थे।

डॉ. पल्लव

'काव्य हीरक' का लोकार्पण


टोराण्टो, कैनेडा - २३ अगस्त, २००९ को 'सद्भावना हिन्दी साहित्यिक संस्था'के संकलन काव्य हीरक का विमोचन किया गया। इसकी रूपरेखा इसी वर्ष ७ मार्च को, 'सद्भावना हिन्दी साहित्यिक संस्था' व 'वसुधा' हिन्दी साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका के तत्वावधान में राजभाषा हिन्दी की हीरक जयन्ती का महापर्व के अवसर पर बनी थी। इस अवसर को स्मरणीय बनाए रखने के लिए संस्था के कवियों का 'काव्य हीरक' संकलन प्रकाशित करने की घोषणा की गई थी। गणेश चौथ की पावन तिथि २३ अगस्त, २००९ को, गणेश वंदना एवं सरस्वती माँ की उपासना के साथ 'काव्य हीरक' का लोकार्पण संस्था की सबसे छोटी सदस्या तेरह वर्षीय कुमारी अमृता शाक्य द्वारा सम्पन्न हुआ। संकलन एवं काव्य-संगीत संगोष्ठी जैसे आयोजन हिन्दी के प्रचार-प्रसार की शृंखला से जुड़ी कड़ियाँ हैं। 'काव्य हीरक' से पहले भी दो काव्य संकलन 'काव्य-वृष्टि' तथा 'बौछार' संस्था द्वारा प्रकाशित किए जा चुके हैं।

हिन्दी प्रेमियों के एकत्रीकरण, मिलन व अल्पाहार के उपरान्त संस्था की अध्यक्षा श्रीमती स्नेह ठाकुर ने उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि आज हम सर्वप्रथम दीया स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में जलाएँगे जिनके रक्त की एक-एक बूँद के हम आभारी हैं। संस्था के वयोवृद्ध कवि श्री शांति स्वरूप सूरी जी ने सबकी ओर से श्रद्धांजलि का दीया प्रज्वलित किया सरस्वती वंदना का सामूहिक गान हुआ। श्री प्यारे लाल गौड़ व श्रीमती सत्या गौड़ ने स्वतंत्र भारत देश के प्रति एक गीत 'भारत देश है मेरा' की प्रस्तुति की, अमृता शाक्य का नृत्य हुआ और संकलन के कवियों की कविताओं का काव्य-पाठ हुआ। 'काव्य हीरक' संकलन के रचनाकार- श्री जगदीश चन्द्र शारदा 'शास्त्री', डॉ. मौना कौशिक, श्री गोपाल बघेल 'मधु', श्रीमती श्यामा सिंह, श्री रमन अग्रवाल एवं श्रीमती स्नेह ठाकुर हैं संकलन व संपादन श्रीमती स्नेह ठाकुर का है।

संगोष्ठी के अन्य प्रतिभागी हैं - श्री अमीर चन्द, श्रीमती मीना चन्द, श्रीमती बिन्दु बाउन्स, श्रीमती ममता मेहता, श्रीमती अर्चना गुप्ता, श्रीमती निशा लाल, श्रीमती रजनी सक्सेना, श्री जगमोहन मेहरा, श्री मदन सहगल, श्री वीरेन्द्र ढींगरा, श्रीमती लक्ष्मी ओंम, श्री अजय शेरावत, श्रीमती सविता शेरावत, श्रीमती पुष्पा सक्सेना, श्री शांति स्वरूप सूरी, श्री संदीप कुमार त्यागी, श्री आनन्द गोयल, श्री अतुल सक्सेना, श्रीमती अनीता भारद्वाज एवं श्रीमती नरेश भारद्वाज भी इस अवसर पर उपस्थित थे। संस्था की अध्यक्ष एवं वसुधा की संपादक-प्रकाशक श्रीमती स्नेह ठाकुर ने सभी विशिष्ट अतिथियों, समारोह में भाग लेने वाले सभी कलाकारों, श्रोताओं व संस्था के सदस्यों के प्रति आभार प्रदर्शित करते हुए उन्हें इस संगोष्ठी को सफल बनाने हेतु धन्यवाद दिया तथा भोजन के लिए आमंत्रित किया।

दस्तक नई पीढ़ी की सफलता पूर्वक संपन्न


दिल्ली, रविवार १५ नवंबर, राष्ट्रीय कवि संगम' के तत्वावधान में होने वाले 'दस्तक नई पीढ़ी की' के शीर्षक से तृतीय काव्योत्सव सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कविता पाठ के अतिरिक्त 'जगदीश मित्तल काव्य पुरस्कार' और 'दूसरी दस्तक' नामक एक काव्य संकलन का लोकार्पण भी किया गया। दिल्ली के पीतमपुरा स्थित टैक्निया सभागार में रविवार की सुबह काव्यप्रेमियों के उत्सव की बेला थी। नए कवियों को मंच से जोड़ने में संलग्न माननीय श्री जगदीश मित्तल जी के जन्मदिवस पर आयोजित 'दस्तक नई पीढ़ी की' प्रतिवर्ष १५ नए कवियों को मंच से रू-ब-रू कराता है। इस वर्ष इस शृंखला में श्री विनय शुक्ल 'विनम्र', श्री चरणजीत 'चरण', श्री शैलेन्द्र शर्मा 'शैल', श्री महेन्द्र प्रजापति, श्री नीरज मलिक, श्री रमन जैन, श्रीमती राजरानी भल्ला, श्री जतिन्दर 'परवाज़', श्री सत्येन्द्र सत्यार्थी, श्री अनिल गोयल, श्री अनुराग अगम, सुश्री शैलजा सिंह, श्री मनोज वाजपेई और श्री विनीत पाण्डेय आदि ने कविता पाठ किया। सभी कवियों ने अपनी मंत्रमुग्ध करने वाली कविताओं से श्रोताओं पर ऐसा सम्मोहन किया कि यह कार्यक्रम तय समय से दो घंटे अधिक चला। हास्य, ओज, शृंगार और संवेदना से भरी कविताएँ श्रोताओं को बाँधे रखने में समर्थ रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप-प्रज्जवलन करके किया गया। दीप-प्रज्जवलन का कार्य श्री जगदीश मित्तल, श्री नरेश शांडिल्य, डॉ. नन्द किशोर, श्री श्याम जाजू, श्री यूसुफ भारद्वाज और श्री राजेश जैन 'चेतन' के कर-कमलों से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में 'दूसरी दस्तक' का लोकार्पण किया गया। इस पुस्तक में पिछले वर्ष के 'द्वितीय काव्योत्सव' में शिरक़त करने वाले पन्द्रह युवा कवियों की रचनाएँ सम्मिलित हैं। पुस्तक का लोकार्पण श्री बलबीर सिंह 'करुण', श्री लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, श्री राजगोपाल सिंह और श्री यूसुफ़ भारद्वाज ने किया। युवा कवियों के प्रोत्साहनार्थ प्रारंभ किया गया 'जगदीश मित्तल काव्य पुरस्कार' युवा कवि श्री चिराग़ जैन को दिया गया। उन्हें यह पुरस्कार उनकी उत्कृष्ट काव्य साधना तथा सामाजिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता के लिए दिया गया। पुरस्कार स्वरूप युवा कवि को ग्यारह हज़ार रुपए की नकद राशि, एक प्रतीक चिन्ह तथा अंगवस्त्र भेंट किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आकाशवाणी के निदेशक श्री लक्ष्मीशंकर वाजपेयी ने की। युवा कवियों को आशीर्वचन देने के लिए श्री नरेश शांडिल्य, श्री राजगोपाल सिंह और श्री यूसुफ़ भारद्वाज मौजूद थे। इसके अतिरिक्त श्री बलबीर सिंह करुण, श्री धर्मचंद अशेष, श्री सीमाब सुल्तानपुरी और श्री बाग़ी चाचा समेत तमाम कवि कार्यक्रम की गरिमा बढ़ा रहे थे। साहित्य जगत, उद्योग जगत, प्रशासन, राजनीति तथा पत्रकारिता जगत की तमाम हस्तियाँ कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रही थीं। विनय शुक्ल 'विनम्र' के सरस संचालन को लम्बे समय तक याद रखा जाएगा। युवा कवि चिराग़ जैन को 'जगदीश मित्तल काव्य पुरस्कार' प्रदान करते हुए श्री लक्ष्मीशंकर वाजपेयी। साथ में हैं श्री नरेश शांडिल्य, श्री यूसुफ भारद्वाज, श्री बलबीर सिंह करुण, श्री जगदीश मित्तल।

जौक़ी की कहानी 'बेहद नफ़रत के दिनों में' अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के लिए स्वीकृत

सन २०१०, दिल्ली में होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के लिए प्रसिद्ध साहित्यकार मुशर्रफ़ आलम ज़ौक़ी की कहानी 'बेहद नफरत के दिनों में' का चयन किया गया है। यह कहानी भारत-पाक बनते-बिगड़ते संबंधों को नई दिशा देने का काम करेगी।

इस नाटक के निर्देशक दौलत वैद्य, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से जुड़े रहे हैं। दौलत वैद्य के निर्देशन में इस कहानी का पहला मंचन २३ सितंबर, जयपुर के जवाहर कला केन्द्र में सम्पन्न हुआ। एक तरफ़ दो देशों के बीच फैली नफ़रत की आग है तो दूसरी ओर दो जवाँ दिलों के बीच पनपती कोमल भावनाएँ। नफ़रत पर प्यार करने वालों की जीत होती है। लेकिन समाज को यह नागवार गुज़रता है। और सामने आती है नफ़रत। कथानक के अनुसार भारत में रहने वाला हिन्दू युवक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक पदाधिकारी का बेटा है। वहीं पाकिस्तान में रहने वाली युवती का भाई कट्टरवादी संगठन तालिबान का सदस्य है। इंटरनेट की वेबसाइट पर दोनों का परिचय होता है। और प्रेम और नफ़रत की नई कहानी २६/११ की त्रासदी के बीच जन्म लेती है। नाट्य-निर्देशक दौलत वैद्य के अनुसार बांग्लादेश, लंदन और पाकिस्तान में भी इसके मंचन की तैयारियाँ चल रही हैं, और इसे वो भारत के प्रत्येक राज्य में करने का इरादा रखते हैं क्योंकि आज के निर्मम वातावरण में इस नाटक के संदेश को दूर तक पहुँचाना ही एक मात्र विकल्प है।

निशांत रंजन

'साउथ एशियन्स इन ऑन्टेरियो' द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन


टोराण्टो, कैनेडा : ३० अगस्त को श्री सैम चौपड़ा व श्रीमती सविता चौपड़ा ने 'साउथ एशियन्स इन ऑन्टेरियो' संस्था के तत्वावधान में स्वतंत्रता दिवस का रंगारंग भव्य कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस समारोह में मुख्य अतिथि टोराण्टो स्थित भारतीय कोंसुलावास की प्रथम महिला कोंसुलाध्यक्ष माननीया श्रीमती प्रीति सरन जी, विशिष्ट अतिथि कैनेडा के मेम्बर्स ऑफ पार्लियामेण्ट, ऑन्टेरियो के मेम्बर्स ऑफ प्रोवेन्शियल पार्लियामेण्ट, यॉर्क रीज़न पुलिस प्रमुख, अन्य अतिथि तथा ६०० से अधिक श्रोतागण उपस्थित थे। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति और हिन्दी का प्रचार-प्रसार है। सुस्वादु अल्पाहार से साँझ के छः बजे आरम्भ होने वाला स्वतंत्रता दिवस का यह उत्सव रात्रि के स्वादिष्ट भोजनोपरांत समाप्त हुआ और बीच के चार घंटों में बही संस्कृति, साहित्य, कला की त्रिवेणी।

काव्य, संगीत, नृत्य की गंगा-जमुना-सरस्वती के संगम की धारा-प्रवाहों ने सभी को प्लावित किया, आनन्दित किया। सभी कलाकारों द्वारा देश-प्रेम की अभिव्यक्ति ने सभी को अभिसिंचित किया। हॉल बार-बार 'भारत माता की जय' के नारो से गुंजित हुआ। आप्रवासी भारतीयों व भारतवंशियों के लिये यह गर्व का विषय था कि अभारतीयों ने भी समारोह की व भारत की दिल खोलकर प्रशंसा करी। इस कार्यक्रम में श्रीमती स्नेह ठाकुर को भी देश के प्रति कविता कहने के लिए आमंत्रित किया गया और ऑन्टेरियो की मेम्बर ऑफ प्रोवेन्शियल पार्लियामेण्ट माननीया लॉरा अल्बनीज़े द्वारा भारत के ६२वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रशंसा पत्र, कैनेडा की मेम्बर ऑफ पार्लियामेण्ट माननीया डॉ. रूबी धल्ला के कर-कमलों द्रारा प्रदान किया गया।

गुरमीत बेदी की कहानी पर बनेगी पहली बड़े बैनर की फ़िल्म

हिमाचल प्रदेश की संस्कृति, परिवेश और पृष्ठभूमि पर पहली बड़े बैनर की हिंदी फ़िल्म रुपहरे पर्दे पर आने वाले समय में देखने को मिलेगी जिसमें तमाम कलाकार भी हिमाचली होंगे। इस फिल्म के ज़रिए देश भर के करोड़ों फ़िल्म प्रेमियों को हिमाचल प्रदेश की खूबसूरती, यहाँ के रीति-रिवाजों, कलात्मक धरोहर, खान-पान और पहरावे के साथ-साथ यहाँ के युवाओं की अभिनव क्षमता से रूबरू करवाने का बीड़ा स्काईवेज मीडिया एंटरटेनमैंट प्रा. लिमिटेड ने उठाया है। ऊना के डीपीआरओ और देश के युवा उपन्यासकार गुरमीत बेदी की कहानी और संवादों पर आधारित इस फ़िल्म की शूटिंग हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर होंगी। यह खुलासा फिल्म के निर्माता राजेंद्र सैणी ने आज यहाँ एक पत्रकार सम्मेलन में किया। श्री सैणी ने बताया कि पिछले दिनों रिलीज हुई एक चर्चित पंजाबी फ़िल्म के सह प्रोड्यूसर परमिंदर सिंह इस फ़िल्म के निदेशक होंगे। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश को फोकस में रखकर बड़े बैनर की फ़िल्म बनाना उनका सपना था जो जल्दी ही मूर्त रूप ले लेगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की माटी ने सिनेजगत को देवानंद, अनुपम खेर, प्रीति जिंटा और कंगना राणौत जैसे कलाकार दिए हैं। जिनकी अभिनय क्षमता का लोहा दुनिया ने माना है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अगर युवा प्रतिभाओं को उचित अवसर प्रदान किए जाएँ तो सिनेजगत को कई प्रीति जिंटा और अनुपम खेर मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि अवसर न मिलने के कारण कई प्रतिभाएँ दब कर रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि फ़िल्म के नाम और कलाकारों का खुलासा जल्दी ही किया जाएगा और आनेवाले दिनों में फ़िल्म की शूटिंग भी जल्दी ही शुभ मुहूर्त पर शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि फ़िल्म बनाने के लिए जिस कहानी की तलाश थी वह पूरी हो गई है और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न पहलुओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपने लेखन के ज़रिए उजागर करने वाले कहानीकार गुरमीत बेदी इस फ़िल्म की कहानी और संवाद लिखने के साथ-साथ बतौर गैस्ट आर्टिस्ट इसमें अभिनय करते भी नज़र आएँगे।

ऊना/ओ.पी.धीमान

संतोष एलेक्स की पुस्तक का विमोचन


संतोष एलेक्स की नयी पुस्तक अलीगढ़ का कैदी (पुनथिल कुनहब्दुल्लाह के मलयालम उपन्यास का हिंदी रूपांतर) का लोकार्पण पिछले दिनों केरल कला समिति द्वारा आयोजित केरल-उत्सव कार्यक्रम में हुआ। केन्द्र साहित्य अकादमी पुरस्कार विजिता श्री पुनथिल कनहब्दुल्लाह ने पुस्तक की पहली प्रति कला समिति के अध्यक्ष श्री जार्ज थामस को देते हुए इसका लोकार्पण किया।

गांधीवादी विट्ठलभाई पटेल पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन

भोपालः २६ नवंबर २००९, मैं शायर तो नहीं..., झूठ बोले कौआ काटे... और वक्त से पहले किस्मत से ज़्यादा, न किसी को मिला है न किसी को मिलेगा... जैसे गीतों के रचनाकार, गांधीवादी विचारक और राजनेता विट्ठलभाई पटेल के गृह नगर सागर (मध्य प्रदेश) में इस सप्ताह एक विशेष आयोजन हुआ। बुंदेली लोकसंस्कृति और उच्च शिक्षा के प्रमुख केंद्र सागर के राधेश्याम भवन में एक अनूठा गांधीवादी-विट्ठलभाई पटेल पुस्तक का विमोचन किसी एक अतिथि अथवा शख़्सियत ने नहीं किया अपितु संयुक्त रुप से अनेक साहित्यकारों ने किया।

सागर, जिसका नामकरण नगर में स्थित विशाल लक्खी बंजारा तालाब के नाम पर हुआ, बीते वर्षों में एक गड्ढे में तब्दील हो रहा था, तब ये विट्ठलभाई पटेल की पहल ही थी जिसके कारण जनसैलाब इस ऐतिहासिक सरोवर के संरक्षण के लिए जुट गया था। यही नहीं जाने-माने पार्श्व गायक किशोर कुमार को खंडवा में यथोचित सम्मान देने के लिए विट्ठलभाई पटेल ने स्थानीय लोगों को झकझोरा था। चाहे किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए पदयात्रा करने का प्रश्न हो या व्यापक जनहित में दलीय राजनीति छोड़कर धरना देने जैसे गांधीगिरी के काम हों, विट्ठलभाई पटेल की एक अपनी अलग पहचान है। पुस्तक विमोचन के अलावा खेल परिसर के निर्माण का कार्य पूर्ण करने पर श्री सुनील भाई पटेल का सम्मान किया गया। इस अवसर पर आयोजित काव्य संध्या में श्री सरोज कुमार, श्री रमेश दत्त दुबे, श्री निर्मल चंद्र निर्मल, श्री हरगोविंद विश्व, श्री एस.पी.तिवारी आदि ने काव्य पाठ किया।

विवरण- अशोक मनवानी

सिरसा में अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन सम्पन्न


सिरसा (हरियाणा)। श्री युवक साहित्य सदन में गत दिवस हरियाणा साहित्य अकादमी के सहयोग अकादमी के सहयोग से अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब व उत्तर प्रदेश के सुप्रसिद्ध लघुकथाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में श्री भगीरथ (कोटा)को माता शरबती देवी सम्मान, डॉ. बलदेव सिंह खैरा को चौ. मोहर सिंह काम्बोज सम्मान, श्रीमती कृष्णलता यादव गुड़गाँव को श्रीमती रक्षा शर्मा 'कमल'सम्मान व श्रीमती अंजु दुआ जैमिनी को 'माता महादेवी कौशिक' सम्मान प्रदान किया गया। आलेख प्रस्तुति में डॉ. कुलदीप सिंह 'दीप' ने 'बड़े लेखकों से लघुकथा के गुण सीखने का प्रयास' व डॉ. रामकुमार घोटड़ ने 'लघुकथा: काल विभाजन' विषय पर अपने विचार रखे। इसके बाद इन पर डॉ. अनूप सिंह, डॉ. अशोक भाटिया, पूरन मुद्गल व रामेश्वर काम्बोज 'हिमाशु' ने पढ़े गए आलेखों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर चार पुस्तकों (मिन्नी कहाणी लेखकां नाल कुझ खरियाँ-खरियाँ-डॉ अनूप सिंह, लघुकथा- विमर्श- डॉ. रामकुमार घोटड़, पंजाबी मिन्नी त्रैमासिक का हरिशकर परसाई विशेषांक, मौन पुकार- रामकुमार गहलावत) का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. आर. एस सांगवान ने देशभर से आए लघुकथाकारों के जमावड़े को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि लघुकथा विद्या आज समय की ज़रूरत है क्योंकि यह थोड़े शब्दों में ही बहुत कुछ कह जाती है। हरियाणा साहित्य अकादमी पंचकूला की नवनियुक्त निदेशक डॉ. मुक्ता ने अपने संदेश में कहा कि साहित्य की अन्य विधाओं की तरह आज लघुकथा का भी अपना विशिष्ट स्थान है। जापानी, जर्मनी, पंजाबी व अंग्रेज़ी भाषाओं में हिन्दी लघुकथाओं का अनुवाद व शोध कार्य किया जा रहा है। उन्होंने साहित्य के माध्यम से राष्ट्रीय एकता एवं सद्भावना के विकास पर बल दिया ताकि नवचेतना का संचार हो सके व विकृत मनोवृत्तियों के स्थान पर स्वस्थ दृष्टिकोण पनप सके।

अध्यक्ष मंडल में उपस्थित डॉ. अनूप सिंह, सुखबीर सिंह जैन व सुकेश साहनी ने भी कार्यक्रम में अपने विचार रखे और लघुकथा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पंजाबी त्रैमासिक मिन्नी संस्था के श्याम सुंदर अग्रवाल, डॉ. श्याम सुंदर 'दीप्ति' व विक्रमजीत सिंह नूर ने जुगनुआँ दे अंग–संग कार्यक्रम का संचालन किया। जिसमें उपस्थित लघुकथाकारों ने अपनी एक–एक लघुकथा का पाठ किया व प्रत्येक लघुकथा पर डॉ. अशोक भाटिया, सुकेश साहनी, निरंजन बोहा, कुलदीप सिंह दीप, नायब सिंह, डा. अनूप सिंह आदि ने चर्चा व समीक्षा की। सिरसा के पूरन मुद्गल, डॉ. रूप देवगुण, सुखचैन सिंह भंडारी, डॉ. शील कौशिक, सत्य प्रकाश भारद्वाज, हरीश सेठी, श्रीमती प्रेम भटनागर, ने भी लघुकथा का पाठ किया। मंच संचालन हरियाण लेखिका मंच की अध्यक्षा डॉ. शील कौशिक ने किया।

प्रस्तुति- डॉ शील कौशिक

यू.के. में भाषिक कंप्यूटिंग और मल्टी मीडिया कार्यशालाएँ

२७ सितंबर से ११ अक्तूबर २००९ के बीच यू.के. के विभिन्न शहरों में भारत से आए रेल मंत्रालय के पूर्व निदेशक डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा द्वारा संस्कृति यू.के. के महासचिव श्री अरुण त्रिवेदी और लंदन स्थित भारतीय उच्चायुक्त कार्यालय के हिंदी व संस्कृति अताशे श्री. आनंद कुमार के सहयोग से हिंदी और अन्य इंडिक भाषाओं में भाषिक कंप्यूटिंग और मल्टी मीडियी हिंदी शिक्षण पर विभिन्न कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। साथ ही हिंदू सोसायटी और अंकुर आर्टस अँड कल्चरल सोसायटी के तत्वावधान में हिंदी शिक्षकों और शिक्षार्थियों के लिए हिंदी सीखने-सिखाने के लिए मल्टी मीडिया प्रस्तुति का आयोजन भी किया गया। इन कार्यशालाओं में विभिन्न व्यवसायों से जुड़े भारतीयों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। अधिकांश प्रतिभागी अपने लैपटॉप के साथ कार्यशाला में पहुँचे।

कार्यशालाओं की इस शृंखला का आरंभ २७ सितंबर २००९ लंदन के गुजराती बहुल क्षेत्र वेंबले में हुआ। इसकी अध्यक्षता लंदन स्थित भारतीय राजदूतावास के हिंदी व संस्कृति अताशे श्री आनंद कुमार ने की। आशा के विपरीत इस कार्यशाला में गुजराती और हिंदी के अलावा बंगाली प्रतिभागियों ने भी भाग लिया। इस कार्यशाला के प्रतिभागियों में मुख्य रूप से चार्टर्ड अकाउंटेंट, व्यवसायी, शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, छात्र और गृहिणियाँ थीं। इस कार्यशाला की उपलब्धि यह रही कि इनमें से अधिकांश प्रतिभागी अब गुजराती, बंगला या हिंदी में ई-मेल आदि भेजने लगे हैं। अगली कार्यशाला १ अक्तूबर २००९ को फिंचले (लंदन) स्थित हिंदू कल्चरल सोसायटी के प्रांगण में आयोजित की गई। इस कार्यशाला में युवा और बुजुर्ग दोनों ही प्रकार के प्रतिभागी थे और ये सब लोग हिंदी में कंप्यूटर पर काम करने के लिए बहुत ही उत्साही थे। तीसरी कार्यशाला वेल्स की राजधानी कार्डिफ़ में इंडिया हाउस में स्थित मंदिर के प्रांगण में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता 'गोपिओ' के अध्यक्ष श्री के.एन.गुप्ता ने की। इस कार्यशाला में भी अनेक डॉक्टर, पत्रकार, बुद्धिजीवी और स्वयं मंदिर के पुजारी भी शामिल हुए और कई प्रतिभागियों ने उसी दिन हिंदी कंप्यूटिंग की शुरुआत की। चौथी कार्यशाला का आयोजन कलासंगम की अध्यक्षा श्रीमती गीता उपाध्याय और उनके पति श्री उपाध्याय के सान्निध्य में ब्रैडफर्ड के वास्तुकला की दृष्टि से अत्यंत भव्य भवन में किया गया। पाँचवी और अंतिम कार्यशाला का आयोजन हिंदी व संस्कृति अताशे श्री आनंद कुमार के सान्निध्य में लंदन स्थित भारत के राजदूतावास में ६ अक्तूबर २००९ को किया गया, जिसमें हिंदी के अलावा, पंजाबी, नेपाली और मलायलम भाषियों के अलावा हिंदी के प्रसिद्ध लेखक श्री तेजेंद्र शर्मा और हिंदी प्रेमी श्री के बी एल सक्सेना ने भी भाग लिया। इस कार्यशाला में हिंदी और संस्कृत के साथ-साथ भाषिक कंप्यूटिंग में भी निष्णात सुश्री कविता वाचक्नवी ने भी हिंदी में वेबसाइट निर्माण पर अपने अनुभव सुनाए।