उदयपुर। हिन्दी की रचनात्मकता अपने लिए बरसों बाद एक भिन्न शिल्प की तलाश कर रही है। जो संस्मरण होना चाहिए था वह संस्मरण नहीं है, समीक्षा भी है, जो कहानी होनी चाहिए वह बीज उपन्यास भी है, जो जीवनी होनी चाहिए वह बहस भी है। ये आशावादी संकेत हैं। सुप्रसिध्द कथाकार और 'प्रगतिशील वसुधा' के सम्पादक स्वयं प्रकाश ने उक्त विचार 'बनास' द्वारा आयोजित एक गोष्ठी में व्यक्त किए। 'नयी रचनाशीलता और हमारा समय' पर स्वयं प्रकाश ने कहा कि लेखन में आ रही विविधता का पाठकों ने स्वागत किया है और ऐसी कोशिशों से संभव है कि भविष्य में कुछ मौलिक कला रूप उभरें।
गोष्ठी में वरिष्ठ आलोचक प्रो. नवल किशोर ने यात्रावृत्तान्त, डायरी और कथा रिपोर्ताजों के रूप में आ रही नयी रचनाशीलता पर विस्तृत टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इन कलारूपों ने सर्वथा नये गद्य की सृष्टि भी संभव की है। उन्होंने ममता कालिया की कृति 'कितने शहरों में कितनी बार' और स्वयं प्रकाश की कथा रिपोर्ताज शृंखला 'जो कहा नहीं गया' का उल्लेख कर बताया कि इनमें यथार्थ के प्रचलित ढाँचे से हटकर रचना कर्म आया है। 'सम्बोधन' के सम्पादक क़मर मेवाड़ी ने लघु पत्रिकाओं के समक्ष आ रही नयी चुनौतियों की चर्चा करते हुए कहा कि तुरन्त प्रसिध्दि के मोह से बचकर ही गंभीर रचनाशीलता संभव है।
सिरोही से आये समालोचक एवं मीडिया विश्लेषक डॉ. माधव हाड़ा ने नयी रचनाशीलता पर सूचना तकनीक के असर को निर्णायक बताते हुए कहा कि अस्मितावादी विमर्शों के प्रसार में नये प्रभावों की भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया न केवल साहित्य की रचना प्रक्रिया को अपितु आस्वाद प्रक्रिया को भी भीतर-भीतर बदल रहा है। 'बनास' के सम्पादक डॉ. पल्लव ने कहा कि नयी रचनाशीलता की सक्रियता आलोचना के लिए बड़ी चुनौती लाई है जहां परिदृश्य में एक साथ चार-पांच कथा पीढ़ियाँ एक साथ कहानी लिख रही है। आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिकारी लक्ष्मण व्यास ने विगत तीन-चार वर्षों में उभर कर आई नयी कथा पीढ़ी की चर्चा करते हुए कहा कि विचारधारा और प्रतिबध्दता की चालू जकड़बन्दी को इसने तोड़ा है।
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि नन्द चतुर्वेदी ने कहा कि रचनाशीलता में नयापन स्वयमेव सम्मिलित है। उन्होंने सवाल किया कि रचनाशीलता के नयेपन की चर्चा मध्यवर्गीय आकर्षण से तो नहीं उपजी है क्योंकि इससे अन्देशा होता है कि यह आकर्षण साहित्य को सार्वभौमिक भावक्षेत्र से विरत न कर दे। नन्द बाबू ने कहा कि हमारे युवा रचनाकार पश्चिमी आग्रहों से आक्रान्त न हों यह चिन्ता जरूरी है, साथ ही रचनाशीलता के चरित्र को भी विश्लेषित किया जाना जरूरी है।
गोष्ठी के अन्त में क़मर मेवाड़ी ने उपरना और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वयं प्रकाश का अभिनन्दन किया। संयोजन कर रहे गजेन्द्र मीणा ने सभी का आभार माना।
(गणेशलाल मीणा)
सहयोगी संपादक 'बनास'
रविवार, 26 जुलाई 2009
१५ वाँ अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान संपन्न
(बैठे हुए बाएँ से मोहन राणा, ज़कीया ज़ुबैरी, टोनी मैकनल्टी, मधु अरोड़ा, श्रीमती मोहन राणा। खड़े हुएः आनंद कुमार, तेजेन्द्र शर्मा, विभाकर बख़्शी, के.सी. मोहन, रवि शर्मा, इंदिरा, अजित राय) लंदन (१० जुलाई), ब्रिटेन के सांसद और पूर्व आंतरिक सुरक्षा राज्य मंत्री टोनी मैक्नल्टी ने ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ़ कॉमन्स में आयोजित एक गरिमामय समारोह में हिन्दी के सुपरिचित कथाकार भगवानदास मोरवाल को उनकी अनुपस्थिति में १५ वाँ अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान प्रदान किया। किसी कारणवश मोरवाल पुरस्कार लेने लंदन नहीं आ सके। यह सम्मान मोरवाल के नवीनतम उपन्यास 'रेत' (राजकमल प्रकाशन) के लिये दिया गया। उनकी ओर से यह सम्मान उनके मित्र और दिल्ली के सांस्कृतिक पत्रकार अजित राय ने प्राप्त किया। इस अवसर पर उन्होंने ब्रिटेन के हिन्दी लेखकों के लिए स्थापित 'पद्मानंद सम्मान' ब्रिटिश हिन्दी कवि मोहन राणा को उनके ताज़ा कविता संग्रह 'धूप के अन्धेरे में' (सूर्यासेत्र प्रकाशन) के लिये प्रदान किया। इस सम्मान का यह दसवाँ साल है।
टोनी मैक्नल्टी ने लंदन एवं ब्रिटेन के अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आए एशियाई लेखकों और ब्रिटिश साहित्य प्रेमियों को संबोधित करते हुए कहा कि भाषा संगीत की तरह होती है। यदि आप किसी दूसरे की भाषा समझते हैं तो आप ज़िन्दगी की लय को समझ सकते हैं। दूसरों की भावनाओं को समझ सकते हैं। भाषा में आप सपने रच सकते हैं। इस तरह भाषा के माध्यम से आप मनुष्यता तक पहुँच सकते हैं। उन्होंने हिन्दी में अपना भाषण शुरू करते हुए कहा की भाषाओं के माध्यम से हम सभ्यताओं के बीच संवाद स्थापित कर सकते हैं। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि आपकी पहचान होती है। उन्होंने कहा कि कथा यू.के. पिछले कई वर्षों से ब्रिटेन में बसे एशियाई समुदाय के बीच भाषा और साहित्य के माध्यम से संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
हाउस ऑफ़ लॉर्डस में भारतीय मूल के सांसद लॉर्ड तरसेम किंग ने कहा कि ब्रिटेन जैसे देश में सारी भाषाएँ एक दूसरे की पूरक हैं। अंग्रेज़ी जानना हिन्दी का विरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि कथा यू.के. भाषा और साहित्य के क्षेत्र में काम कर रही संस्थाओं के बीच समन्वय का काम कर रही है।
लेबर पार्टी की काउंसलर और कथा यू.के. की सहयोगी संस्था एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स की अध्यक्ष ज़कीया ज़ुबैरी ने भगवानदास मोरवाल के पुरस्कृत उपन्यास 'रेत' का परिचय देते हुए कहा कि लेखक ने काफ़ी शोध के बाद एक ऐसी कथा पेश की है जिसका समाजशास्त्रीय अध्ययन किया जाना चाहिए। इस उपन्यास में कंजर जाति की स्त्रियों के जीवन संघर्ष का ऐसा प्रमाणिक चित्रण है कि पाठक चकित रह जाता है।
लंदन में नेहरू सेंटर की निदेशक मोनिका कपिल मोहता ने कहा कि कथा यू.के. को अब ब्रिटेन के साथ साथ युरोप, अमरीका और अन्य देशों में भी अपनी गतिविधियों की नेटवर्किंग करनी चाहिए। भारतीय उच्चायोग में मंत्री समन्वय आसिफ़ इब्राहिम ने कहा कि भाषा एवं संस्कृति के बिना जीवन अधूरा है। इसे बचाने की हर संभव कोशिश करनी चाहिये। उच्चायोग के हिन्दी एवं संस्कृति अधिकारी आनंद कुमार ने कथा यू.के. के प्रयासों की सराहना करते हुए विदेशों में हिन्दी के नाम पर हो रही गतिविधियों में गंभीरता और गुणवत्ता लाने की वक़ालत की।
कथा यू.के. के महासचिव तेजेन्द्र शर्मा ने १५ वर्षों की कथा-यात्रा को याद करते हुए कहा कि मुंबई से शुरू हो कर हम ब्रिटेन की संसद तक पहुँचे हैं। अब हम अपनी गतिविधियों को नया विस्तार देना चाहते हैं। कथा यू.के. आने वाले दिनों में विदेशों में और भारत में हिन्दी भाषा और साहित्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन करने जा रही है। इससे विश्व स्तर पर हो रहे निजि प्रयासों की नई नेटवर्किंग सामने आएगी।
इस अवसर पर मोहन राणा ने सम्मान स्वीकार करते हुए अपनी नई कविताओं का पाठ किया। पुरस्कृत उपन्यास रेत उपन्यास पर सुशील सिद्धार्थ एवं मोहन राणा के काव्य संकलन 'धूप के अन्धेरे' में पर गोबिन्द प्रसाद के आलेखों का पाठ किया गया। इंदु शर्मा की पुत्री दीप्ति कुमार ने भगवानदास मोरवाल और ललित मोहन जोशी ने मोहन राणा का परिचय दिया। मधु अरोड़ा (मुंबई) ने कथा यू.के. १५ वर्षों की यात्रा का विवरण दिया। सरस्वती वंदना जटानील बैनरजी ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन किया सनराइज़ रेडियो के लोकप्रिय कलाकार रवि शर्मा ने।
कथा यू.के. के इस आयोजन में हिन्दी, उर्दू, पंजाबी, गुजराती एवं अंग्रेज़ी भाषा के लेखक बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूर्व पद्मानंद सम्मान विजेता डॉ. गौतम सचदेव, दिव्या माथुर एवं गोविन्द शर्मा के अतिरिक्त समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए मौजूद थे सर्वश्री मधुप मोहता, प्रो. अमीन मुग़ल, प्रो. जगदीश दवे, बलवन्त जानी (भारत), के.सी. मोहन (प्रलेस - पंजाबी), डॉ. इतेश सचदेव (सोआस विश्विद्यालय), कैलाश बुधवार, डॉ. नज़रूल इस्लाम, अचला शर्मा, वेद मोहला, ग़ज़ल गायक सुरेन्द्र कुमार एवं इन्द्र स्याल, इलाहबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सुधीर नारायण सक्सेना, अनुज अग्रवाल (सूर्यास्त्र प्रकाशन), डॉ. हबीब ज़ुबैरी, महेन्द्र दवेसर, जय वर्मा, डॉ. महीपाल वर्मा, विभाकर बख़्शी एवं रमेश पटेल।
दीप्ति कुमार, (संयोजक – कथा यू.के. सम्मान समिति)
"राजभाषा अधिकारी कोश" के सम्बंध में सूचना
देश भर के राजभाषा अधिकारियों को एक सूत्र में पिरोने के लिए "भारत पब्लिकेशन" (द डायरेक्टरी पीपुल) की ओर से "राजभाषा अधिकारी कोश" का प्रकाशन सितंबर में होगा। इस अखिल भारतीय कोश का संपादन वरिष्ठ पत्रकार व पत्रकारिता कोश के संपादक मो. आफताब आलम करेंगे। यह पहला अवसर है जब राजभाषा हिंदी के प्रचार, प्रसार व कार्यान्वयन के लिए नियुक्त किए गए राजभाषा अधिकारियों को एक मंच पर लाने के लिए किसी कोश का प्रकाशन किया जा रहा है।
राजभाषा अधिकारी कोश में सरकारी कार्यालयों, उपक्रमों, संस्थानों, बैंकों, आदि में राजभाषा कार्यान्वयन के लिए नियुक्त विभिन्न स्तर के अधिकारियों, जैसे-हिंदी अधिकारी, वरिष्ठ हिंदी अधिकारी, प्रबंधक (राजभाषा), सहायक प्रबंधक (राजभाषा), उप प्रबंधक (राजभाषा), महाप्रबंधक (राजभाषा), सहायक निदेशक (राजभाषा), उप निदेशक (राजभाषा), निदेशक (राजभाषा), राजभाषा प्रभारी, आदि के नाम, पदनाम, पता, फोन, मोबाइल नंबर, ई-मेल पता आदि की जानकारी प्रकाशित की जाएगी। साथ ही देश भर में संचालित की जा रही नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के विवरण, साहित्यिक संस्थाएँ, साहित्य प्रेमी, सरकारी पत्र-पत्रिकाएँ, आदि के विवरण भी शामिल किए जाएँगे।
लगभग ३०० पृष्ठों पर आधारित इस कोश के प्रकाशन हेतु राजभाषा अधिकारियों व संबंधित जानकारियों को संकलित करने का काम तेज़ी से चल रहा है। सभी सरकारी कार्यालयों, उपक्रमों, बैंकों के राजभाषा अधिकारियों, साहित्य प्रेमियों, साहित्यिक संस्थाओं से अनुरोध है कि वे अपना विवरण ३१ जुलाई, २००९ तक संपादक, राजभाषा अधिकारी कोश, भारत पब्लिकेशन, प्लॉट नं १४- जे-७, शिवाजी नगर, कोंकण बैंक के सामने, गोवंडी, मुंबई- ४०००४३१. महाराष्ट्र के पते पर भेज दें अथवा मोबाइल नंबर ०९२२४१६९४१६ / ९८२०१२०९१२ या ई-मेल-aftaby2k@hotmail।com पर संपर्क कर सकते हैं।
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